वंदे मातरम के साथ विश्वासघात क्यों हुआ? कांग्रेस वंदे मातरम के बंटवारे के लिए झुकी, इसलिए भारत विभाजन के लिए झुकना पड़ा
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वंदे मातरम के साथ विश्वासघात क्यों हुआ? कांग्रेस वंदे मातरम के बंटवारे के लिए झुकी, इसलिए भारत विभाजन के लिए झुकना पड़ा

वंदे मातरम के टुकड़े करने का फैसला उस समय की कांग्रेस की मुस्लिम लीग के सामने नर्म नीति का प्रतीक था। यही तुष्टिकरण धीरे-धीरे राजनीतिक कमजोरियों और समझौतों का कारण बना, जो अंततः भारत के विभाजन की परिस्थितियों में भी नजर आया।

Written byMahak SinghMahak Singh
Dec 8, 2025, 01:36 pm IST
in भारत
प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 1937 में मुस्लिम लीग की विरोध की राजनीति तेज हो गई थी। इसी बीच मोहम्मद अली जिन्ना ने 15 अक्टूबर को लखनऊ से वंदे मातरम के विरोध में नारा बुलंद किया। उस समय कांग्रेस के अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू इस पर चिंतित नजर आए। मुस्लिम लीग के बयानों का कड़ा जवाब देने या निंदा करने की बजाय, नेहरू ने वंदे मातरम की पड़ताल शुरू कर दी।

जिन्ना के विरोध के सिर्फ पांच दिन बाद, 20 अक्टूबर को नेहरू ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने जिन्ना की भावना से सहमति जताई और कहा कि वंदे मातरम का गीत “आनंदमठ” जैसी पृष्ठभूमि मुस्लिमों को परेशान कर सकती है। नेहरू ने खुद यह मान लिया कि गीत का बैकग्राउंड मुस्लिमों को भड़का सकता है। इसके बाद कांग्रेस की ओर से घोषणा हुई कि कोलकाता में बैठक होगी और वंदे मातरम पर समीक्षा की जाएगी। पूरे देश में हैरानी फैल गई। देशभक्तों ने विरोध किया और प्रभात फेरियां निकालीं। लेकिन दुर्भाग्य से 26 अक्टूबर को कांग्रेस ने वंदे मातरम के कुछ हिस्सों को हटाकर समझौता कर लिया। इसे सद्भाव का काम बताया गया, लेकिन वास्तविकता यह थी कि कांग्रेस मुस्लिम लीग के दबाव में झुक गई।

यह भी पढ़ें- वंदे मातरम् बोलने पर मिलती थी, कोड़े खाने और जेल जाने की सजा, कैसे अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था इस गीत ने?

इतिहास बताता है कि यह तुष्टिकरण की राजनीति का नतीजा था। वंदे मातरम के टुकड़े करने का फैसला उस समय की कांग्रेस की मुस्लिम लीग के सामने नर्म नीति का प्रतीक था। यही तुष्टिकरण धीरे-धीरे राजनीतिक कमजोरियों और समझौतों का कारण बना, जो अंततः भारत के विभाजन की परिस्थितियों में भी नजर आया। आज भी कुछ लोग वंदे मातरम को लेकर विवाद पैदा करने की कोशिश करते हैं। किसी भी राष्ट्र का चरित्र उसके अच्छे समय से ज्यादा, चुनौतियों और कठिनाइयों के समय में परखा जाता है।

यह भी पढ़ें- Parliament Winter Session: पीएम मोदी ने बताया वंदे मातरम् की ताकत, कैसे यह गीत बना आजादी का प्रतीक?

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Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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