भोपाल: पाञ्चजन्य के ‘मध्य प्रदेश सुशासन संवाद 2.0’ में डीबीजी टेक्नोलॉजी एवं विनशार्प इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रबंधक निदेशक अभिषेक गर्ग का कहना है कि बड़ी अर्थव्यवस्था और कमजोर अर्थव्यवस्था का संघर्ष सदियों से चला आ रहा है। भारत एक विकासशील देशों की श्रेणी में है। हमको WTO में वो लाभ नहीं मिल रहे थे जो मिलनी चाहिए थी।
उन्होंने कहा कि हम दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। अमेरिका के पैदा होने से सालों पहले हमारे यहां लोकतंत्र चल रहा था। पूरी दुनिया के लिए द्विपक्षीय व्यापार ठीक नहीं है क्योंकि हमेशा कमजोर और बड़ी इकॉनमी में बड़ी इकॉनमी जीतेगी। गर्ग से ट्रंप के टैरिफ को लेकर सवाल पूछा गया था। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता हमेशा अच्छी होती है। हमने कभी मानवता की ग्लोबलाइजेशन की बात क्यों नहीं की? हमने ग्लोबल विलेज की मंडी की बात की। अगर आप वैश्वीकरण की बात करते हैं तो सीमाएं खोलिएं।
भारत के पास सबसे ज्यादा स्किल मैनपावर है। हमारे पास सबसे ज्यादा युवा हैं। आप पर टैरिफ इसलिए लगाया जा रहा है क्योंकि आप अमेरिकन नहीं है। यह तो ग्लोबलाइजेशन की बात नहीं है।
उन्होंने कहा कि ओमान के रास्ते हमारा समुद्र व्यापार था। हम मैन्युफेक्चरर थे। रोमन सामाज्य के सबसे ज्यादा सिक्के हिंदुस्तान में मिले हैं। क्योंकि माल गया और उसके बदल सोना- चांदी आया। इसलिए हम सोने की चिड़िया थे। आज सारी दुनिया भारत की मिसाइल खरीद रही है। उन्होंने कहा कि भारत 10 साल में दुनिया की दूसरी मोबाइल मैन्यूफेक्चरिंग मार्केट बना है। पहले औद्योगिक क्रांति हुई और उसके बाद मशीनों में इनोवेशन आया। कंपास की खोज भारत में हुई है। जब आवश्यकता थी तभी आविष्कार हुआ।
अभिषेक गर्ग ने कहा कि HIB वीजा पर प्रतिबंध लगाने से भारत का नुकसान है। यह हमारे सर्विस एक्सपोर्ट को बुरी तरह से प्रभावित करेगा।















