भुवनेश्वर. सात दिनों तक पुलिस की गिरफ्त से दूर रहने के बाद बांग्लादेशी घुसपैठियों को आश्रय देने के षड्यंत्र के मुख्य आरोपी सिकंदर आलम को आखिरकार जगतसिंहपुर पुलिस ने जाजपुर जिले से दबोच लिया। रणनीतिक निगरानी और कई स्थानों पर बिछाए गए जाल के बाद पुलिस को उसकी गतिविधियों का लोकेशन मिला और 22 नवंबर को विशेष टीम ने उसे जाजपुर के बिंझारपुर थानांतर्गत अलकुंड क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। उसके साथ उसका भाई अब्दुल मोतालीफ खान भी पकड़ा गया। दोनों एक स्थानीय वाहन चालक के घर में छिपे हुए थे।
पासपोर्ट बरामद, विदेशी नेटवर्क को लेकर जांच
गिरफ्तारी अभियान के दौरान पुलिस ने सिकंदर से कई अहम दस्तावेज बरामद किए, जिनमें उसका पासपोर्ट भी शामिल है। पूछताछ में उसने स्वीकार किया था कि उसने पासपोर्ट अपने बेटे को दे दिया है। बाद में पुलिस को पता चला कि उसके बेटे ने पासपोर्ट एक मित्र को सौंप दिया था, जिसने उसे जमीन में गाड़कर छिपा दिया था।
पुलिस ने उसे सुरक्षित रूप से बरामद कर लिया है। पुलिस को आशंका है कि सिकंदर की गतिविधियां विदेशी नेटवर्क से जुड़ी हो सकती हैं। आरोप है कि उसने जगतसिंहपुर के बेहरामपुर स्लम में सरकारी जमीन पर कई अवैध संरचनाएं बनाई थीं, जहां वह संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को आश्रय देता था। यह भी पता चला है कि संदिग्ध बांग्लादेशियों का एक बड़ा ठिकाना केन्द्रापड़ा जिले के पटामुंडाई क्षेत्र में सक्रिय था।
सीसीटीवी हार्डडिस्क की तलाश, पटामुंडाई में सर्च ऑपरेशन की तैयारी
हालांकि सिकंदर के घर में लगे सीसीटीवी सिस्टम का हार्डडिस्क अभी तक पुलिस के हाथ नहीं लगा है। विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि उसे पटामुंडाई भेज दिया गया है, जिसके बाद पुलिस की एक विशेष टीम उसकी तलाश में वहां जाने की तैयारी कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, हार्डडिस्क में कई अहम सबूत हो सकते हैं।

अवैध मदरसा और नाबालिगों के रेस्क्यू का मामला पहले भी सामने आया था
यह पहला मामला नहीं है जब सिकंदर के खिलाफ गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। कुछ माह पहले पुलिस ने उसके क्षेत्र में संचालित एक अवैध मदरसे पर छापा मारा था, जहां से बिहार के कई नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू किया गया था। इस घटना के बाद से ही पुलिस उसकी गतिविधियों पर नज़र बनाए हुए थी।
अवैध निर्माण ढहाए, हथियार बरामद हुआ था
उल्लेखनीय है कि गत 16 नवंबर को पुलिस ने तरिकुंद बेराहिमपुर में सिकंदर द्वारा सरकारी भूमि पर बनाए गए 10 अवैध घरों को ध्वस्त किया था। इसी दौरान भारी मात्रा में हथियार, जिनमें देसी पिस्तौल भी शामिल थी, बरामद किए गए थे। इसके अतिरिक्त सात अन्य अवैध निर्माणों को भी मौके पर बुलडोज़र चलाकर गिरा दिया गया था।
27 संदिग्ध बांग्लादेशी शेल्टर पर भेजे गए
इस कार्रवाई के दौरान 27 पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिक मानते हुए बिरिड़ी बागलपुर स्थित एक साइक्लोन शेल्टर में पूछताछ के लिए स्थानांतरित किया गया था। पुलिस अब उनके दस्तावेज़ों और पहचान की विस्तृत जांच कर रही है।
तटीय जिलों में अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई : डीआईजी
ओडिशा पुलिस ने राज्य के तटीय जिलों में अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई को और तेज कर दी है। पूर्वी रेंज के उप पुलिस महानिरीक्षक (डीआईजी) पिनाक मिश्रा ने इस संबंध में जानकारी दी। डीआईजी ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार जिन व्यक्तियों के पास वैध पहचान पत्र या भारत में कानूनी निवास दस्तावेज नहीं हैं उन्हें अवैध प्रवासी माना जा रहा है। यह अभियान सभी जिलों में शुरू कर दिया गया है और आने वाले दिनों में भी जारी रहेगा। तकनीकी रूप से जटिल होने के कारण इसे अत्यंत सावधानी के साथ लागू किया जा रहा है ताकि प्रक्रिया सुचारू और विधिसम्मत रहे। पूर्वी रेंज में भद्रक और बालेश्वर जिलों में पांच से अधिक मरीन पुलिस थाने कार्यरत हैं, जिनमें से दो इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल हैं। इन थानों के कर्मियों के साथ स्थानीय समुदाय और मछुआरे भी निगरानी और सत्यापन कार्य में सहयोग दे रहे हैं।
क्षेत्र में मरीन पुलिस को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है। तटवर्ती इलाकों में ड्रोन की मदद से निगरानी तेज कर दी गई है तथा सुरक्षा जांच भी सख्त की गई है। भद्रक जिले के बासुदेवपुर ब्लॉक में काशिया मरीन पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में अभियान पूरे जोर-शोर से चल रहा है। डीआईजी पिनाक मिश्रा ने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सभी निवासियों का उचित दस्तावेजीकरण सुनिश्चित करना और तटीय क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार यह अभियान पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ संचालित करने के लिए प्रतिबद्ध है।












