देश के अगले चीफ जस्टिस सूर्यकांत बोले-‘ब्रिटिश काल की जंजीरों से मुक्त होनी चाहिए अदालतें’
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देश के अगले चीफ जस्टिस सूर्यकांत बोले-‘ब्रिटिश काल की जंजीरों से मुक्त होनी चाहिए अदालतें’

नए CJI जस्टिस सूर्यकांत बोले- अदालतों को ब्रिटिश काल की जंजीरों से आजाद करना होगा। भारतीय संस्कृति से जुड़ी देसी न्याय व्यवस्था का आह्वान। आज लेंगे शपथ।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Nov 24, 2025, 08:03 am IST
in भारत
Justice Suryakant talk about marriage

जस्टिस सूर्यकांत

भारत के अगले चीफ जस्टिस बनने वाले जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि हमें अपनी अदालतों को ब्रिटिश काल की जंजीरों से आजाद करना होगा। वो मानते हैं कि भारतीय न्याय व्यवस्था को पूरी तरह देसी रूप देना जरूरी है, ताकि ये हमारी संस्कृति और समाज से जुड़ सके।

जस्टिस सूर्यकांत ने हाल ही में न्यूज18 को दिए इंटरव्यू में ये बातें कही हैं। वो आज (सोमवार, 24 नवंबर 2025 को) भारत के 53वें चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ लेंगे। उन्होंने आर्टिकल 370 को रद्द करने, बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन और पेगासस स्पाईवेयर मामले जैसे ऐतिहासिक फैसलों में अहम भूमिका निभाई है।

भारत ब्रिटिश मॉडल की अदालतों से आगे बढ़े

जस्टिस सूर्यकांत का मानना है कि हमारी अदालतें अभी भी ब्रिटिश राज के नक्शे कदम पर चल रही हैं। उन्होंने कहा, “कोर्ट की कार्यवाही से लेकर अलग-अलग कानूनों तक, सब कुछ कॉलोनियल संदर्भ के लिए डिज़ाइन किया गया था। आज के भारतीय समाज और मूल्यों को दिखाने के लिए इन पॉलिसी को बदलना और उन्हें देसी बनाना बहुत ज़रूरी है।” मतलब, स्ट्रक्चर, प्रोसीजर और कल्चरल चीजों में बदलाव लाना पड़ेगा। ये सिर्फ दिखावा नहीं, बल्कि असल में न्याय को हमारी जड़ों से जोड़ने की कोशिश है। वो चाहते हैं कि न्याय व्यवस्था में अलग-अलग नजरिए आएं, ताकि ये कॉलोनियल हेरिटेज से निकलकर एक सच्ची भारतीय संस्था बने।

‘कॉलोनियल कोर्ट से जनता अलग-थलग पड़ जाती थी’

ब्रिटिश काल की अदालतें राजा-रानी के हित साधने के लिए बनी थीं, जिससे आम लोग दूर-दूर ही रह जाते थे। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “कॉलोनियल कोर्ट शाही हितों को पूरा करने के लिए बनाए गए थे, जिससे अक्सर जनता अलग-थलग पड़ जाती थी। प्रोसेस को आसान बनाना, टेक्निकल रुकावटों को कम करना और डिजिटल एक्सेस देना न्याय को और आसान बना सकता है। एक सच्ची भारतीय ज्यूडिशियरी को सबको साथ लेकर चलने को प्राथमिकता देनी चाहिए, यह पक्का करना चाहिए कि गांव के लोग बिना किसी डर के सिस्टम को समझ सकें।”

इसे भी पढ़ें: CJI BR गवई का रिटायरमेंट से पहले बयान: SC-ST आरक्षण में भी लागू हो ‘क्रीमी लेयर’, गरीब को मिले कोटे का फायदा

उन्होंने इंक्लूसिविटी पर जोर दिया। साथ ही जस्टिस सू्र्यकांत ने तकनीकी बाधाओं को दूर कर डिजिटल तरीके से पहुंच बनाने की बात कही, ताकि गांव का एक किसान भी बिना घबराए कोर्ट की दहलीज पर कदम रख सके। ये बदलाव न्याय को हर किसी की पहुंच में लाएगा।

समय पर केस निपटाने होंगे

देर-सबेर फैसले आने की समस्या को जस्टिस सूर्यकांत ने भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट्स को सरल बनाना और केसों को समय पर निपटाना जरूरी है। कॉलोनियल दौर की अस्पष्टताएं और देरी अब बर्दाश्त नहीं। “असल में, भारत की ज्यूडिशियरी को एक सच्चे भारतीय सिस्टम में बदलने के लिए मॉडर्न एफिशिएंसी को देसी पहुंच और कल्चरल अहमियत के साथ मिलाना होगा। यह बदलाव यह पक्का करेगा कि न्याय न केवल दिया जाए बल्कि भारत के सामाजिक ताने-बाने का हिस्सा भी महसूस किया जाए।” यानी, आधुनिक तरीकों से तेजी लाएं, लेकिन हमारी सांस्कृतिक जरूरतों को न भूलें। इससे न्याय सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि समाज के हर कोने में महसूस होगा।

Topics: British-era shacklescolonial court reformsजस्टिस सूर्यकांतdigital judiciaryJustice Surya Kantभारत का 53वां मुख्य न्यायाधीश53rd Chief Justice of Indiaनया CJI जस्टिस सूर्यकांतब्रिटिश काल की जंजीरेंकॉलोनियल कोर्ट रिफॉर्मडिजिटल ज्यूडिशियरीnew CJI Justice Surya Kant
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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