भोपाल: पाञ्चजन्य ‘मध्य प्रदेश: सुशासन संवाद 2.0’ के दूसरे सत्र में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके ने जन स्वास्थ्य पर अपने विचार रखें। उन्होंने कहा कि मैं राजनीति में आऊंगी कभी सोचा नहीं था। साधारण से परिवार मे जन्म हुआ। बचपन से ही माता-पिता नहीं रहे। बहनों ने मुझे पाला और पढ़ाया। जब मैं पढ़ रही थी तो 8 किलोमीटर पैदल जाकर 8वीं तक पढ़ी। स्कूल साइकिल से जाती थी। पढ़ते-पढ़ते संघ के संपर्क में आई और मार्गदर्शन मिला व राष्ट्र सेविका समिति से जुड़ी। 90 के दशक से राष्ट्र सेविका समिति में काम किया और शिशु मंदिर में शिक्षिका बनीं।

वरिष्ठों के मार्गदर्शन पर काम किया। मंत्री होते हुए भी शिशु मंदिर में पढ़ा रही हूं। कितना भी व्यस्त रहूं आज भी सप्ताह में एक दिन बच्चों के साथ अनुभव शेयर करती हूं। मैं गांव वालों के कहने पर राजनीति में आई और 1999 में सरपंच बनीं और काम किया। शिक्षा, सफाई और महिलाओं के लिए काम किया और राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार मिला। तब से महिलाओं के लिए कार्य कर रही हूं। उन्होंने कहा कि 2017 में मुझे राज्यसभा भेजा गया। मैंने कभी कल्पना नहीं की थी कि बीजेपी मुझे राज्यसभा भेजेगी।
उन्होंने कहा कि भूजल जिस तरह से गिर रहा है उससे हम सभी चिंतित थे। हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हर घर जल से पानी पहुंचा रहे हैं। 2027 तक बड़े डैम के माध्यम से भी पानी पहुंचाएंगे। पीएम मोदी जी ने भी आवाह्न किया है कि एक पेड़ मां के नाम से लगाएं और हम सभी वृक्षारोपण कर रहे हैं। जब उनसे पानी की टेस्टिंग के लिए मध्य प्रदेश सरकार क्या कर रही है पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हर जिले में पानी के परीक्षण के लिए प्रयोगशाला बनाया गया है। उसके बाद ही जनता को पानी उपलब्ध कराया जाता है।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके ने कहा कि एक वक्त ऐसा था कि जब मैं बड़ी परेशान थी राजनीति करूं या फिर खेती। ऐसी परिस्थिति में मेरे सामने काफी चुनौती थी। पति की मृत्यु हो चुकी थी और मुझे परिवार संभालना था। ऐसी परिस्थितियों से मैं निकली हूं। अब जब नाती-पोती हो गए हैं तो अब घर से फ्री हूं और राजनीति कर सकती हूं। पहले महिलाओं की क्षमता को समाज में कम आंका जाता था लेकिन बीजेपी ने मेरे पर भरोसा जताया।














