आज पूरे देश में राष्ट्रीय संविधान दिवस बड़े सम्मान, गर्व और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। हर साल यह दिन हमें याद दिलाता है कि देश का संविधान सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि भारत की असली पहचान और लोकतंत्र की नींव है। इसी खास मौके पर दिल्ली के पुराने संसद भवन, जिसे अब संविधान सदन कहा जाता है, में एक बड़ा राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम केंद्रीय कक्ष में हुआ, जहाँ देश के कई बड़े नेता मौजूद रहे।
इस आयोजन की अध्यक्षता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने की। उनके साथ उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष, कई केंद्रीय मंत्री और संसद के सदस्य भी उपस्थित रहे। इन सभी नेताओं की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को और भी महत्वपूर्ण बना दिया। इससे यह संदेश गया कि संविधान दिवस केवल एक रस्म नहीं, बल्कि हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों का उत्सव है, जिसे पूरे मन से मनाया जाता है। इस साल संविधान दिवस का सबसे खास हिस्सा था- संविधान के नौ भाषाओं में अनूदित संस्करणों का लोकार्पण। राष्ट्रपति मुर्मु ने मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओडिया और असमिया भाषाओं में संविधान के अधिकृत अनुवाद जारी किए। यह पहल देश की बहुभाषीय और बहुसांस्कृतिक पहचान को सम्मान देती है। अब अलग-अलग भाषाओं में बोलने वाले लोग अपने संविधान को अपनी मातृभाषा में पढ़ सकेंगे। इससे लोकतांत्रिक समझ और मजबूत होगी।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि संविधान केवल कानूनों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मा है। यह हमें हमारे अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों की भी याद दिलाता है। उन्होंने संविधान बनाने वालों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनकी मेहनत, समझदारी और त्याग के कारण ही आज भारत दुनिया के सबसे मजबूत लोकतांत्रिक देशों में से एक है। संविधान दिवस हमें यह भी सिखाता है कि हम सभी नागरिक मिलकर अपने देश को और बेहतर बना सकते हैं, जब हम संविधान के मूल्यों को समझकर उनका पालन करें।

















