न्यायपालिका पर सियासी वार? जस्टिस स्वामीनाथन और हिंदू अधिकारों की अनदेखी
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न्यायपालिका पर सियासी वार? जस्टिस स्वामीनाथन और हिंदू अधिकारों की अनदेखी

आजादी के बाद से भारतीय राजनीति में एक पैटर्न स्पष्ट दिखाई देता है। सेक्युलरिज्म के नाम पर गठबंधन बनाने वाली पार्टियां अक्सर हिंदू परंपराओं और अधिकारों को सेक्युलरिज्म के लिए खतरा मानती रही हैं।

Written byआशीष कुमार 'अंशु'आशीष कुमार 'अंशु' — edited by Mahak Singh
Dec 13, 2025, 01:24 pm IST
inभारत
जस्टिस स्वामीनाथन

जस्टिस स्वामीनाथन

आजादी के बाद से भारतीय राजनीति में एक पैटर्न स्पष्ट दिखाई देता है। सेक्युलरिज्म के नाम पर गठबंधन बनाने वाली पार्टियां अक्सर हिंदू परंपराओं और अधिकारों को सेक्युलरिज्म के लिए खतरा मानती रही हैं। तमिलनाडु के थिरुपरनकुंद्रम मंदिर में कार्तिगाई दीपम उत्सव को लेकर मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन के फैसले ने इस पैटर्न को एक बार फिर उजागर कर दिया है। जज के पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों की रक्षा करने वाले आदेश पर इंडिया (INDIA) ब्लॉक के 120 से अधिक सांसदों ने महाभियोग प्रस्ताव दाखिल किया। यह कदम न केवल न्यायिक स्वतंत्रता पर हमला है, बल्कि हिंदू धार्मिक अधिकारों को दबाने की कोशिश भी लगता है।

विवाद की जड़: थिरुपरनकुंद्रम कार्तिगाई दीपम मामला

थिरुपरनकुंद्रम मुरुगन मंदिर तमिलनाडु के छह प्रमुख मुरुगन अभयारण्यों में से एक है। यहां सदियों से कार्तिगाई दीपम उत्सव के दौरान पहाड़ी पर स्थित दीपथून (दीप स्तंभ) पर दीपक जलाने की परंपरा रही है। यह स्थल एक दरगाह के निकट है, जिस वजह से पिछले कुछ दशकों में प्रशासनिक प्रतिबंध लगाए गए और दीपक को नीचे के दीपा मंडपम में जलाया जाने लगा।

दिसंबर 2025 में हिंदू संगठनों ने मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच में याचिका दायर की। जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन ने 1 दिसंबर को आदेश दिया कि मंदिर प्रशासन दीपथून पर दीपक जलाने की अनुमति दे और पुलिस सुरक्षा प्रदान करे। जज ने स्पष्ट कहा कि यह सदियों पुरानी तमिल हिंदू संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है और मंदिर संपत्ति पर यह अधिकार बहाल किया जाना चाहिए।

तमिलनाडु की डीएमके सरकार ने इस आदेश का पालन नहीं किया। कार्तिगाई दीपम के दिन (3 दिसंबर) दीपक नीचे ही जलाया गया। जज ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को फटकार लगाई और 4 दिसंबर को फिर आदेश दोहराया। इसके बावजूद प्रशासन टालमटोल करता रहा, जिससे जज ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को तलब किया। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है।

INDIA ब्लॉक का महाभियोग प्रस्ताव: राजनीतिक प्रतिशोध?

09 दिसंबर 2025 को INDIA ब्लॉक के सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को नोटिस सौंपा। इसमें डीएमके की कनिमोझी, कांग्रेस की प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव और टी.आर. बालू जैसे नेताओं के हस्ताक्षर थे। प्रस्ताव में जज पर पक्षपात, न्यायिक अतिक्रमण और सेक्युलर सिद्धांतों का उल्लंघन का आरोप लगाया गया।

यह प्रस्ताव सिर्फ एक फैसले पर आधारित है, जो हिंदू परंपरा के पक्ष में था। महाभियोग संविधान के अनुच्छेद 217 (हाई कोर्ट जज) और 124 के तहत गंभीर प्रक्रिया है, जो साबित कदाचार पर ही लागू होती है। यहां न तो भ्रष्टाचार का आरोप है, न प्रक्रिया उल्लंघन का। फिर भी, 120 सांसदों का एकजुट होना दिखाता है कि यह राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है।

जातीय और वैचारिक सबटेक्स्ट

जस्टिस स्वामीनाथन ब्राह्मण समुदाय से हैं। डीएमके का राजनीतिक आधार लंबे समय से ब्राह्मण-विरोधी बयानबाजी पर टिका रहा है। पार्टी के इकोसिस्टम में ब्राह्मणों को अक्सर विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग के रूप में चित्रित किया जाता है। एक ब्राह्मण जज का हिंदू परंपराओं की रक्षा करना डीएमके के लिए असहज है। पहले भी जज के कुछ फैसलों पर जातीय कोण से हमले हुए हैं।

उदाहरण के लिए, अन्य जजों पर भ्रष्टाचार या विवादास्पद फैसलों के आरोप लगे, लेकिन उन पर इतनी तेज प्रतिक्रिया नहीं हुई। जब जस्टिस सेंथिलकुमार का जिक्र मात्र हुआ तो समर्थकों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन जस्टिस स्वामीनाथन पर सोशल मीडिया हमलों को अनदेखा किया गया। यह दोहरा मापदंड जातीय पूर्वाग्रह को इंगित करता है।

न्यायिक स्वतंत्रता पर खतरा: पूर्व जजों की चेतावनी

इस प्रस्ताव की व्यापक निंदा हुई है। 56 सेवानिवृत्त जजों, जिनमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश भी शामिल हैं, ने संयुक्त बयान जारी कर इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम राजनीतिक अपेक्षाओं के अनुरूप न चलने वाले जजों को धमकाने का प्रयास है। बयान में 1975 के आपातकाल की याद दिलाई गई, जब जजों को पदोन्नति रद्द कर दबाया गया था।

Topics: India Blockimpeachment motionJustice G.R. Swaminathanjudicial independenceHindu religious rightsKarthigai Deepam controversyThiruparankundram Murugan Temple
आशीष कुमार 'अंशु'
आशीष कुमार 'अंशु'
आशीष कुमार अंशु पत्रकार, लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आम आदमी के सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों तथा भारत के दूरदराज में बसे नागरिकों की समस्याओं पर अंशु ने लम्बे समय तक लेखन व पत्रकारिता की है। अंशु मीडिया स्कैन ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और दस वर्षों तक मानवीय विकास से जुड़े विषयों की पत्रिका सोपान STEP से जुड़े रहे हैं। [Read more]
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