भुवनेश्वर: ओडिशा में जारी माओवादी विरोधी अभियान को एक बड़ी सफलता मिली है। पिछले कई वर्षों से कंधमाल जिले में सक्रिय छत्तीसगढ़ मूल के एक हार्डकोर माओवादी दंपति ने रविवार को राज्य पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।
सुकला जिले के रहने वाले हैं दोनों माओवादी
आत्मसमर्पण करने वाले दंपति की पहचान उंगा कल्मू उर्फ किशोर (25) और उसकी पत्नी मसे मदवी (22) के रूप में हुई है, जो दोनों छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने दक्षिणी रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) नीति शेखर और कंधमाल एसपी हरीशा बी.सी. के समक्ष जिला पुलिस कार्यालय, फुलबानी में आत्मसमर्पण किया।
कई हिंसक घटनाओं में शामिल थे दोनों माओवादी
यह दंपति वर्ष 2018 में CPI (माओवादी) संगठन से जुड़ा था और बंशधारा-घुमसार-नागाबली डिवीजन के सक्रिय सदस्य थे, जो ओडिशा–छत्तीसगढ़ सीमा पर सबसे प्रभावी माओवादी इकाइयों में से एक मानी जाती है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इनका मुख्य कार्य झारखंड से छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाले उत्तर–दक्षिण कॉरिडोर को पुनर्जीवित करना था, जो माओवादी गतिविधियों के लिए बेहद अहम माना जाता है। बीते सात वर्षों में यह दोनों कई माओवादी हिंसक घटनाओं में शामिल रहे थे।
मोहभंग के बाद दोनों ने किया आत्मसमर्पण
माओवादी संगठन की गतिविधियों से मोहभंग के कारण किया आत्मसमर्पण पुलिस के मुताबिक, दंपति ने संगठन के भीतर व्याप्त अनैतिक गतिविधियों और व्यवहार से त्रस्त होकर हथियार छोड़ने का फैसला किया। उनका कहना है कि संगठन के भीतर महिलाओं के साथ यौन शोषण, स्थानीय लोगों से जबरन वसूली, युवाओं को झूठे वादों के माध्यम से संगठन में शामिल करने जैसे कार्य लगातार बढ़ते जा रहे थे।
दोनों ने बताया कि वरिष्ठ माओवादी नेताओं द्वारा निचले स्तर के कैडरों से अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार किया जाता था तथा उन्हें जोखिमपूर्ण कामों में बिना किसी सुरक्षा के झोंक दिया जाता था। इसके अलावा, बंशधारा-घुमसार-नागाबली डिवीजन में भांग की खेती को प्रोत्साहित करना, अवैध व्यापार और चुनावी प्रक्रिया में व्यवधान डालना जैसी गतिविधियां भी बढ़ी थीं, जिससे वे गहरे रूप से निराश हो गए थे।

कंधमाल के आंतरिक जंगल क्षेत्रों में सुरक्षा बलों द्वारा लगातार दबाव, सघन कॉम्बिंग ऑपरेशन, निगरानी और बढ़ती पुलिस कार्रवाई के चलते इनका भूमिगत जीवन असहनीय होता जा रहा था। उन्होंने स्वीकार किया कि वे ओडिशा सरकार द्वारा जनजातीय विकास, बुनियादी ढांचे के निर्माण और कल्याणकारी योजनाओं से भी प्रभावित हुए, जिसने उन्हें मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया।
एसपी कंधमाल द्वारा दिए गए आश्वासन ने बढ़ाया विश्वास
कंधमाल एसपी ने पहले भी विभिन्न पोस्टरों एवं पत्रों के माध्यम से माओवादी कैडरों को आत्मसमर्पण का संदेश भेजा था। दंपति ने कहा कि इन आश्वासनों के कारण उन्हें विश्वास हुआ कि वे सुरक्षित तरीके से सामान्य जीवन में वापस लौट सकते हैं। ओडिशा सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के तहत दंपति को वित्तीय सहायता, घर बनाने के लिए भूमि, आवास सहायता, शिक्षा लाभ, व्यावसायिक प्रशिक्षण के साथ मासिक भत्ता, और समाज में सुरक्षित पुनर्वास जैसी कई सुविधाएँ प्रदान की जाएंगी। पुलिस के अनुसार, इस वर्ष क्षेत्र में कई माओवादी या तो मुठभेड़ में निष्क्रिय हुए हैं या आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जिसका श्रेय तीव्र अभियान और जनसंपर्क को जाता है।
आईजीपी नीति शेखर ने दंपति के आत्मसमर्पण का स्वागत करते हुए अन्य भटके माओवादियों से भी हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि राज्य में माओवादी उन्मूलन तक सुरक्षा अभियान और अधिक तीव्रता के साथ जारी रहेगा।
कंधमाल के जंगलों से माओवादी सामग्रियों का बड़ा डंप बरामद
इसी बीच, कंधमाल जिले में डिस्ट्रिक्ट वल्युंटरी फोर्स (डीवीएफ) की एक टीम ने रविवार को बालिगुड़ा थाना क्षेत्र के पंगुर्मिला गांव के पास जंगलों से माओवादियों का एक बड़ा डंप बरामद किया। नियमित कॉम्बिंग ऑपरेशन के दौरान टीम को जमीन में दबाई गई कई सामग्रियां मिलीं।
बरामद सामानों में कई ड्रम, मोर्टार शेल, डेटोनेटर, बूबी ट्रैप बैटरियाँ, सोलर प्लेट, फ्यूज वायर, काले पॉलिथीन शीट्स, माओवादी वर्दी, कंबल, जूते-चप्पल, तिरपाल, बर्तन, चावल, नमक, दवाइयाँ, टिफिन बॉक्स, बैटरियाँ और अन्य शिविर से जुड़ा सामान शामिल है। पुलिस ने कहा कि यह बरामदगी दर्शाती है कि माओवादी भविष्य की गतिविधियों के लिए सामग्रियाँ जमा कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि इलाके में सघन सर्च ऑपरेशन जारी है ताकि किसी भी माओवादी समूह के पुनर्गठन या आपूर्ति श्रृंखला को रोका जा सके।











