CJI BR गवई का रिटायरमेंट से पहले बयान: SC-ST आरक्षण में भी लागू हो 'क्रीमी लेयर', गरीब को मिले कोटे का फायदा
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CJI BR गवई का रिटायरमेंट से पहले बयान: SC-ST आरक्षण में भी लागू हो ‘क्रीमी लेयर’, गरीब को मिले कोटे का फायदा

रिटायरमेंट से ठीक पहले CJI बीआर गवई ने कहा- SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर को बाहर कर सब-क्लासिफिकेशन करें, ताकि सबसे गरीब और पिछड़े लोगों को ही कोटे का फायदा मिले।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Nov 24, 2025, 07:38 am IST
inभारत
मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई

मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई

देश के मुख्य न्यायधीश बीआर गवई ने रिटायरमेंट से ठीक पहले एक ऐसा बयान दिया, जो आरक्षण की बहस को नई दिशा दे सकता है। उन्होंने कहा है कि एससी-एसटी कोटा वाली सरकारी नौकरियों का ज्यादातर फायदा एससी/एसटी समुदाय के ही क्रीमी लेयर वाले लोग उठा रहे हैं। इससे इस समुदाय के गरीब वाकई में पीछे रह जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इसे सब क्लासिफाई करना चाहिए।

उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में ये बातें कही। सीजेआई गवई का कहना है कि अब समय आ गया है कि केंद्र और राज्य सरकारें इन समुदायों को सब-क्लासिफाई करें, ताकि असली जरूरतमंदों तक कोटा पहुंचे।

क्रीमी लेयर का दबदबा

सीजेआई गवई कहते हैं, “ये चिंता की बात है कि एससी-एसटी में जो लोग आर्थिक और सामाजिक रूप से मज़बूत हो चुके हैं, वो जाति को हथियार बनाकर कोटे का बड़ा टुकड़ा खींच ले जाते हैं।” उन्होंने ये भी जोड़ा कि इन समुदायों के अंदर ही क्रीमी लेयर को बाहर करके, जो लोग अभी भी गरीबी, पढ़ाई-लिखाई और समाज में पिछड़े हैं, उन्हें मौका मिलना चाहिए। सीजेआई का मानना है कि क्रीमी लेयर को जगह छोड़नी ही पड़ेगी, वरना आरक्षण का मकसद ही अधूरा रह जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट का वो अहम फैसला

हाल ही में गवई जी की अगुवाई वाली सात जजों की बेंच ने एक बड़ा कदम उठाया। उन्होंने राज्यों को हरी झंडी दे दी कि वो एससी समुदाय के अंदर जातियों को चिह्नित करें। इसका आधार सामाजिक-आर्थिक पिछड़ापन और नौकरियों में कम प्रतिनिधित्व को बनाने को कहा गया है। ताकि कोटे का लायन का हिस्सा सबसे ज़्यादा पिछड़े लोगों को ही मिले। कोर्ट ने ये साफ किया कि 50% आरक्षण की सीमा तो बरकरार रहेगी, लेकिन अंदरूनी बंटवारा न्यायपूर्ण हो। ये सुनवाई महीनों चली, और फैसले ने पूरे देश में बहस छेड़ दी।

जजों की आजादी पर सवाल

इसके साथ ही अक्सर एक वाल जजों की आजादी पर उठता है, जिसको लेकर सीजेआई ने कहा कि आजकल ये गलत धारणा है कि जज तभी स्वतंत्र होते हैं जब वो सरकार के खिलाफ फैसला सुनाते हैं। “अगर आप सरकार के खिलाफ नहीं गए, तो आप आजाद नहीं… ये बकवास है।” उनका मानना है कि जज को ये नहीं देखना चाहिए कि केस सरकार का है या आम आदमी का। बस, जो दस्तावेज सामने हैं, उसी के हिसाब से इंसाफ करना है। आज के ज़माने में स्वतंत्रता का पैमाना सिर्फ सरकार विरोधी फैसला बन गया है, जो गलत है।

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कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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