छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में पाञ्चजन्य ने दंतेश्वरी डायलॉग कार्यक्रम का आयोजन किया। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संघचालक टोपलाल जी रहे। उन्होंने वर्तमान समय में गुरु तेग बहादुर जी के विचारों की प्रासंगिकता पर अपने महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए।
टोपलाल जी ने कहा कि यह वर्ष हम सभी के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि राष्ट्र गुरु, धर्म एवं मानवता की रक्षा के प्रतीक श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत के 350 वर्ष पूरे हो रहे हैं। गुरु तेग बहादुर जी ने अपने जीवन भर सत्य, न्याय, नैतिकता और धर्म के मार्ग पर चलते हुए समाज के प्रत्येक व्यक्ति के अधिकारों तथा सम्मान की रक्षा की। वे न केवल सिख समाज के लिए, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने अन्याय, अत्याचार और मजहबी कट्टरता के विरुद्ध आवाज उठाई तथा यह संदेश दिया कि मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है।
इसी प्रेरणा को केंद्र में रखते हुए देशभर में जन-जागरण, श्रद्धासुमन अर्पण एवं संवाद के अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे उनके त्याग, तप और बलिदान के संदेश को जन-जन तक पहुँचाया जा सके। इसी श्रृंखला के अंतर्गत 3 दिसम्बर को सर्व समाज विचार गोष्ठी का आयोजन खालसा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर में किया जाएगा। इस विचार गोष्ठी का मुख्य विषय होगा-“श्री गुरु तेग बहादुर जी : हिंद की चादर”। गुरु तेग बहादुर जी के जीवन मूल्यों को समझकर हम समाज में समरसता, एकता और सद्भाव को और अधिक सुदृढ़ कर सकते हैं। उनका बलिदान हमें यह प्रेरणा देता है कि राष्ट्रहित और मानव कल्याण के लिए आवश्यक होने पर अपने व्यक्तिगत हितों का त्याग करना ही सच्ची देशभक्ति है।

















