वामपंथ का आखिरी गढ़ कहे जा रहे केरल के हालिया स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा की बड़ी सफलता ने वामपंथियों में खलबली मचा दी है। खासकर तिरुवनंतपुरम नगर निगम पर भाजपा की जीत ने सबको चौंका दिया, क्योंकि यहां दशकों से लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) का कब्जा था। भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने एक नगर निगम, दो नगरपालिकाएं और 26 ग्राम पंचायतें जीत लीं। इससे बौखलाई सीपीआई ने इसे सेक्युलरिज्म पर खतरा करार दे दिया है।
भाजपा की जीत बौखलाए वामपंथी
सीपीआई के प्रदेश सचिव और पूर्व राज्यसभा सांसद बिनॉय विश्वम ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में कहा कि केरल में भाजपा का बढ़ना बहुत गंभीर बात है और यह बड़ा खतरा है। उनका कहना था कि भाजपा चतुवर्ण व्यवस्था में यकीन करती है, और जब वह अपनी विचारधारा के साथ केरल में आती है तो यह राज्य के लिए खतरा बन जाती है। विश्वम ने जोर दिया कि इसका मुकाबला करने का रास्ता ढूंढना होगा। उन्होंने कम्युनिस्ट आंदोलन से अपील की कि वह स्थिति की गंभीरता को समझे।
लेफ्ट क्यों है चिंतित
सत्तारूढ़ एलडीएफ के लिए यह जीत बड़ा झटका है। बिनॉय विश्वम ने अल्पसंख्यकों को संदेश दिया कि लेफ्ट उनके साथ खड़ा है और उनके अधिकारों की रक्षा करेगा। उन्होंने कहा कि हम उनकी घबराहट को समझते हैं। विश्वम का मानना है कि राज्य और देश को आगे बढ़ाने का एकमात्र रास्ता सेक्युलरिज्म है, और लेफ्ट इसमें पूरी तरह प्रतिबद्ध है। लेफ्ट खेमे में भाजपा के बढ़ते कदम को लेकर चिंता साफ दिख रही है।
यूडीएफ ने हार के क्या कारण बताए
कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने अपनी हार के पीछे कई वजहें गिनाईं। उनके मुताबिक, शबरीमाला मामला, भ्रष्टाचार के आरोप, भाई-भतीजावाद, तुष्टीकरण और जनता से जुड़ाव की कमी जैसे मुद्दों से सत्ता विरोधी लहर पैदा हुई, जिसका फायदा भाजपा को मिला। यूडीएफ ने राज्य सरकार पर पीएम श्री योजना, केंद्र के श्रम कानूनों और बहुसंख्यक समुदाय को खुश करने के प्रयासों के आरोप भी लगाए। उनका कहना है कि ये सब मिलकर लेफ्ट की हार का कारण बने।
भाजपा के लिए क्या मतलब
भाजपा के राज्य नेतृत्व का दावा है कि तिरुवनंतपुरम नगर निगम जैसी जीत उन्हें आगे मजबूत बनाएगी। दोनों पारंपरिक मोर्चों – एलडीएफ और यूडीएफ – के लिए यह झटका है, क्योंकि केरल में लंबे समय से राजनीति इन्हीं दो गठबंधनों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। भाजपा इसे अपनी पैठ बढ़ाने का मौका मान रही है।















