रूस के खौफ के चलते अब जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने अपनी सेना को यूरोप की सबसे मजबूत सेना बनाने का ऐलान कर दिया है। ये सब इसलिए क्योंकि रूस से खतरे बढ़ रहे हैं और अमेरिका की विदेश नीति में बदलाव आ रहा है। सालों से जर्मनी की बुंडेसवेर (सेना) को नजरअंदाज किया गया था, लेकिन अब एक नया बिल आया है जो इसे मजबूत बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। ये बिल पिछले हफ्ते तय हुआ, जिसमें सैनिकों की संख्या बढ़ाने और प्रोत्साहन देने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
सेना को भुला दिया गया था
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, जर्मनी की सेना को कोल्ड वॉर के बाद से कम फंडिंग मिली थी। हालात तो ये रहे कि बर्लिन की दीवार गिरने के बाद 30 साल तक सैन्य खर्च जीडीपी के 2% से नीचे रहा। लेकिन 2022 में रूस और यूक्रेन के युद्ध के शुरू होने के बाद तत्कालीन चांसलर ओलाफ शोल्ज़ ने ‘जाइटनवेंडे’ (एक बड़ा बदलाव) की घोषणा की और 100 अरब यूरो (116 अरब डॉलर) का फंड बनाया सेना के आधुनिकीकरण के लिए। जून 2024 में जर्मनी ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार वेटरन्स डे मनाया। मर्ज़ ने पद संभालते ही रक्षा खर्च दोगुना करने का वादा किया, नाटो टारगेट पूरा करने और यूरोप की सबसे मजबूत पारंपरिक सेना बनाने का।
सैनिकों की तादाद बढ़ेगी
जर्मनी की योजना है कि वो 2035 तक अपनी सेना में एक्टिव सैनिकों की संख्या 1 लाख 80 हजार से बढ़ाकर 2 लाख 60 हजार करेगा। साथ ही 2 लाख रिजर्व सैनिक भी रखेगा। इसकी शुरुआत स्वैच्छिक भर्ती से होगी। नए सैनिकों को महीने का 2,600 यूरो (3,000 डॉलर) वेतन दिया जाएगा, जो कि पहले से 450 यूरो ज्यादा है। प्रावधान तो ये भी रखा गया है कि अगर आवश्यकता के अनुसार, लोग सेना में भर्ती नहीं होते हैं तो उन्हें जबरन शामिल किया जाएगा। अगले साल से हर 18 साल के बच्चे को सर्विस में इंटरेस्ट का क्वेश्चनेयर भेजा जाएगा – लड़कों के लिए ये जरूरी होगा। 2027 से 18 साल के लड़कों की मेडिकल जांच अनिवार्य होगी। ये बिल साल के अंत तक बुंडेस्टाग से पास होना चाहिए, ताकि 1 जनवरी 2026 से लागू हो सके।
सीडीयू और एसपीडी गठबंधन ने ये सुधार तय किए। पहले ‘लॉटरी स्टाइल’ कंसक्रिप्शन का आइडिया था, लेकिन वो छोड़ दिया गया। अब पैसे और मुआवजे जैसे इंसेंटिव पर जोर है। जर्मनी में पहले 18-23 साल के लड़कों के लिए अनिवार्य सर्विस थी, जो 2011 में बंद हो गई थी वॉलंटरी आर्मी के लिए।
युवाओं की राय: जंग नहीं, जिंदगी चाहिए
एक 17 साल की लड़की ने सीएनएन से कहा, “हां, खुद की रक्षा जरूरी है। लेकिन हम नाटो में हैं ना। मैं जर्मनी से प्यार करती हूं, लेकिन अभी इसके लिए लड़ना नहीं चाहती। मेरी जिंदगी का प्लान जंग का नहीं है।” 21 साल के लियोनिड बेकजरोव बोले, “सेना को नरम और नजरअंदाज किया गया था। रूस का यूक्रेन पर हमला गलत था, लेकिन जंग के खिलाफ हूं। थोड़ी मजबूती अच्छी है – फंड पहले से आवंटित हैं – लेकिन सबके लिए जबरन सर्विस गलत लगता है।” कुछ युवा कहते हैं कि कॉल-अप से पढ़ाई बर्बाद हो जाएगी।
अधिकारियों के बयान: डरने की जरूरत नहीं
डिफेंस मिनिस्टर बोरिस पिस्टोरियस ने कहा, “चिंता या डर की कोई वजह नहीं। सबक साफ है: जितनी मजबूत हमारी सेना होगी– हथियार, ट्रेनिंग और स्टाफ से – उतना ही कम कॉन्फ्लिक्ट में फंसने का चांस।” वो ये भी बोले, “सब हमारी नजर रखे हुए हैं।” फ्रांस, यूके जैसे देशों से संपर्क है। पिस्टोरियस ने कहा, “हमारा नया कंसक्रिप्शन मॉडल बहुत मॉडर्न है। शायद दूसरे देशों के लिए उदाहरण बने।” चांसलर मर्ज़ ने कहा, “पुतिन को सिर्फ ताकत की भाषा समझ आती है।”












