नई दिल्ली, (हि.स.)। दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर शनिवार को कस्टम विभाग की एयर इंटेलिजेंस यूनिट (एआईयू) ने एक ऐसी महिला को गिरफ्तार किया, जिसने जांच से बचने के लिए खुद को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की अधिकारी बताने की कोशिश की लेकिन एआईयू की सतर्कता से उसकी चालाकी पकड़ी गई। महिला के पास से 11.350 किलो हाइड्रोपोनिक वीड (उच्च गुणवत्ता की मादक सामग्री) बरामद हुई। जिसे उसने बड़ी सफाई से एनआईए के निशान वाले बैगों में छिपा रखा था।
एआईयू के एक अधिकारी ने मंगलवार काे बताया कि आठ नवंबर को बैंकॉक से दिल्ली पहुंची एयर इंडिया की फ्लाइट नंबर एआई-2335 से एक भारतीय महिला यात्री उतरी। एपीआईएस प्रोफाइलिंग के आधार पर उसपर पहले से ही नजर रखी जा रही थी। जैसे ही वह फ्लाइट गेट से बाहर आई, एयर इंटेलिजेंस यूनिट की टीम ने उसे डिस्क्रीट सर्विलांस (गुप्त निगरानी) में ले लिया।
वॉशरूम में पहनी एनआईए की जैकेट
पुलिस सूत्रों के अनुसार, महिला को टर्मिनल के वॉशरूम में कपड़े बदलते हुए देखा गया। उसने वहां अपनी काली जैकेट उतारकर ग्रे रंग की जैकेट पहन ली, जिस पर राष्ट्रीय चिन्ह और एनआईए लिखा था। इसका मकसद था खुद को सरकारी अफसर दिखाकर कस्टम जांच से बचना।
एक्स-रे जांच में दिखी संदिग्ध वस्तु
अधिकारी ने बताया कि महिला जब ग्रीन चैनल पार करने लगी, तो एआईयू अधिकारियों ने उसे रोक लिया। एक्स-रे जांच में उसके सामान में संदिग्ध चीजें दिखाई दीं। पूछताछ में उसने खुद को एनआईए अधिकारी बताते हुए बैग खोलने से इनकार कर दिया। जब टीम ने सख्ती दिखाई, तो उसने एक पहचान पत्र दिखाया जो एनआईए का बताया गया। सत्यापन करने पर वह आईडी कार्ड फर्जी निकला। इधर अधिकारियों ने बैग खोला तो अंदर से छोटे-छोटे कपड़े के थैले मिले, जिन पर एनआईए और राष्ट्रीय प्रतीक अंकित थे। इन थैलों में 20 वैक्यूम सील पैकेट मिले, जिनमें हाइड्रोपोनिक वीड (एक प्रकार की उच्च श्रेणी की गांजा किस्म) भरी हुई थी। बरामद कुल मात्रा 11.350 किलोग्राम बताई गई है।
सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी
कस्टम विभाग ने तुरंत महिला को एनडीपीएस एक्ट, 1985 के तहत गिरफ्तार कर लिया। कस्टम विभाग ने बताया कि यह मामला न केवल ड्रग्स तस्करी का है बल्कि सरकारी एजेंसी की फर्जी पहचान का दुरुपयोग कर सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने का गंभीर अपराध भी है। फिलहाल महिला से पूछताछ जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि वह किस नेटवर्क के लिए काम कर रही थी तथा ड्रग्स कहां भेजी जानी थीं।

















