नई दिल्ली । बीजेपी के राज्यसभा सांसद भीम सिंह ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि संविधान में ‘अल्पसंख्यक’ शब्द का उल्लेख तो है, लेकिन इसकी स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के अनुसार केंद्र सरकार यह निर्धारित करती है कि कौन-सा समुदाय अल्पसंख्यक श्रेणी में आएगा। वर्तमान में मुस्लिम, सिख, पारसी, जैन, ईसाई और बौद्ध समुदाय को अल्पसंख्यक माना गया है।
कई राज्यों में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक समुदाय बहुसंख्यक स्थिति में
सांसद ने बताया कि देश के कई राज्यों में राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक माने जाने वाले समुदाय स्थानीय स्तर पर बहुसंख्यक बन चुके हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार मुस्लिम आबादी 14.2% है, लेकिन लक्षद्वीप में 96%, जम्मू-कश्मीर में 69%, असम में 34%, पश्चिम बंगाल में 27% और केरल में 26% मुस्लिम आबादी है, जो कुछ क्षेत्रों में उन्हें बहुसंख्यक बनाती है।
अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं के असमान लाभ पर सवाल
भीम सिंह ने कहा कि कई बार ऐसे समुदाय अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं का लाभ ले लेते हैं जिन्हें वास्तविक रूप से किसी प्रकार की हानि नहीं होती। इसके विपरीत, कमजोर और वंचित वर्ग इन योजनाओं से दूर रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य-स्तरीय सामाजिक संरचना को ध्यान में रखकर नीतियां बनाई जानी चाहिए।
जिला-स्तरीय विश्लेषण की जरूरत
सांसद ने सुझाव दिया कि अल्पसंख्यक निर्धारण जिला-स्तरीय आंकड़ों पर आधारित होना चाहिए। उदाहरण के तौर पर, बिहार में मुस्लिम आबादी 17% है, लेकिन किशनगंज, कटिहार, अररिया और पूर्णिया जिलों में यह संख्या 39% से 68% के बीच है। ऐसे में समान नीति पूरे राज्य पर लागू करना न्यायसंगत नहीं होगा।
केंद्र से नीति समीक्षा की मांग
भीम सिंह ने कहा कि वे केंद्र सरकार से आग्रह करेंगे कि एक व्यापक समीक्षा की जाए और ऐसी नीति तैयार की जाए, जिसमें वास्तव में वंचित समुदायों को प्राथमिकता मिले। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में अल्पसंख्यक का निर्धारण स्थानीय जनसंख्या संरचना के आधार पर होना चाहिए।
राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक की नई परिभाषा का प्रस्ताव
सांसद ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्तर पर केवल उन समुदायों को अल्पसंख्यक माना जाए जिनकी आबादी 2% से कम है। इसमें सिख, बौद्ध, जैन और पारसी समुदाय आते हैं। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि अल्पसंख्यक योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से ज़रूरतमंद वर्गों तक पहुंचे।

















