जमीयत के अरशद मदनी ने अल फलाह यूनिवर्सिटी का किया बचाव, आतंक की अनदेखी करके विक्टिम कार्ड खेला
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जमीयत के अरशद मदनी ने अल फलाह यूनिवर्सिटी का किया बचाव, आतंक की अनदेखी करके विक्टिम कार्ड खेला

मौलाना अरशद मदनी ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी (जिसके डॉक्टरों-छात्रों के ISIS लिंक मिले) की तारीफ की और दावा किया कि भारत में कोई मुस्लिम VC नहीं बन सकता। सोशल मीडिया पर तथ्यों के साथ उनकी पोल खुल गई।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Nov 23, 2025, 12:06 pm IST
in भारत
Maulana Arshad Madni Gives poisnous statement on Waqf ammendment bill

देस की राजधानी दिल्ली में लाल किले के पास हुआ कार बम ब्लास्ट अभी लोगों की जेहन से उतरा भी नहीं है कि जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने आतंकियों की गढ़ के तौर पर सामने आई अल फलाह विश्वविद्यालय की तारीफ में कसीदे पढ़ने शुरू कर दिए हैं। मदनी का आतंकी प्रम जागृत हो गया है।

समाचार एजेंसी एएनआई के द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो में मदनी को कहते देखा गया, “दुनिया सोचती है कि मुसलमान अपाहिज, खत्म और बांझ हो गए हैं। लेकिन मैं ऐसा नहीं मानता। आज, एक मुस्लिम ममदानी न्यूयॉर्क का मेयर बन सकता है, एक खान लंदन का मेयर बन सकता है, जबकि हिन्दुस्तान के अंदर कोई मुस्लिम यूनिवर्सिटी का वाइस-चांसलर भी नहीं बन सकता। और अगर कोई बन भी जाए, तो उसे आजम खान की तरह जेल भेज दिया जाएगा। देखो आज अल-फलाह में क्या हो रहा है, जावेद को जेल में डाल दिया और वह कितने वर्ष तक जेल में रहेगा, कोई नहीं जानता। सरकार लगातार काम कर रही है ताकि मुसलमान कभी सिर न उठा सकें।

#WATCH | Jamiat Ulema-e-Hind President Maulana Arshad Madani says, "The world thinks that Muslims have become helpless, finished, and barren. I don't believe so. Today, a Muslim Mamdani can become mayor of New York, a Khan can become mayor of London, whereas in India, no one can… pic.twitter.com/cyuQzgZmHL

— ANI (@ANI) November 22, 2025

अरशद मदनी के इस बयान पर सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें खूब खरी खोटी सुनाई। इसी क्रम में हरीश नाम के यूजर ने कमेंट किया, “मौलाना अरशद मदनी की कहानी एक क्लासिक विक्टिम कार्ड है, जो असलियत को नज़रअंदाज़ करते हुए ध्यान खींचती है। सादिक खान के लंदन कार्यकाल की बढ़ते क्राइम और टेररिज्म के लिए आलोचना की जाती है। भारत में, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे मुसलमान खूब फले-फूले। आज़म खान को जेल भेजना कानूनी है, ज़ुल्म नहीं। अल-फ़लाह की जांच टेरर लिंक के लिए है, धर्म के लिए नहीं। असली विक्टिम वे हैं जो टेररिस्ट हमलों में मारे गए, न कि वे जो क्राइम को छिपाने की कोशिश करते हैं।”

इसी क्रम में अनुराग गौर नाम के व्यक्ति ने मदनी के झूठ की पोल खोलते हुए कहा, “शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ़ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के प्रोफ़ेसर नज़ीर अहमद गनई और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर प्रोफ़ेसर नईमा खातून हैं। यूजर ने मौलाना पर आग में घी डालने का आरोप लगाया कि न तो वो आतंकी डॉक्टरों के बारे में कुछ बोल रहे और न ही आतंक से प्रभावित लोगों के बारे में कुछ बोल रहे हो। अल फलाह विश्वविद्यालय में कट्टरपंथियों के द्वारा किए गए कृत्य पर आपकी चुप्पी ही आतंक को नॉर्मल बनाती है।

Prof Nazir Ahmad Ganai at Sher-e-Kashmir University of Agricultural Sciences and Technology and Prof Naima Khatoon, Vice Chancellor at Aligarh Muslim University

No word on doctors? No words for the rest of the people impacted by terrorists? Maulana saab aag mien ghee dal rahey…

