हॉन्गकॉन्ग के ताई पो से बड़ी दर्दनाक घटना सामने आ रही है, जहां वांग फुक कोर्ट नाम के पब्लिक हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में भीषण आग लग गई। जिसमें अब तक 44 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा ये अभी तक 279 लोग गायब बताए जा रहे हैं। ये पूरी कॉम्प्लेक्स 8 बहुमंजिला इमारतों का समूह है, जिसमें करीब 4,000 लोग रहते हैं, जिनमें से 36 फीसदी बुजुर्ग हैं। हर टावर में कम से कम 31 मंजिलें हैं और लगभग 2,000 फ्लैट्स हैं। आग ने आठों बिल्डिंग्स को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे काली धुंएं और लपटें आसमान छूने लगीं।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, ये हॉन्गकॉन्ग की आजादी के बाद की सबसे घातक आग है, जो 1996 की गार्ले बिल्डिंग फायर से भी ज्यादा जानलेवा साबित हुई, जिसमें 41 लोग मारे गए थे। फायर डिपार्टमेंट ने इसे लेवल 5 की आग घोषित किया, जो सबसे ऊंचा अलर्ट है।
कब हुई ये घटना
बताया जाता है कि आग 26 नवंबर को दोपहर में शुरू हुई और रात तक फैलती चली गई। शुरुआत में 13 मौतें और 30 घायल बताए गए। रात में एक छोटी आग ताई पो नदी के पार एक जंगल में लगी, जो स्कूल के पीछे थी, लेकिन जल्दी बुझा दी गई—इसमें कोई हताहत नहीं हुआ, पर इसका कनेक्शन मेन फायर से साफ नहीं। रात भर फायरफाइटर्स ने जद्दोजहद की, क्योंकि ऊपरी मंजिलों पर पहुंचना मुश्किल था। पुलिस ने तीन लोगों—एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के दो डायरेक्टर्स और एक कंसल्टेंट—को हत्या के शक में गिरफ्तार किया है।
हताहतों की स्थिति
गुरुवार सुबह तक कम से कम 44 लोग मारे जा चुके थे—40 तो घटनास्थल पर ही दम तोड़ चुके थे और चार अस्पताल में। 66 लोग हॉस्पिटल में हैं, जिनमें 17 की हालत क्रिटिकल और 24 सीरियस है। 279 लोग अभी भी संपर्क से बाहर हैं। एक फायरफाइटर, हो वाई-हो (37 साल के), रेस्क्यू के दौरान मारे हैं।
कारण और जांच
आग का सटीक कारण अभी साफ नहीं, लेकिन फायर सर्विसेज डायरेक्टर एंडी यंग ने खिड़कियों पर लगे पॉलीस्टाइरीन बोर्ड्स को जिम्मेदार ठहराया, जो बेहद जल्दी जल जाते हैं। ये बोर्ड्स एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के थे, और प्रोटेक्टिव नेट्स, कैनवास व प्लास्टिक कवर्स सेफ्टी स्टैंडर्ड्स पर खरे नहीं उतरे। कॉम्प्लेक्स रेनोवेशन के दौर से गुजर रहा था, और बांस स्कैफोल्डिंग—जो हॉन्गकॉन्ग में आम लेकिन रिस्की है। कहा जा रहा है कि इसी के कारण आग और भीषण हो गई।












