श्रीलंका इन दिनों चक्रवात दितवाह से बुरी तरह प्रभावित है। वहां अनेक स्थानों से दिख रहे भयंकर बाढ़ के दृश्य दिल दहलाने वाले हैं। ऐसे में पड़ोसी के नाते भारत ने श्रीलंका की आगे रहकर मदद की है। यहां से अनेक विमानों द्वारा राहत दल भेजे गए हैं। भारत ने दवाएं और राशन भी भेजा है। एनडीआरएफ की टीमें रिहायशी इलाकों से लोगों को निकालने में जुटी हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं श्रीलंका के राष्ट्रपति से फोन पर बात करके सांत्वना के साथ ही आगे भी मदद करते रहने का वायदा किया है।
लेकिन इसके ठीक उलट, शायद भारत की देखादेखी कंगाल पाकिस्तान ने भी राहत का हाथ बढ़ा दिया और अपने यहां से सूखा राशन, दवा, टैंट तंबू वगैरह भेजे। लेकिन पाकिस्तान से आई यह सामग्री जब प्रभावित लोगों के हाथों में पहुंची तो वे देखकर ठगे से रह गए कि अधिकांश चीजों की मियाद खत्म हो चुकी थी, वे ‘एक्सपायर्ड’ थीं। पाकिस्तान से आई राहत सामग्री में भोजन पैकेट, दवाएं, प्राथमिक चिकित्सा किट, सूखा राशन, तंबू और अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल थीं। कोलंबो में पाकिस्तानी एम्बेसी ने राहत सामग्री पहुंचाने की तस्वीरें साझा करके इसे दो देशों के बीच एकता का प्रतीक बताया। उसकी मंशा साफतौर पर खुद को दुनिया के सामने ‘बड़े दिल वाला देश’ दिखाने की थी। लेकिन पाकिस्तानी ऐसे कामों में भी इतने लापरवाह हो सकते हैं, यह कोई भी सहज ही समझ सकता है।
पाकिस्तानी एम्बेसी ने लिखा—’हाल ही में आई बाढ़ से प्रभावित हमारे भाइयों और बहनों की मदद के लिए पाकिस्तान से राहत पैकेज श्रीलंका में सफलतापूर्वक पहुंचा दिए गए हैं, यह हमारी पक्की एकता को दिखाता है। पाकिस्तान आज और हमेशा श्रीलंका के साथ खड़ा है। #FloodRelief pic.twitter.com/rMhMwUhEA8

लेकिन दूसरी तरफ श्रीलंका के अधिकारियों और सामाजिक मीडिया को यह देखकर हैरानी हुई कि भेजी गई राहत सामग्री एक्सपायर हो चुकी थी। खाने के कई पैकेटों और दवाओं पर 2024 की एक्सपायरी तारीख दिखी। बेशक, यह देखकर स्थानीय अधिकारी और लोग गुस्से में आ गए। मामला बढ़ा तो बात श्रीलंका की सरकार तक पहुंची। उसने फौरन पाकिस्तानी सरकार से ऐसी आपराधिक लापरवाही को लेकर आपत्ति जताई।
राहत सामग्री के बहाने पाकिस्तान की लापरवाही और भ्रष्टाचार की पोल खुल गई है। कहना न होगा, इस मामले ने पाकिस्तान की पहले से गर्त में पड़ी अंतरराष्ट्रीय छवि पर और कालिख पोत दी है। कारण यह कि इस घटना को श्रीलंका में आर्थिक संकट के बीच विशेष रूप से गंभीर समझा गया। जरूरतमंदों की मदद के लिए भेजा गया सामान उपयोगी होना चाहिए था, परंतु एक्सपायर्ड होने की वजह से इसे दिखावटी राहत माना गया। इस पर सोशल मीडिया पर भी पाकिस्तान से भेजी गई राहत सामग्री की आलोचना की जा रही है। सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के इस कदम को ‘इंसल्ट’ बताया जा रहा है।

इससे पहले भी पाकिस्तान की अन्य देशों को भेजी राहत कूटनीतिक विवादों में रही है, जैसे नेपाल भूकंप के समय बीफ युक्त ‘रेडी-टू-ईट’ पैकेट भेजने को लेकर काफी विवाद हुआ था। राहत सामग्री भेजने को लेकर भी पाकिस्तान ने भारत पर फर्जी आरोप जड़ने में देर नहीं लगाई। उसने बेवजह यह बात उड़ाई कि भारत ने हवाई मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी। भारत ने फौरन इन आरोपों को बेबुनियाद बताकर पाकिस्तान का झूठ उघाड़ दिया।
पाकिस्तान इसे प्रोपेगैंडा या नेगेटिव पब्लिसिटी भी नहीं कह सकता, क्योंकि एम्बेसी ने जो फोटो खुद पोस्ट की है, उसमें तारीख साफ दिख रही है। पोस्ट में आगे कहा गया, “पाकिस्तान आज और हमेशा श्रीलंका के साथ खड़ा है।” लेकिन इस बार, इस्लामाबाद एक्सपायर हो चुके प्रोडक्ट्स के साथ कोलंबो के साथ खड़ा था। कोलंबो स्थिति को संभालने में बिज़ी है, और अभी तक कोई ऑफिशियल बयान जारी नहीं किया गया है। 2022 में पैक किए गए प्रोडक्ट्स की शेल्फ लाइफ 2024 है, जैसा कि प्रिंटेड है। अब, जब हम दिसंबर 2025 में आ गए हैं, तो भेजी गई राहत सामग्री एक साल पहले ही एक्सपायर हो गई थी।

















