पाकिस्तान से सूत्रों के माध्यम से मिल रहे सुरागों के अनुसार वहां नए नए सीडीएफ बने सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर अब खुलकर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खां के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। अंदरखाने ही सही, लेकिन सुगबुगाहट है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख मुनीर न सिर्फ इमरान खान, बल्कि उनकी पार्टी पीटीआई और उनके करीबियों के विरुद्ध भी राजनीतिक बदले की भावना से काम कर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से मुनीर का यही एकमात्र एजेंडा दिखाई दे रहा है। पूर्व आईएसआई चीफ जनरल फैज हमीद को एक फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल के माध्यम से 14 साल की सजा सुनाई गई है। फैज इमरान के करीबी माने जाते हैं। पाकिस्तान के कुछ बड़े सैन्य अफसरों ने अब यह कहना शुरू कर दिया है कि फैज के बयान और सबूतों ने इमरान खान के खिलाफ एक सैन्य न्यायालय के मुकदमा चलाने का मजबूत ‘आधार’ प्रदान किया है। पूर्व प्रधानमंत्री को कथित रूप से राज्य को अस्थिर करने और राजनीतिक उथल-पुथल भड़काने के प्रयासों से जोड़ा जा रहा है।
बदले की कार्रवाई के आरोप
पाकिस्तान की सेना में जारी आंतरिक उथल-पुथल ने राजनीतिक गलियारों को हिला रखा है। मीडिया में आए समाचारों के अनुसार, सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर पर आरोप लग रहे हैं कि वे पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान, उनकी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी और करीबियों के खिलाफ राजनीतिक बदले की भावना से काम कर रहे हैं। विशेष रूप से चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएफ) बनने के बाद मुनीर कुछ ज्यादा ही सक्रिय दिख रहे हैं। मुनीर की यह सक्रियता आगे सैन्य-राजनीतिक टकराव की ओर भी संकेत कर रही है।
फैज हमीद पर आरोप
पूर्व आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद को नवंबर 2024 में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें राजनीतिक हस्तक्षेप, भ्रष्टाचार और सैन्य नियमों का उल्लंघन करने के आरोप लगे थे। आधिकारिक बयान के अनुसार, फैज गुप्त रूप से पीटीआई के साथ संपर्क बनाए हुए थे। वे कथित तौर पर इमरान के राजनीतिक एजेंडे को बढ़ावा देने में सक्रिय रहे, जिसमें मई 2023 के दंगों में उनकी भूमिका भी शामिल है।
फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल ने फैज को 14 साल की सख्त सजा सुनाई, जिसमें कैद, पद से हटाने और पेंशन छीनने जैसे प्रावधान हैं। पाकिस्तानी सेना ने इसे ‘आंतरिक अनुशासन’ का मामला बताया है, लेकिन विपक्ष इसे मुनीर की साजिश करार दे रहा है। इमरान के करीबी फैज ने 2022 में वन्यजीव बिल विवाद में मुनीर को हटाने में इमरान की मदद की थी। हालांकि अब जो फैज के बयान सामने आए हैं, उनमें इमरान पर राज्य को अस्थिर करने के प्रयासों का कथित जिक्र आया है।

इमरान खान पर ‘गंभीर’ आरोप
इमरान खान को अब राज्य के खिलाफ षड्यंत्र रचने का दोषी ठहराने की तैयारी होती दिख रही है। फैज के बयानों के आधार पर उन पर 2022 के बाद सैन्य नेतृत्व को कमजोर करने, राजनीतिक उथल-पुथल भड़काने और विदेशी शक्तियों से साठगांठ करने के आरोप लगाने के संकेत हैं। विशेष रूप से, 9 मई, 2023 को सेना मुख्यालय पर हमले के बाद हुए दंगों को इमरान से जोड़ा जा रहा है। पीटीआई समर्थकों ने तब सैन्य संस्थानों पर हमले किए थे, जिसे इमरान की ‘लंबी मार्च’ रणनीति का हिस्सा माना गया था।
फैज के सबूतों में कथित ऑडियो, दस्तावेज और गवाहियां शामिल हैं, जो इमरान को ‘राज्य विरोधी गतिविधियों’ से जोड़ती हैं। इमरान की गिरफ्तारी के बाद से पीटीआई पर दबाव बढ़ा है। उनके कई सहयोगी जेल में हैं। सैन्य अदालत में मुकदमा चलाने का मतलब है कि अब संभवत: इमरान को सिविल कोर्ट से अलग, सख्त सैन्य कानूनों का सामना करना पड़ेगा। इससे उनकी राजनीतिक वापसी और मुश्किल हो सकती है। इमरान ने इन आरोपों को ‘सैन्य तानाशाही’ करार दिया है।
मुनीर का इमरान-विरोधी रुख
कट्टरपंथी जनरल असीम मुनीर का इमरान से पुराना वैर रहा है। 2022 में इमरान ने मुनीर को आर्मी चीफ बनाने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद फैज हमीद की सिफारिश पर उन्हें आईएसआई प्रमुख बनाया गया। लेकिन जल्द ही मुनीर को पद से हटा दिया गया था, जिसे इमरान की सबसे बड़ी गलती माना जाता है। नवंबर 2022 में इमरान सरकार गिरने के बाद मुनीर आर्मी चीफ बने और पिछले दिनों उन्होंने सीडीएफ का पद संभाला है। बस तबसे उन्होंने इमरान के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है जो बेशक, उनकी पुरानी कसक से उपजी है।

मुनीर को ‘इमरान विरोधी’ माना जाता है। उन्होंने ही पीटीआई की रैलियों पर सैन्य बल इस्तेमाल किया था, इमरान के सहयोगियों को गिरफ्तार कराया था और मीडिया पर सेंसरशिप थोपी थी। फैज की सजा को मुनीर के ‘सफाई अभियान’ का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके निशाने पर इमरान के पुराने सैन्य समर्थक भी हैं। विश्लेषकों का कहना है कि मुनीर सैन्य वर्चस्व मजबूत करना चाहते हैं, खासकर 2024 चुनावों के बाद उन्होंने शाहबाज शरीफ सरकार के साथ इसी दृष्टि से तालमेल बिठाया है। इमरान समर्थक मुनीर को ‘राजनीतिक जनरल’ कहते हैं, जो बदले की भावना से प्रेरित हैं।
आगे क्या संभावना
यह विवाद अस्थिर जिन्ना के देश को और गर्त में ले जाता दिख रहा है। पीटीआई ने मुनीर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए हैं, जबकि सैन्य नेतृत्व इसे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का मुद्दा बता रहा है। माना यह भी जा रहा है कि इमरान पर सैन्य मुकदमा चलने से उनकी पार्टी बंट सकती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, अमेरिका और चीन जैसे देश हालात पर नजर रखे हुए हैं, क्योंकि यह क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित करने वाला रूप ले सकता है।

















