गत 7 नवंबर को नोएडा में प्रख्यात नाटककार, नाट्य-निर्देशक और आईएएस अधिकारी रहे डॉ. दयाप्रकाश सिन्हा का निधन हो गया। 90 वर्षीय डॉ. सिन्हा ने भाजपा के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया था।
साहित्य कला परिषद, दिल्ली प्रशासन के सचिव, भारतीय उच्चायुक्त, फिजी के प्रथम सांस्कृतिक सचिव, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी व ललित कला अकादमी के अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ के निदेशक जैसे अनेक उच्च पदों पर रहने के पश्चात 1993 में वे भारत भवन, भोपाल के निदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
नाटककार के रूप में वे ‘सम्राट अशोक’, ‘सीढ़ियां’, ‘कथा एक कंस की’, ‘इतिहास चक्र और रक्त अभिषेक’ जैसे हिंदी नाटकों के लिए जाने जाते थे। उनकी नाट्य कृतियां 50 वर्ष से लगातार प्रकाशित और मंचित होती रही हैं और कई भाषाओं में अनूदित भी हुई हैं। नाटक ‘सम्राट अशोक’ के लिए उन्हें 2021 का साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
डाॅ. सिन्हा इतिहास के पुनर्लेखन के समर्थक रहे। उनका नाटक ‘इतिहास’ एक प्रकार से इतिहास पुनर्लेखन ही है। नाटक के क्षेत्र में यह एक साहसिक क़दम साबित हुआ। इस नाटक में 1857 से लेकर 1947 के बीच के ऐतिहासिक तथ्यों को बिना लाग-लपेट के ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया। ऐसे सक्षम और साहसी नाटककार को भावभीनी श्रद्धांजलि। -नरेश शांडिल्य

















