अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव में एक ऐसा अहम मोड़ आया है कि जहां से यह तनाव और संघर्ष बजाय घटन के और बढ़ता दिख रहा है। जिन्ना के देश की वायुसेना ने अपने ताजा हवाई हमले में अफगानिस्तान में अंधाधुंध गोले बरसाकर 10 से ज्यादा निर्दोष नागरिकों की जान ले ली है। इन दस में से 9 बच्चे हैं जिनका लड़ाई से कोई लेना—देना नहीं था। इसके बाद से अफगानिस्तान की तालिबानी हुकूमत और जिन्ना के देश के बीच तनाव चरम पर जाना दिख रहा है। तालिबान सरकार ने इस हमले को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दे डाली है। लगता है, तालिबान जिन्ना के देश पर अचानक से कोई जबरदस्त हमला बोल सकते हैं।

जानकारी मिली है कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खोस्त, पाकटीका और कुनार प्रांतों में आधी रात को हवाई हमले किए, जिनमें नौ बच्चों और एक महिला सहित दस नागरिकों की मौत हुई। इन हमलों पर तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए हमले को अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन बताया है और कहा है कि अफगानिस्तान अपने नागरिकों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। इतना ही नहीं, अफगान सरकार ने पाकिस्तान के राजदूत को मंत्रालय में बुलाकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है और इसे बेवजह उकसावे वाली कार्रवाई बताया है।

उधर, जिन्ना के देश का आरोप है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकवादी अफगान भूमि का उपयोग कर पाकिस्तान पर हमले कर रहे हैं। पाकिस्तान ने हाल ही में पेशावर में हुए फिदायीन हमले में टीटीपी का हाथ बताया है। इसके बाद पाकिस्तान ने वायुसेना की हरकत करते हुए अफगानिस्तान के उक्त क्षेत्रों में बम बरसाए जिसके बाद अफगानिस्तान की सत्ता बौखला गई है। तनाव चरम पर है।
जिन्ना के देश ने टीटीपी को अफगान तालिबान का सहयोगी माना है और कहा है कि उसके कई जिहादी नेता अफगानिस्तान में सुरक्षित रह रहे हैं। इस चीज से दोनों देशों के बीच संदेह और तनाव बना रहता है। लेकिन अफगानिस्तान सरकार इन आरोपों से इनकार करती है कि उनके देश की भूमि से पाकिस्तानी हितों पर हमले होते हैं।
वर्तमान हवाई हमला पिछली कई झड़पों की कड़ी में ही है, जहां कई बार दोनों पक्षों ने सीमा पार गोलीबारी या हवा से हमले किए हैं। गत महा अक्तूबर में भी पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कई इलाकों में हवाई हमले बोले थे। उसके जवाब में तालिबान ने भी सीमा पर कई पाकिस्तानी चुंगियों पर जवाबी हमले किए। ऐसे हमलों के पीछे पाकिस्तानी एजेंसियों का तर्क यही रहता है कि वे अपने देश में सक्रिय आतंकी तत्वों का सफाया करने के लिए सीमा पार कार्रवाई कर रहे हैं, जबकि अफगान तालिबान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मानता है।

अफगानिस्तान और जिन्ना के देश के बीच वर्तमान तनाव न केवल दोनों देशों में संघर्ष को बढ़ा रहा है, बल्कि दक्षिण एशियाई भू-राजनीति में अस्थिरता भी पैदा कर रहा है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान का सीमा विवाद, टीटीपी और अन्य जिहादी गुटों की हरकतें तथा सीमा पार सैन्य कार्रवाई से इस पूरे क्षेत्र की सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगा है। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान को इस बात से भी चिढ़ है कि अफगान हुकूमत भारत से निकटता क्यों बढ़ा रही है।
वर्तमान विवाद की जड़ दोनों देशों की आपसी अविश्वास, सीमा पार आतंकवाद और संप्रभुता पर आधिपत्य को लेकर है। ताजा सैन्य कार्रवाई और तालिबान का सख्त रुख इस तनाव को और गहरा कर रहा है, जिससे आने वाले समय में सीमा क्षेत्र में और अधिक संघर्ष व अस्थिरता की आशंका बढ़ गई है।
















