अमेरिका की तरह अब मेक्सिको ने भी किसी दबाव के चलते भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा करके एक बड़ी हिमाकत की है। असल में मेक्सिको ने भारत समेत कई एशियाई देशों से आयातित उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाने का एकतरफा फैसला लिया है, जो 1 जनवरी 2026 से लागू होगा। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मेक्सिको ने उससे कोई बातचीत के बिना ही यह निर्णय किया है जिस पर सवाल उठने स्वाभाविक हैं। भारत सरकार ने अपने निर्यातकों के हितों की रक्षा का आश्वासन दिया है।
क्यों लगा टैरिफ
मेक्सिको की सीनेट ने गत 11 दिसंबर 2025 को इस संबंध में एक विधेयक को मंजूरी दी थी, जो वहां की संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है। यह कदम उन देशों पर लागू होना है जिनके साथ मेक्सिको का मुक्त व्यापार समझौता नहीं है, जैसे भारत, चीन, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड और इंडोनेशिया। इसका उद्देश्य स्थानीय मैन्युफैक्चिरिंग को बढ़ावा देना और व्यापार असंतुलन को कम करना बताया जा रहा है, जिसमें करीब 1,463 शुल्क लाइनों पर 5 से 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का प्रावधान है।

भारत के ये उत्पाद होंगे प्रभावित
हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक सूची तो जारी नहीं हुई है, लेकिन जो भी पता चला है उसके अनुसार ऑटो पार्ट्स, स्टील, टेक्सटाइल, प्लास्टिक उत्पाद, फुटवियर और अन्य सेक्टरों पर मेक्सिको 35-50 प्रतिशत टैरिफ लगा सकता है। ये उत्पाद भारत के मेक्सिको निर्यात का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। दोनों देशों के बीच 2024 में द्विपक्षीय व्यापार 11.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। इससे भारतीय निर्यातकों को थोड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां मेक्सिको का बाजार महत्वपूर्ण माना जाता रहा है।
भारत की कड़ी प्रतिक्रिया
भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, विभिन्न माध्यमों से मेक्सिको के साथ इस मुद्दे पर संपर्क बनाए रखा गया है। यहां बता दें कि, 30 सितंबर 2025 को भारतीय दूतावास ने विशेष रियायतों की मांग की थी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत पारस्परिक लाभ देने वाले समाधान के लिए तैयार है और निर्यातकों के हितों की रक्षा के लिए उचित कदम उठाएगा। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और मेक्सिको के उप-आर्थिक मंत्री के बीच उच्चस्तरीय बैठक हो चुकी है, साथ ही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की औपचारिक वार्ता शुरू करने की दिशा में भी तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है।
निर्यातकों को आश्वासन
भारत सरकार ने निर्यातकों को आश्वस्त किया है कि वह वैश्विक व्यापार नियमों के अनुरूप मेक्सिको से संवाद जारी रखेगी और दोनों देशों के व्यवसायों व उपभोक्ताओं के लिए स्थिर व्यापारिक माहौल सुनिश्चित करेगी। कारोबारी विशेषज्ञों के अनुसार, FTA भारतीय कंपनियों को इन शुल्कों से बचा सकता है, जो लगता है, अमेरिकी दबाव में लगाए गए हैं। भारत के कई निर्यातक संगठन भी FTA की मांग कर रहे हैं ताकि नुकसान ज्यादा लंबा न खिंचे।
वैश्विक व्यपार युद्ध
मेक्सिको की यह टैरिफ हिमाकत वैश्विक व्यापार युद्ध का हिस्सा लगती है, जहां अमेरिका के बाद मेक्सिको भी एशियाई आयात पर निर्भरता कम करने की बात कर रहा है। भारत के लिए मेक्सिको नौवां सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, इसलिए इसका आंशिक असर स्टील, टेक्सटाइल और ऑटो जैसे क्षेत्रों पर पड़ सकता है। इधर केन्द्र सरकार की कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं जिनसे संभावित FTA कारगर होने और उससे स्थिति सुधरने की उम्मीद है।

















