India-Russia में गहराती दोस्ती भूराजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत, Joint Statement देख हैरान है America
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India-Russia में गहराती दोस्ती भूराजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत, Joint Statement देख हैरान है America

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 2030 तक आर्थिक साझेदारी को बढ़ाने, आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त अभियान, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग विस्तार समेत कई अहम समझौतों पर सहमति बनी है। पुतिन की भारत यात्रा यह अमेरिका की वैश्विक दादागिरी दिखाने की इच्छा के विरुद्ध एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था बनाने की ओर एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Dec 6, 2025, 12:42 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
प्रोटोकॉल से इतर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हवाईअड्डे पर खुद स्वागत किया 'मित्र' राष्ट्रपति पुतिन का

प्रोटोकॉल से इतर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हवाईअड्डे पर खुद स्वागत किया 'मित्र' राष्ट्रपति पुतिन का

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के 4 दिसम्बर की शाम भारत में उतरते ही एक अलग ही गर्मजोशी का माहौल छा गया नई दिल्ली के सत्ता गलियारों में। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पुतिन को रूसी भाषा में गीता की प्रति भेंट करने से आरम्भ हुई पुतिन की यह यात्रा कई अर्थों में विश्व को यह दिखा गई कि सद्भाव, सौहार्द और मैत्रीपूर्ण संबंध आज की स्वार्थ प्रथम वाली दुनिया में भी विशेष मायने रखते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 5 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत के बाद शिखर बैठक हुई। इस वार्ता ने भारत-रूस संबंधों को और मजबूत एवं प्रगाढ़ कर दिया। दोनों नेताओं ने 2030 तक आर्थिक साझेदारी को बढ़ाने, आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त अभियान, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग विस्तार समेत कई अहम समझौतों पर सहमति जताई। इतना ही नहीं, यूक्रेन संघर्ष पर भारत ने शांति और संवाद के जरिए समाधान की नीति दोहराई, जबकि रूस ने शांति प्रयासों का हवाला दिया। नि:संदेह अमेरिका पुतिन-मोदी की निकटता से असहज है क्योंकि पुतिन की भारत यात्रा यह अमेरिका की वैश्विक दादागिरी दिखाने की इच्छा के विरुद्ध एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था बनाने की ओर एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है।

एक ही गाड़ी में साथ बैठकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आवास तक गए राष्ट्रपति पुतिन

संयुक्त बयान के मुख्य बिंदु और समझौते
रूस और भारत के शीर्ष नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों के बीच विशद् वार्ता के बाद जारी संयुक्त घोषणापत्र जारी हुआ। इसके अनुसार,
1.दोनों देशों ने “विजन 2030” नामक रोडमैप पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका लक्ष्य व्यापार, सह-उत्पादन, और सह-नवाचार को नई दिशा देना है।
2. रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ के तहत सह-उत्पादन एवं टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को बढ़ावा देना तय किया गया है।
3.आर्थिक साझेदारी के तहत 100 अरब डॉलर तक का व्यापार लक्ष्य रखा गया और राष्ट्रीय मुद्रा प्रणालियों (जैसे भारत का UPI और रूस का MIR) को जोड़ने पर काम शुरू करने की बात की गई है ताकि पश्चिमी प्रतिबंधों को टाला जा सके।
4. आतंकवाद के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की पुष्टि हुई है।
5. द्विपक्षीय समझौतों में श्रमिक गतिशीलता को सरल बनाने पर भी सहमति बनी है।
6. संयुक्त राष्ट्र, G-20, ब्रिक्स, और शंघाई सहयोग संगठन जैसे मंचों पर सहयोग जारी रखने का संकल्प लिया गया।

राष्ट्रपति पुतिन को रूसी भाषा में गीता पुस्तक भेंट करते प्रधानमंत्री मोदी

चर्चा में आया यूक्रेन संघर्ष
दोनों नेताओं की चर्चा में यूक्रेन युद्ध का विषय आना स्वाभाविक ही था और पांचजन्य ने पहले ही बताया था कि इस बिन्दु पर चर्चा अवश्य होगी। इस विषय में प्रधानमंत्री मोदी ने शांति स्थापना और संवाद के माध्यम से समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि पुतिन ने रूस के शांति प्रयासों की जानकारी साझा की। भारत यूक्रेन संकट में संतुलित नीति पर कायम है और संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की कामना करता है। मोदी ने इस मुद्दे पर भारत के सहयोग के लिए तैयार होने की बात भी दोहराई।

अमेरिका की बेचैनी का कारण
इसमें संदेह नहीं है कि पुतिन-मोदी की निकटता और मजबूत भारत-रूस रिश्ते से अमेरिका बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के संकेत देख रहा है, जो उसकी एकाधिकार वाले वैश्विक प्रभुता के सपने को चुनौती देता है। ऐसा कई अमेरिकी विशेषज्ञों ने खुद स्वीकारा है कि, खासकर आर्थिक और रक्षा क्षेत्र में भारत-रूस साझेदारी से अमेरिका को अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं में अवरोध आने का खतरा है। इसके अतिरिक्त, रूस का भारत को निरंतर ऊर्जा की आपूर्ति करने का आश्वासन और पश्चिमी प्रतिबंधों की परवाह न करना अमेरिका के लिए चिंता का कारण बनना ही था।

