केरल के स्थानीय निकाय चुनावों के परिणाम हाल ही में आए हैं। मुनंबम सीट पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने शानदार जीत हासिल की है। यह जीत खास इसलिए है क्योंकि मुनंबम लंबे समय से विवादों का केंद्र रहा है, खासकर राज्य वक्फ बोर्ड से जुड़ी जमीन के मामले को लेकर। इस सीट की अहमियत और बढ़ गई है क्योंकि यहां लगभग 500 ईसाई परिवार लंबे समय से अपनी जमीन के लिए विरोध कर रहे थे।
मुनंबम विवाद की शुरुआत 2019 में हुई थी। केरल वक्फ बोर्ड ने मुनंबम की 404 एकड़ से ज्यादा जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया था। इस जमीन पर कई परिवार रहते हैं, जिनमें ज्यादातर ईसाई हैं। इन परिवारों का कहना था कि वक्फ बोर्ड ने उनकी जमीन पर अवैध दावा किया है और उन्हें बेदखली का खतरा है। परिवारों ने अपनी जमीन पर अधिकार पाने की मांग की और मुनंबम भूमि संरक्षण परिषद के तहत 400 दिन से ज्यादा समय तक विरोध प्रदर्शन किया। इस विवाद ने 2023 और 2024 में राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर ध्यान खींचा। इस साल केंद्र सरकार ने वक्फ संपत्तियों के लिए वक्फ संशोधन विधेयक पास किया। इस कानून के तहत सरकार की भूमिका बढ़ गई, जिससे मुनंबम के परिवारों की चिंता और बढ़ गई।
शुरुआत में, इन परिवारों ने चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया था। उनका मानना था कि उनकी जमीन और अधिकारों की लड़ाई में वोट डालने से कोई फायदा नहीं होगा। लेकिन बाद में उन्होंने चुनाव में हिस्सा लिया। यह निर्णय उस समय आया जब केरल उच्च न्यायालय ने मुनंबम की जमीन को वक्फ संपत्ति नहीं माना। यह फैसला प्रदर्शनकारियों के लिए बड़ी जीत थी। हालांकि, इसके कुछ समय बाद सर्वोच्च न्यायालय ने इस फैसले पर रोक लगा दी और विवादित जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। मुनंबम में भाजपा की जीत राजनीतिक रूप से भी बड़ी मानी जा रही है। केरल भाजपा के महासचिव अनूप एंटनी जोसेफ ने इसे “ऐतिहासिक जीत” बताया। जोसेफ ने कहा कि मोदी सरकार और भाजपा वक्फ के खिलाफ लड़ाई में मुनंबम के लोगों के साथ खड़ी रही और अब उन्होंने भाजपा को अपना जनादेश दिया है।

















