इंटरनेशनल ओलंपिक्स कमिटी ने महिलाओं की खेलकूद प्रतिस्पर्धाओं में महिलाओं को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। अब इतने विवादों के बाद अब एक ऐसा वर्किंग समूह बनाया गया है, जो महिलाओं के खेलकूद के संरक्षण को लेकर कार्य करेगा। बीबीसी के अनुसार आईओसी ने कहा कि इस विषय पर संवाद जारी रखने के लिए यह समीक्षा की जा रही है, हालांकि अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। फिर भी यह संभावना व्यक्त की जा रही है कि आईओसी महिलाओं के खेलों में ट्रांस वुमन अर्थात जैविक पुरुषों की भागीदारी को प्रतिबंधित करेगी।
ऐसी संभावना इसलिए व्यक्त की जा रही है, क्योंकि महिलाओं के खेलों में पुरुषों अर्थात ट्रांस वुमन के आने के बाद महिला खिलाड़ियों को किस प्रकार चोटों का सामना करना पड़ रहा है, उसे लेकर या शायद और भी मुद्दों को लेकर इसके मेडिकल चीफ द्वारा प्रेज़न्टैशन के बाद सूत्रों का कहना है कि वर्ष 2026 में प्रतिबंध लग सकता है।
ट्रांसवुमन को लेकर विवाद काफी थे
महिलाओं के खेलों मे ट्रांसवुमन अर्थात जैविक पुरुषों के साथ खेलने को लेकर विवाद काफी दिनों से था और तमाम खिलाड़ियों द्वारा यह मांग की जा रही थी कि ऐसे लोगों को, जो या तो सर्जरी या फिर हार्मोनल ट्रीटमेंट लेकर महिलाओं के खेलों में भाग लेते हैं, उनपर रोक लगाई जाए।
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ये नियम बनाये जाएँ कि महिलाओं के खेलकूद में केवल महिलाएं ही प्रतिभागी हों। यह बहुत ही अचम्भित करने वाली बात है कि यह मांग की जा रही है कि महिलाओं के खेलकूद में केवल महिलाएं ही हों और महिला भेष में पुरुष न हों।
बीबीसी ने टाइम्स की रिपोर्ट के हवाले से लिखा पिछले सप्ताह आईओसी की मेडिकल और साइंटिफिक निदेशक डॉक्टर जेन थोर्नटन ने अपने सदस्यों को यह बताया था कि संस्थान इस दिशा में कदम उठाने जा रहा है। और उन्होंने यह बताया था कि विज्ञान आधारित समीक्षा से यह पता चला है कि जो खिलाड़ी जैविक पुरुष होते हिं, उनमें टेस्टोंटेरें का स्तर कम करने के बाद भी शारीरिक ताकत महिलाओं से अधिक होती है।
ब्लैंकेट बैन
ऐसा भी कहा जा रहा है कि इटली में फरवरी में होने वाले विंटर ओलम्पिक्स के लिए ब्लैंकेट बैन लगाया जा सकता है। महिलाओं के साथ जैविक पुरुषों को शामिल करने से महिलाओं के प्रति शारीरिक हिंसा के मामले कई खेलों में बढ़ गए थे, जैसे बॉलीवाल, फुटबॉल आदि। और कई खेलों में उन्हें शारीरिक शक्ति के आधार पर फायदा मिलता था। पिछले ही वर्ष प्रकाशित यूएन की एक रिपोर्ट के अनुसार ट्रांसजेंडर्स प्रतिभागियों के कारण महिला खिलाडियों को 900 मैडल्स से हाथ धोना पड़ा था।
अगस्त 2024 में अध्ययन किया गया था और रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी, जिसका शीर्षक था Violence against women and girls in sports,”। इस रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2024 तक 400 से ज्यादा महिला प्रतिस्पर्धाओं में 600 से ज्यादा मेडल्स इन ट्रांसवीमेन के हाथों गंवाने पड़े थे। और इसमें यह भी था कि कैसे कई खेलों में महिलाएं चोटिल हुई थीं। हालांकि इसमें पिछले ओलंपिक्स में मुक्केबाजी में इमेन खलीफा वाला मामला भी लोग जोड़ रहे हैं, मगर वह मामला ट्रांसवुमन का नहीं है। हाँ, यह अवश्य है कि अब इनके लिए सेक्स स्क्रीनिंग आवश्यक हो गयी है, और जिसके कारण अब केवल महिलाएं ही महिलाओं की मुक्केबाजी प्रतिस्पर्धा में भाग ले सकती हैं।
वर्ल्ड एथलेटिक्स और वर्ल्ड बॉक्सिंग ने जेनेटिक सेक्स स्क्रीनिंग आवश्यक कर दी है। इमेन खलीफा को लेकर जो विवाद हुआ था, उसके कारण यह आवश्यक हो रहा था कि महिलाओं की प्रतिस्पर्धा में महिलाओं की ही प्रतिभागिता पर जोर दिया जाए और अब आईओसी भी ऐसे नियमों को बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिनसे महिलाओं के खेलों की और उनमें महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।













