बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण, बांग्लादेश ने फांसी की सजा सुनाई। इसके बाद यह भ्रम हुआ कि क्या यह अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण है? शेख हसीना ने इस कोर्ट को फर्जी अदालत बताया है।
दरअसल, शेख हसीना को फांसी की सजा बांग्लादेश की विशेष अदालत ने सुनाई है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (International Crimes Tribunal – ICT), बांग्लादेश कहा जाता है। यह संयुक्त राष्ट्र के तहत काम करने वाला अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) या अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) नहीं है।
अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण’, बांग्लादेश
1. सजा सुनाने वाला कोर्ट: बांग्लादेश का अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (International Crimes Tribunal – ICT, Bangladesh)
2. गठन: यह न्यायाधिकरण बांग्लादेश की सरकार द्वारा 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान मानवता के खिलाफ हुए अपराधों (War Crimes) की सुनवाई के लिए घरेलू कानून (Domestic Law) के तहत स्थापित किया गया था। इसकी स्थापना वर्ष 2010 में हुई थी।
3. अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय से अंतर: यह न्यायाधिकरण बांग्लादेश की न्यायिक प्रणाली का हिस्सा है। इसका संयुक्त राष्ट्र या हेग (Hague) में स्थित अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय से कोई सीधा संबंध नहीं है ।
यह बांग्लादेश के घरेलू कानून के तहत बना एक विशेष न्यायालय है, जिसके नाम में “अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण” जुड़ा है, लेकिन यह कोई अंतर्राष्ट्रीय संस्था नहीं है। इसी ने शेख हसीना को फांसी की सजा सुनाई है।
भारत की प्रतिक्रिया
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया दी है। बयान में कहा गया कि भारत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के संबंध में “बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण” द्वारा सुनाए गए फैसले पर ध्यान दिया है। एक निकट पड़ोसी होने के नाते, भारत बांग्लादेश के लोगों के सर्वोत्तम हितों, जिसमें उनके देश में शांति, लोकतंत्र, समावेशिता और स्थिरता शामिल है, के लिए प्रतिबद्ध है। हम इस दिशा में सभी हितधारकों के साथ हमेशा रचनात्मक रूप से जुड़े रहेंगे।

















