नई दिल्ली । तिरुप्परनकुंड्रम पहाड़ी की चोटी पर दीप स्तंभ तक जाकर कार्तिगई दीपम जलाने की अनुमति देने के मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को लेकर एमडीएमके संस्थापक और महासचिव वाइको बिफर गए हैं। उन्होंने इस फैसले के बाद आरोप लगाया कि न्यायपालिका के भीतर धार्मिक कट्टरता बढ़ रही है और यह एक “चिंताजनक” प्रवृत्ति है।
मदुरई खंडपीठ के फैसले पर वाइको की तीखी प्रतिक्रिया
एग्मोर स्थित अपने एमडीएमके मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि मद्रास हाई कोर्ट के जज ने मनमाने ढंग से निर्णय सुनाया। उन्होंने यह भी कहा कि जज को खुलकर हिंदुत्व शक्तियों के साथ खड़ा हो जाना चाहिए।
वाइको ने कहा- “मदुरई के जज ने अपने मन का ज़हर फैलाते हुए पूर्ण मनमानी के साथ निर्णय दिया है। अगर वह हिंदुत्व शक्तियों में शामिल होकर ज़हर उगलना चाहते हैं, तो उन्हें अपने न्यायिक पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। जज की कुर्सी पर बैठकर ऐसे काम नहीं करने चाहिए। मुझे चिंता है कि न्यायपालिका के भीतर धार्मिक कट्टरता बढ़ रही है।”
वहीं इस फैसले को मदुरै प्रशासन ने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। दरअसल, डिवीजन पीठ ने मदुरै प्रशासन की सिंगल पीठ के आदेश के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी थी। डिवीजन पीठ की ओर से याचिका खारिज होने के बाद सिंगल पीठ ने 4 दिसंबर की शाम को दीया जलाने का निर्देश दिया। जिसके बाद मदुरै प्रशासन ने दीया जलाने की इजाजत नहीं दी और उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

















