रूस और यूक्रेन के मध्य चल रहे युद्ध के चार साल पूरे होने को हैं। ऐसे में इस युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका और रूस के अफसरों ने एक नया प्लान तैयार किया है। इसके तहत यूक्रेन को रूके द्वारा जीती गई जमीन को छोड़ना और अपनी सेना को आधी करना होगा। ये ड्राफ्ट डोनाल्ड ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और क्रेमलिन के सलाहकार किरिल दिमित्रिएव ने बनाया है।
प्लान की मुख्य बातें
द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, 28 पॉइंट्स वाले इस प्रपोजल को यूक्रेन के लिए बहुत सख्त माना जा रहा है। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप पहले भी यूक्रेन में शांति स्थापित करने को लेकर इस तरह की बातें कर चुके हैं कि वो डोनबास तक के उस क्षेत्र को रूस को सौंप दे, जिसे वो जीत चुका है। इस प्रस्ताव में भी ऐसा ही है। इसमें पूर्वी इलाकों में जो जमीन यूक्रेन के कंट्रोल में है, उसे रूस को सौंपना होगा। साथ ही, यूक्रेन की आर्मी को आधी करनी पड़ेगी। अमेरिका से मिलने वाली मिलिट्री हेल्प को भी सीमित करना होगा, और यूक्रेन की सेना को इस्तेमाल होने वाले हथियारों की कैटेगरी भी तय कर दी जाएगी। ये प्लान गाजा युद्ध खत्म करने वाले ट्रंप के पुराने आइडिया से प्रेरित लगता है व्हाइट हाउस ने अभी कोई जवाब नहीं दिया।
शामिल लोग और उनकी प्रतिक्रिया
एंस्टीव विटकॉफ और किरिल दिमित्रिएव के बीच ये अनऑफिशियल चैनल मॉस्को-वॉशिंगटन के बीच महत्वपूर्ण रहा है। लेकिन क्रेमलिन के स्पोक्सपर्सन दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि अभी कोई नई प्रोग्रेस नहीं हुई। रूस की फॉरेन मिनिस्ट्री की मारिया जाखारोवा ने तो ये भी कहा कि उन्हें अमेरिका की तरफ से ऐसा कोई नया ड्राफ्ट मिला ही नहीं। अगर आता, तो डिप्लोमैटिक चैनलों से आता। यूक्रेन के प्रेसिडेंट वोलोडिमिर जेलेंस्की ने पहले ऐसे शर्तों को रिजेक्ट किया था। अभी वो तुर्की के प्रेसिडेंट रेसेप तईप एर्दोगन से अंकारा में मिले, ताकि नेगोशिएशंस को दोबारा शुरू किया जा सके। जेलेंस्की ने एक्स पर लिखा कि रूस पर प्रेशर कम है, इसलिए ऐसे हमले हो रहे। उन्होंने एयर डिफेंस मिसाइल्स और सैंक्शंस की मांग की। गुरुवार को वो अमेरिकी मिलिट्री अफसरों से मिलेंगे। यूएस आर्मी सेक्रेटरी डेनियल ड्रिस्कॉल भी कीव पहुंचे हैं, ताकि युद्ध खत्म करने पर बात हो।
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युद्ध का बैकग्राउंड
गौरतलब है कि यूक्रेन-रूस युद्ध को लगभग चार साल हो चुके। रूस ने सिस्टमैटिक तरीके से यूक्रेन की सिविलियन पावर इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया है, खासकर सर्दी से पहले। कीव और मॉस्को के बीच आखिरी डायरेक्ट बातचीत गर्मियों में हुई थी। ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन की आखिरी मीटिंग अगस्त में अलास्का में हुई, उसके बाद डिप्लोमेसी रुकी हुई है। क्रेमलिन कहता है कि वो बातों को तैयार है, लेकिन अपनी मैक्सिमलिस्ट डिमांड्स से पीछे नहीं हट रहा।
यूक्रेन की हालत और हमलों का असर
जेलेंस्की घरेलू और बैटलफील्ड पर मुश्किल में हैं। रूसी फोर्सेस पोक्रोवस्क शहर के 90 फीसदी हिस्से पर कब्जा कर चुकी है। अगर इस शहर पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया गया तो रूस की कीव तक पहुंच आसान हो जाएगी। इसके अलावा पूर्वी यूक्रेन पूरी तरह से रूस के कब्जे में चला जाएगा। यूक्रेन में ऊर्जा सेक्टर में भ्रष्टाचार का स्कैंडल युद्ध शुरू होने के बाद सबसे बड़ा पॉलिटिकल क्राइसिस है।

















