चंडीगढ़। पीड़ादायक है उस भूमि को टारगेट किलिंग का हब बोलना, जिसका गौरवशाली अतीत हो। पिछले कुछ दशक से इसे उड़ता पंजाब कहा जाने लगा था। अस्सी से लेकर नब्बे के दशक की शुरुआत तक आतंकी गतिविधियों से सुलगता पंजाब बना रहा। अब इसे टारगेट किलिंग का लांचिंग पैड कहें या हब, दोनों पहचान शर्मनाक है, क्योंकि पंजाब की नई पहचान यही बन रही है।
यह वही पंजाब है, जिसे महाभारत, पुराणों और धर्मग्रंथों में पंचनद कहा गया। जहां गुरुओं के पावन चरण पड़े। इसीलिये इसे गुरुओं की पावन धरा के रूप में खास पहचान मिली। मगर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और हिंदू संगठनों से जुड़े नेताओं पर हमलों और हत्याओं के घटनाक्रमों में बढ़ोतरी हुई है। ताजा घटनाक्रम नवीन अरोड़ा हत्याकांड हमारे समक्ष है।
पंजाब में पिछले वर्षों में संघ और हिंदू संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं और नेताओं पर हमले की घटनाओं का पैटर्न यही संकेत देता रहा है कि राज्य में संगठित गैंगस्टर–मॉड्यूल, कट्टरपंथी नेटवर्क और कॉन्ट्रैक्ट शूटरों का सिंडिकेट चुनिंदा धार्मिक और राष्ट्रवादी चेहरों को टारगेट कर रहा है। पुलिस की कार्रवाई चाहे कितनी भी हो, मगर सच्चाई है कि घटनाक्रमों पर अंकुश नहीं लगा। हर दो–तीन साल में एक बड़ा केस पंजाब प्रांत की कानून-व्यवस्था को बेनकाब करता आया है।
फिरोजपुर में नवीन अरोड़ा को मारी गोली
तीन पीढ़ी से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े नवीन अरोड़ा की हत्या फिरोजपुर के भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में सड़क पर हुई। वे 16 नवंबर 2025 को मोची बाजार से लौट रहे थे। इसी समय बाइक सवार दो नकाबपोश हमलावरों ने नजदीक से गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। यह घटना सीसीटीवी कैमरों में भी कैद हुई। सीसीटीवी फुटेज में हमलावरों की योजनाबद्ध साजिश स्पष्ट दिखाई देती है कि उन्होंने पहले पीछा किया, बाइक रोकी और फिर सिर पर सीधा फायर कर पलक झपकते ही फरार हो गये।
हालांकि 20 नवंबर को पुलिस ने मास्टरमाइंड जतिन काली को एनकाउंटर में पकड़ा है और सामने आया वो सच, जिससे पता चला कि हमलावरों को 1 लाख रुपये देकर पूरी साजिश रची थी। यह घटना मौजूदा दौर की सबसे साफ टारगेट किलिंग कही जा सकती है।

नंगल में विकास प्रभाकर की हत्या
13 अप्रैल 2024 को भी कुछ ऐसा ही हुआ था, तब विश्व हिंदू परिषद के विकास प्रभाकर की नंगल में हत्या की गई थी। जांच में भी संगठित मॉड्यूल के संकेत मिले थे और वही पुराना पैटर्न सामने आया था कि दो हमलावरों ने नजदीक से फायरिंग की और फरार हो गये।
अमृतसर में सुधीर सूरी की हत्या
4 नवंबर 2022 में अमृतसर के भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में शिवसेना के सुधीर सूरी की गोली मारकर हत्या की गई थी। अमृतसर में मंदिर के बाहर विरोध प्रदर्शन के दौरान शिव सेना टकसाली नेता सुधीर सूरी को भीड़ और पुलिस दोनों की मौजूदगी में गोली मारी दी गई थी। तब भी हमलावर सीधे सामने आया, प्वाइंट-ब्लैंक फायर किया और भीड़ में घुस गया। यह केस पंजाब में सुरक्षा एजेंसियों की नाकामी का सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है, क्योंकि सूरी पहले भी कई बार टारगेट किलिंग की धमकियों की बात सार्वजनिक कर चुके थे।
शिवसेना के युवा नेता पर फायरिंग
10 फरवरी 2020 की शाम को शिवसेना के युवा नेता हनी महाजन पर अंधाधुंध फायरिंग हुई थी, जिसमें वह गंभीर रूप से जख्मी हुए थे और उनके परिचित अशोक कुमार की मौत हो गई थी। उस रोज गुरदासपुर जिला के कसबा धारीवाल में एक स्विफ्ट कार आकर रुकी। इसमें से उतरे दो लोग गाड़ी का शीशा साफ करने लगे और मौका देखते ही दुकान के बाहर खड़े शिवसेना नेता पर फायरिंग कर दी। पांच साल में लगातार हुई इन घटनाओं ने यह स्थापित कर किया है कि पंजाब में टारगेट किलिंग सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि नेटवर्क आधारित रणनीतिक हिंसा है।
हर वारदात में एक जैसी 5 बातें सामने आईं
- बाइक सवार दो हमलावर, जिसमें एक ड्राइवर, एक शूटर
- चेहरा ढका हुआ, नंबर प्लेट गायब
- सिर और शरीर के ऊपरी हिस्से पर फायरिंग
- भागने का समय 8–15 सेकंड
- हमलावरों के पीछे किसी गैंग या मॉड्यूल की मौजूदगी
नवीन अरोड़ा की हत्या के बाद राज्यभर में विरोध, सीधी डिमांड
- गैंगस्टर नेटवर्क का सफाया
- विदेशी मॉड्यूल की फंडिंग पर नकेल
- पुलिस की जवाबदेही
- धार्मिक/राष्ट्रवादी विशेष व्यक्तियों की सुरक्षा
















