गुरुवार को संसद के शीतकालीन सत्र में प्रयागराज से सांसद उज्जवल रमण सिंह ने एक बहुत ही खास मुद्दा उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि देश में हमारी देसी गायों की नस्लों को बचाने और उनका संरक्षण करने की जरूरत है। उनका कहना था कि गाय सिर्फ जानवर नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान का अहम हिस्सा है। इसलिए गाय को ‘राष्ट्रमाता’ या ‘राजमाता’ का दर्जा देना चाहिए।
देश में देसी गायों की सुरक्षा और राष्ट्रमाता दर्जा देने की मांग- सांसद उज्जवल रमण सिंह ने शून्यकाल के दौरान कहा कि देश में देसी गायों की संख्या तेजी से घट रही है। अगर इस दिशा में तुरंत कदम नहीं उठाए गए तो हमारी देसी नस्लें खो सकती हैं। उन्होंने कहा कि गाय की गरिमा और सम्मान बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। इसलिए सरकार को गोवंश के सभी जानवरों के वध पर पूरी तरह से रोक लगाने के उपाय करने चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि इस मुद्दे को लेकर कई धार्मिक और सामाजिक नेता लगातार प्रयास कर रहे हैं। विशेष रूप से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद लंबे समय से गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए काम कर रहे हैं। उज्जवल रमण सिंह ने कहा कि उनका प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि देश में गायों का संरक्षण हो और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो।
गाय राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक और संरक्षण की आवश्यकता- सांसद ने कहा कि गाय हमारे लिए सिर्फ दूध देने वाला जानवर नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय गौरव और संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि देसी गायों की नस्लों को बचाने के लिए विशेष योजना बनाई जाए। उनका मानना है कि अगर हम समय रहते यह कदम नहीं उठाएंगे, तो हमारी पारंपरिक और देसी नस्लें खतरे में पड़ सकती हैं। इस अवसर पर उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और नागरिकों से अपील की कि गाय के महत्व को समझें और इसके संरक्षण में योगदान दें। उन्होंने जोर देकर कहा कि गाय को राष्ट्रमाता या राजमाता का दर्जा देने से हमारी संस्कृति और पारंपरिक मूल्य भी मजबूत होंगे।
