— Anurag Gour (@goursay) November 22, 2025

कश्मीर टाइम्स के दफतर में गोलियां और हथियार मिले, डॉक्टरों के ऑफिस में बंदूकें, हिंसक हमलावर डॉक्टर और महिलाओं के कट्टरपंथ पर आपका क्या संदेश है? यूजर ने कहा कि मदनी आज भी कुछ सड़े हुए लोगों को ज़िम्मेदार ठहराने में हिचकिचा रहे हैं। ज़्यादातर भारतीय शांति और खुशहाली चाहते हैं। हम आपका हमारे गाँवों और ज़िलों में आने और यह देखने के लिए स्वागत करते हैं कि डॉक्टरों ने क्या किया। आप जैसे समुदाय के बुज़ुर्गों को अब आगे आना चाहिए और इस हरकत को ठीक करना चाहिए। देश के लिए यह अच्छा नहीं है कि इंसानियत और साथ रहने का लेवल गिरता रहे। युवक ने मदनी को सेलेक्टिव एप्रोच वाला व्यक्ति करार दिया।”

वहीं अरशद मदनी के द्वारा झूठे नरैटिव गढ़ने पर व्लॉगर नीलमराजू चंद्रमोहन ने कुछ आंकड़ों के साथ इसकी पोल खोलते हुए कहा, ये सब मुसलमानों को पीड़ित साबित करने की दिशा में झूठी और एकतरफा बातें है। यूजर ने लिखा कि 1947 से भारत के 15 प्रेसिडेंट में से 3, ज़ाकिर हुसैन, फ़करुद्दीन अली अहमद और APJ अब्दुल कलाम मुस्लिम कम्युनिटी से थे, यानी 14.2% आबादी के मुकाबले 20%। एक सिख, ज्ञानी ज़ैल सिंह सिख कम्युनिटी से थे।

False and biased narrative to make Muslims feel neglected.

1. Out of 15 Presidents of India since 1947, 3 , Zakir Hussain, Fakruddin Ali Ahmed and APJ Abdul Kalam were from Muslim Community, i.e. 20% against 14.2% population. A Sikh , Giani Zail Singh was from Sikh Community.…

— Neelamraju Chandramohan (@vanichandra2010) November 23, 2025

इसी तरह से देश से 15 उपराष्ट्रपतियों में से 2, 3 मुस्लिम समुदाय से थे। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के 3 मुख्य न्यायधीश मुसनलमान रह चुके हैं। अब तक 281 जाने-माने मुसलमान अलग-अलग यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर बन चुके हैं। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के सभी 24 VC उन्हीं की कम्युनिटी से थे।

यूजर ने ये भी कहा कि अल फ़लाह यूनिवर्सिटी बंद नहीं हुई। कुछ डॉक्टरों और स्टूडेंट्स के आतंकी संगठनों से कनेक्शन पाए जाने की खबर है। यह एक चल रही जांच है और जांच पूरी होने तक डिटेल्स जारी नहीं की जाएंगी। यह आदमी, मदनी, सारी डिटेल्स मिलने की उम्मीद नहीं कर सकता। वह शांतिप्रिय मुसलमानों का रिप्रेजेंटेटिव नहीं है, जिन्होंने भारत को अपनी मातृभूमि बनाया। इस तरह की झूठी बातें सिर्फ़ मासूम मुसलमानों को दूर करेंगी, जो दूसरे समुदायों के साथ घुलमिल गए हैं और खुश हैं। अपने मतलब के लिए मदनी झूठी बातें फैला रहे हैं। उन्हें ध्यान देना चाहिए कि न्यूयॉर्क के मेयर USA में मेयर चुने जाने वाले पहले भारतीय मुस्लिम हैं। भारत ने दुनिया को बहुत पहले शांतिपूर्ण साथ रहने की सीख दी थी। टॉप पोस्ट मेरिट और सीनियरिटी के आधार पर भरी जाती हैं, धर्म/जाति के आधार पर नहीं। दूसरे देशों के लिए उनका प्यार इतना ही है।

क्या है पूरा मामला ? 

गौरतलब है कि देश की राजधानी दिल्ली में 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुंडई i20 कार ब्लास्ट हुआ था। इस धमाके को करने वाला उमर उन नबी फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से था। इसके अलावा कई और डॉक्टर पकड़े गए और व्हाइट कॉलर टेररिज्म उजागर हुआ। लेकिन मदनी ने बड़ी ही शातिरता के साथ उन सभी चीजों को नजरअंदाज करते हुए मुसलमान को ही विक्टिम साबित करने की कोशिश की।

Topics: अल-फलाह यूनिवर्सिटी टेररमुस्लिम वाइस चांसलरआतंक लिंकमौलाना अरशद मदनीMuslim Vice ChancellorMaulana Arshad Madaniterror linksविक्टिम कार्डAl Falah University terror caseVictim CardArshad Madaniअरशद मदनीअल फलाह यूनिवर्सिटीAl Falah University
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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