संसद का शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो रहा है। 19 दिनों तक चलने वाले इस सत्र में कुल 15 बैठकें होगीं। सरकार इस सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण बिल लाने की तैयारी में है। वहीं दूसरी ओर विपक्ष एसआईआर के मुद्दे पर हंगामा करने की फिराक में है। इसका इशारा समाजवादी पार्टी कर चुकी है। विपक्ष स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर बहस करने की जिद पकड़ के बैठा है।
13 बिल होंगे पेश
इस सत्र में से पहले रविवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई ऑल-पार्टी मीटिंग में सरकार ने अपना टेंटेटिव एजेंडा शेयर किया। इसमें 14 आइटम हैं, जिनमें 13 बिल्स शामिल हैं। 36 पार्टियों के 50 रेप्रेजेंटेटिव्स ने हिस्सा लिया। लेकिन एजेंडे पर ही पेंच फंस गई। लोकसभा और राज्यसभा के बिजनेस एडवाइजरी मीटिंग्स में डेडलॉक हो गया। पिछला सेशन तो SIR पर ही विपक्ष के हंगामे से धुला गया था, सिवाय ऑपरेशन सिंदूर पर थोड़ी-बहुत चर्चा के। इस बार सरकार वंदे मातरम के 150वें सालगिरह पर बहस करवाने को इच्छुक है, जो एनडीए ने हाल ही में मनाया था।
विपक्ष की रणनीति
विपक्ष वाले SIR को लेकर फुल मोड में हैं। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (एसपी) और बाकी दल मिलकर ऑल-पार्टी मीटिंग में बहस की मांग ठोंक रहे थे। एसपी के राम गोपाल यादव ने साफ कहा, “अगर SIR पर चर्चा न हुई, तो हम संसद चलने नहीं देंगे।” उनका आरोप है कि रोल्स की रिवीजन में भारी गड़बड़ियां हुईं। कुछ बूथ लेवल ऑफिसर्स तो स्ट्रेस से सुसाइड तक कर चुके हैं। यादव ने आरोप लगाया कि सपा के विधायकों को ‘सी कैटेगरी’ में डालकर वोटर लिस्ट से नाम काटने की कोशिश हुई। कांग्रेस ने अपनी स्ट्रैटेजी मीटिंग में इसे नॉन-नेगोशिएबल बना दिया। सीपीएम के जॉन ब्रिटास ने सुझाव दिया कि SIR पर सीधे न सही, तो इलेक्टोरल रिफॉर्म्स पर शॉर्ट डिस्कशन हो जाए। इसके अलावा, दिल्ली ब्लास्ट के बाद नेशनल सिक्योरिटी और बढ़ते एयर पॉल्यूशन पर भी बहस की मांग है। पिछली बार के हंगामे ने दोनों सदनों को धो डाला था, और इस बार भी वैसा ही लग रहा है। एसपी के 37 लोकसभा मेंबर्स के साथ वो दूसरा सबसे बड़ा विपक्षी दल है।
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सरकार की तैयारी
सरकार की तरफ से संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने SIR पर कुछ बोलने से किनारा कर लिया। उन्होंने कहा कि वो कंसल्ट करके जवाब देंगे। लेकिन एक पुरानी 1988 की रूलिंग का सहारा लिया, जब तत्कालीन लोकसभा स्पीकर बलराम जाखड़ ने कांग्रेस सरकार के समय कहा था कि इलेक्शन कमीशन के फैसलों पर हाउस में बहस नहीं हो सकती। बीजेपी की सहयोगी जेडीयू के वर्किंग प्रेसिडेंट संजय झा ने विपक्ष के केस को कमजोर बताया। बोले, बिहार में SIR पहले हुआ, लेकिन वहां कोई आधिकारिक शिकायत नहीं आई, और लोगों को ये बात ज्यादा असर नहीं कर रही। सरकार विपक्ष से सपोर्ट मांग रही है, ताकि एजेंडा स्मूथ चले। SIR अभी 12 स्टेट्स और यूनियन टेरिटरीज में चल रही है, तो इसका असर पूरे देश पर पड़ सकता है।

