नई दिल्ली में भारत-रूस बिजनेस फोरम बैठक में पुतिन और मोदी

इस वार्ता और संयुक्त बयान के सभी पहलुओं को देखते हुए स्पष्ट है कि भारत और रूस ने रणनीतिक गहराई और व्यापक सहयोग के साथ बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में अपनी भूमिका को मजबूत किया है, जो वैश्विक शक्ति हस्तांतरण का महत्वपूर्ण संकेत है। जैसा पहले बताया, भारत-रूस संयुक्त बयान ने दोनों देशों के बीच विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया है, जिसमें आर्थिक सहयोग, रक्षा, ऊर्जा और आतंकवाद विरोधी प्रयास प्रमुख थे। असल में यह उस 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद जारी हुआ है जिसकी अगली कड़ी रूस में होनी तय है और उसके लिए पुतिन ने लगे हाथ प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित किया है।

आतंकवाद का प्रबल विरोध
मोदी ने अपने वक्तव्य में पहलगाम (22 अप्रैल 2025) और क्रोकस सिटी हॉल (22 मार्च 2024) पर हुए आतंकी हमलों की निंदा की। उन्होंने कहा कि भारत ने सभी अंतरराष्ट्रीय मंत्रों पर खुलकर कहा हे कि आतंकवाद को दुनिया से समाप्त करने के लिए सबका साथ मिलकर इसके विरुद्ध कार्रवाई करनी ही होगी। भारत और रूस ने अल-कायदा, आईएसआईएस जैसे संगठनों के खिलाफ कार्रवाई, ड्रोन/ऑनलाइन फंडिंग के दुरुपयोग पर रोक लगाने की बात संयुक्त बयान में रूपष्ट रूप से दर्ज की है।

रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, भारत रूस का यह संयुक्त बयान पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत-रूस साझेदारी को बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की दिशा में मजबूत करता है, खासकर ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में। भारत की संतुलित यूक्रेन नीति को रूस ने सराहा है, जो वैश्विक शांति प्रयासों में योगदान देगी। उन्होंने कहा कि आतंकवाद निरोधी सहयोग के लिए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जानकारी साझा करने, कानूनी और सुरक्षा निगरानी को विकसित करने, और बहुपक्षीय प्रयासों को बढ़ावा देने का समर्थन किया गया है। भारत और रूस दोनों ने आतंकवाद से निपटने में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई हुई है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के आतंकवाद विरोधी प्रतिबंधों के प्रभाव को सुनिश्चित करने पर काम करने को लेकर सहमति जताई है।

दोनों देशों के नेताओं ने भारत और रूस के बीच विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए अपने समर्थन की पुष्टि की। यह वर्ष भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की 25वीं वर्षगांठ का है, जिसे अक्तूबर 2000 में राष्ट्रपति श्री व्लादिमीर पुतिन की भारत की पहली राजकीय यात्रा के दौरान स्थापित किया गया था। दोनों नेताओं ने इस दीर्घकालिक और समय की कसौटी पर सिद्ध संबंध की विशेष प्रकृति पर जोर दिया, जो आपसी विश्वास, एक-दूसरे के मूल राष्ट्रीय हितों के प्रति सम्मान और रणनीतिक संयोजन की विशेषता है। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि साझा जिम्मेदारियों वाली प्रमुख शक्तियों के रूप में, यह महत्वपूर्ण संबंध वैश्विक शांति और स्थिरता का आधार बना हुआ है जिसे समान और अविभाज्य सुरक्षा के आधार पर सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

अपनी वार्ता में दोनों नेताओं ने जोर देकर कहा कि मौजूदा जटिल, चुनौतीपूर्ण और अनिश्चित भू-राजनीतिक स्थिति की पृष्ठभूमि में भारत-रूस संबंध सशक्त बने हुए हैं। दोनों पक्षों ने एक समकालीन, संतुलित, पारस्परिक रूप से लाभप्रद, टिकाऊ और दीर्घकालिक साझेदारी बनाने का प्रयास किया है। भारत-रूस संबंधों के विकास के संपूर्ण परिदृश्य में एक साझा विदेश नीति दोनों देशों की प्राथमिकता है। दोनों नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी की पूरी क्षमता का लाभ उठाने के लिए सभी प्रयास करने पर सहमति व्यक्त की।

इसके साथ ही, येकातेरिनबर्ग और कजान में भारत के दो महावाणिज्य दूतावासों के उद्घाटन का स्वागत किया गया और अंतर-क्षेत्रीय सहयोग, व्यापार और आर्थिक संबंधों तथा जन-जन के बीच संबंधों को और मजबूत करने के लिए उनके शीघ्र कार्यान्वयन की आशा व्यक्त की। कजान में 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और तियानजिन में 25वें एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं के बीच हुई बैठकें; भारत के विदेश मंत्री और रूस के पहले उप प्रधानमंत्री की सह-अध्यक्षता में व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग (आईआरआईजीसी-टीईसी) पर भारत-रूस इंटर गवर्नमेंटल कमिशन (आईआरआईजीसी) के 26वें सत्र का आयोजन किया गया था।

दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की सह-अध्यक्षता में भी सैन्य तथा सैन्य-तकनीकी सहयोग (आईआरआईजीसी-एमएंडएमटीसी) पर आईआरआईजीसी के 22वें सत्र का आयोजन हुआ था।

चर्चा के दोनों पक्षों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि टैरिफ और गैर-टैरिफ व्यापार बाधाओं का समाधान, लॉजिस्टिक में आने वाली बाधाओं को दूर करना, संपर्क को बढ़ावा देना, सुचारू भुगतान व्यवस्था सुनिश्चित करना, बीमा और पुनर्बीमा के मुद्दों के लिए पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान खोजना है। पुतिन जानते हैं कि रूस से तेल लेने के कारण भारत पर अमेरिका ने 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है इसलिए वे अपने मत से अडिग हैं कि अमेरिकी या यूरोपीय धमकियों ने नहीं डरना है।

Topics: indo russia friendshipputin in delhiIndiastrategic dialoquepartnershiptModiterrorismDefencePutin visit
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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