रिटायरमेंट से पहले CJI गवई का बड़ा बयान, SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर पर कड़ी टिप्पणी
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रिटायरमेंट से पहले CJI गवई का बड़ा बयान, SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर पर कड़ी टिप्पणी

रिटायरमेंट से ठीक पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी. आर. गवई ने आरक्षण व्यवस्था पर एक अहम और स्पष्ट संदेश दिया।

Written byMahak SinghMahak Singh
Nov 24, 2025, 11:49 am IST
inभारत
CJI Gavai

CJI Gavai

रिटायरमेंट से ठीक पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी. आर. गवई ने आरक्षण व्यवस्था पर एक अहम और स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह चिंता का विषय है कि एससी/एसटी समुदाय के सामाजिक और आर्थिक रूप से सम्पन्न लोग जाति को हथियार बनाकर सरकारी नौकरियों में आरक्षण का बड़ा हिस्सा अपने नाम कर रहे हैं। इससे उन लोगों को नुकसान हो रहा है, जो आज भी इन समुदायों में सबसे ज्यादा पिछड़े और वंचित हैं। JI गवई ने कहा कि अब समय आ गया है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारें एससी/एसटी समुदायों को उप-वर्गों में बांटने पर गंभीरता से विचार करें। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि आरक्षण का लाभ उन परिवारों तक पहुंचे, जो वास्तव में सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े हुए हैं और जिन्हें सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व की सबसे ज्यादा जरूरत है।

7 जजों की बेंच का अहम फैसला- सीजेआई गवई की अध्यक्षता वाली 7 जजों की संवैधानिक बेंच ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला दिया। इस फैसले में राज्यों को यह अधिकार दिया गया कि वे एससी समुदाय के भीतर मौजूद जातियों को उनके सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन और सरकारी नौकरियों में उनके कम प्रतिनिधित्व के आधार पर अलग-अलग वर्गों में बांट सकें। इसका उद्देश्य यही है कि आरक्षण का बड़ा और वास्तविक लाभ उन लोगों तक पहुंचे, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है, न कि उन लोगों तक जो पहले से ही मजबूत स्थिति में हैं। सीजेआई गवई ने कहा कि अपनी ही समुदाय के कुछ लोगों की आलोचना के बावजूद वे इस फैसले के साथ मजबूती से खड़े हैं, क्योंकि उनके अनुसार एससी/एसटी समुदायों में भी क्रीमी लेयर को जगह छोड़नी चाहिए, ताकि सबसे कमजोर तबकों को आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।

‘सरकार के खिलाफ फैसला ही स्वतंत्रता का पैमाना नहीं’- मुख्य न्यायाधीश गवई ने एक और महत्वपूर्ण भ्रम को दूर किया। उन्होंने कहा कि आजकल यह गलत धारणा बन गई है कि जब तक कोई जज सरकार के खिलाफ फैसला न दे, तब तक उसे स्वतंत्र नहीं माना जाता। पने कार्यकाल के अंतिम दिन उन्होंने साफ कहा- यह धारणा बिल्कुल गलत है। जज यह नहीं देखता कि मुकदमे में सरकार पक्ष में है या कोई आम नागरिक। वह सिर्फ अपने सामने मौजूद साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर फैसला करता है। केवल सरकार के खिलाफ फैसला देना ही न्यायिक स्वतंत्रता की निशानी नहीं है।” न्होंने कहा कि आज के समय में जजों को गलत तरीके से आंका जाता है, जबकि न्याय सिर्फ तथ्यों के आधार पर किया जाता है, न कि इस आधार पर कि किसके खिलाफ फैसला सुनाया गया।

Topics: reservationआरक्षणचीफ जस्टिसSCSTJustice BR Gavaiबीआर गवईक्रीमी लेयरएससीएसटीSupreme Court
Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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