यह दुर्घटना आत्मनिर्भर भारत पर प्रश्न नहीं, उड्डयन विज्ञान की वैश्विक सच्चाई है , 21 नवंबर 2025, दुबई एयर शो का अंतिम दिन।
भारतीय वायुसेना का स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान तेजस (HAL Tejas) अपने प्रदर्शन के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान ने नकारात्मक, जी मैन्यूवर के बाद नियंत्रण नहीं संभाला और जमीन से टकरा गया। हमारे बहादुर पायलट ने इजेक्ट करने का प्रयास किया, पर मौका नहीं मिला। एक कीमती जान चली गई, एक शानदार विमान खाक हो गया।
फिर वही हुआ, जो आजकल हर दुर्घटना के बाद होता है, सोशल मीडिया पर “आत्मनिर्भर भारत” का मजाक, तेजस को “टॉय प्लेन” कहना, वायुसेना के प्रशिक्षण पर सवाल, और पायलट की योग्यता पर ऊंगली। यह जल्दबाजी न केवल दुखद है, बल्कि उड्डयन विज्ञान की बुनियादी समझ की कमी भी दर्शाती है। विमानन कोई साधारण तकनीक नहीं है। यह गति, दाब, तापमान, धातु की थकान, इंजन की सीमाएँ और मानव निर्णय का बेहद नाजुक संतुलन है। एयर शो तो उस संतुलन की चरम परीक्षा होता है, जहाँ पायलट विमान की सीमाओं को जानबूझकर चुनौती देते हैं ताकि दुनिया को उसकी क्षमता दिखा सकें। ऐसे में जोखिम सामान्य उड़ान से कई गुना अधिक होता है। दुनिया की कोई भी वायुसेना इस जोखिम से पूरी तरह मुक्त नहीं है।
इतिहास गवाह है
- अमेरिका ने रेनो एयर रेस 2011 में P-51 मस्टैंग दर्शकों पर गिरते देखा, 11 मरे। थंडरबर्ड्स का F-16 कई बार क्रैश हुआ। किसी ने अमेरिकी इंजीनियरों को अयोग्य नहीं ठहराया।
- रूस ने MAKS एयर शो में 200de में Su-27 और 2011 में MiG-29 खोया। किसी ने रूसी तकनीक को हमेशा के लिए खारिज नहीं किया।
- यूक्रेन के लविव एयर शो 2002 में Su-27 भीड़ में गिरा, 77 लोग मारे गए, अब तक की सबसे भयावह एयर शो दुर्घटना।
- जर्मनी के रामस्टाइन 1988 में इटली की फ्रेस्चे त्रिकोलोरी के तीन जेट आपस में टकराए, 70 से अधिक दर्शक मारे गए।
- फ्रांस के पेरिस एयर शो 1973 में सोवियत Tu-144 हवा में टूटकर गिरा।
- चीन ने सितंबर 2025 में ही चंगचुन एयर शो रिहर्सल में दो Xpeng eVTOL एक, दूसरे से टकराकर गिरीं।
- पाकिस्तान ने 2020 में पाकिस्तान डे रिहर्सल में इस्लामाबाद के ऊपर अपना F-16 खोया, पायलट शहीद हुआ।
इन सभी देशों ने एक ही काम किया, दुर्घटना को विज्ञान की समीक्षा का अवसर बनाया, न कि राष्ट्र की गरिमा पर हमला।
अब भारत की बारी
तेजस कोई साधारण विमान नहीं है। यह चौथी पीढ़ी का सुपरसोनिक, डेल्टा, विंग, फ्लाई, बाय, वायर, कम्पोजिट बॉडी वाला दुनिया का सबसे हल्का लड़ाकू विमान है। इसने हजारों सफल सॉर्टी उड़ाई हैं, अंतरराष्ट्रीय अभ्यासों में राफेल, F-16, यूरोफाइटर को मात दी है। दुबई, बहरीन, सिंगापुर, मलेशिया, हर जगह इसने अपनी विश्वसनीयता सिद्ध की है। मार्च 2025 में राजस्थान में इसका पहला क्रैश हुआ था, यह दूसरा है। दोनों ही दुर्घटनाएँ अब तक के 3 लाख से अधिक उड़ान घंटों के सापेक्ष बेहद कम हैं।
भारतीय वायुसेना दुनिया की सबसे कठिन परिस्थितियों में उड़ती है, सियाचिन की 23,000 फीट ऊँचाई, राजस्थान की 50 डिग्री गर्मी, अंडमान की नमी, लद्दाख की कड़कड़ाती ठंड। तेजस, राफेल, सुखोई,30, मिराज,2000, सभी यहाँ दुनिया के किसी भी देश से बेहतर उपलब्धता दर (availability rate) दिखाते हैं। इसका कारण है हमारे पायलटों का अद्भुत कौशल और ग्राउंड क्रू की मेहनत।
आत्मनिर्भर भारत का मतलब सिर्फ़ तेजस नहीं है। यह ध्रुव हेलीकॉप्टर है जो 12 देशों में उड़ रहा है, यह प्रचंड है जो दुनिया का एकमात्र हाई, ऑल्टिट्यूड अटैक हेलीकॉप्टर है, यह ब्रह्मोस, अस्त्र, आकाश,NG, उत्तम AESA रडार, तपस ड्रोन है। यह वह पूरा पारिस्थितिकी तंत्र है जो भारत को उन पाँच, सात देशों में शामिल करता है जो रक्षा तकनीक की पूरी श्रृंखला खुद बनाते हैं।
21 नवंबर की दुर्घटना दुखद
21 नवंबर की दुर्घटना दुखद है। लेकिन यह न तेजस की विफलता है, न भारतीय वायुसेना की, न आत्मनिर्भर भारत की। यह उड्डयन विज्ञान की कठोर सच्चाई है। अब ब्लैक बॉक्स का विश्लेषण होगा, प्रक्रियाएँ और मजबूत होंगी, प्रशिक्षण में सुधार होगा, अगला तेजस और सुरक्षित उड़ेगा। यही परिपक्व राष्ट्र करते हैं।
हमारे पायलट कोई साधारण उड़ाका नहीं हैं। वे वही हैं जिन्होंने कारगिल में 18,000 फीट पर लेजर, गाइडेड बम गिराए, बालाकोट में रात के अंधेरे में सटीक हमला किया, 2020,21 में लद्दाख की ऊँचाइयों पर चौबीसों घंटे गश्त की। उनकी क्षमता को एक दुर्घटना से मापना अपने ही साहस का अपमान करना है। भारत की उड़ान एक दुर्घटना से नहीं रुकती। वह सीखती है, सुधरती है, और फिर नई ऊँचाइयों को छूती है।
यही आत्मनिर्भर भारत की असली परिभाषा है, जो गिरकर भी उठता है, सीखकर भी आगे बढ़ता है, और दुनिया को दिखाता है कि भारतीय आकाश अब किसी के रहम पर नहीं, अपनी शक्ति पर उड़ता है।













