भारत के दो छोर पर मौजूद दो कट्टर इस्लामवादी देश कभी एक दूसरे की सूरत नहीं देखते थे, लेकिन आज इस्लाम के नाम पर कट्टर सोच की राह पर चलते हुए एक ही थाली में खाते दिख रहे हैं। ये दो देश हैं पाकिस्तान और बांग्लादेश। 1971 में भारत के सैनिकों की शूरवीरता से अस्तित्व में आए उस देश ने अधिकांशत: भारत के इस योगदान और कदम को सराहा ही है। लेकिन अब जो लोग वहां सत्ता में अंतरिम सरकार के नाम पर एक नोबुल सम्मान विजेता को आगे रखकर बैठे हैं, वे घारे इस्लामवादी होने के चलते भारत और हिन्दुओं के विरुद्ध जितने षड्यंत्र रच सकते हैं, रच रहे हैं। पाकिस्तान की भारत के प्रति ईर्ष्या जगजाहिर है ही, वह पहले भी बांग्लादेश का कंधा इस्तेमाल करके भारत विरोधी कृत्यों को अंजाम दे चुका है। शेख हसीना की पिछली सरकार ने विकास की चिंता करते हुए भारत से संबंधों को विशेष महत्व दिया था इसलिए पाकिस्तान वहां से षड्यंत्र नहीं रच पा रहा था। अब ‘छात्र आंदोलन’ के बाद अगस्त 2024 से वहां बैठी यूनुस सरकार ने जिन्ना के देश के लिए अपने दरवाजे इतने खुले रखे हैं कि आएदिन दोनों के बीच मंत्रणा होती है, दोनों तरफ के सैन्य अधिकारी एक दूसरे के यहां जाकर ‘रक्षा सहयोग’ पर चर्चाएं करते हैं। कल पाकिस्तान का नेवी चीफ नवीद अशरफ बांग्लादेश के सेना प्रमुख वकारुज्जमां से ‘मंत्रणा’ करने मिला है। विशेषज्ञों को संदेह है कि आखिर सेना के स्तर पर इतना आदान—प्रदान करने के केन्द्र में कहीं भारत तो नहीं है!
जैसे संकेत मिल रहे हैं, जिन्ना के देश और बांग्लादेश के सैन्य रिश्तों में हाल में आई तेजी हैरान करती है। गत कुछ महीनों के अंतर पर पाकिस्तान के दोनों शीर्ष सैन्य अधिकारी, जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन और नेवी चीफ, बांग्लादेश की राजधानी ढाका जा चुके हैं और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार इन दौरों को खुले तौर पर स्वीकार रही है। शेख हसीना द्वारा लगाए गए अमेरिका समर्थित साजिश के आरोपों, अमेरिकी यूएसएड अधिकारी के दौरे और सेना एवं सत्तापलट के आरोपों के बीच पाकिस्तान-बांग्लादेश नजदीकी के संकेत भारत के लिए रणनीतिक चिंता का विषय बन सकते हैं।

1971 के बाद पहली बार पाकिस्तानी सेना बांग्लादेश को प्रशिक्षण देने के लिए फरवरी 2025 में वहां गई। पहले चरण में बांग्लादेश सेना को आर्मी ट्रेनिंग एंड डॉक्ट्रिन कमांड में ट्रेनिंग दी गई। फिर सभी दस सैन्य कमांड्स में ट्रेनिंग दी गई। कराची पोर्ट और बंगाल की खाड़ी में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी नौसेना का संयुक्त अभ्यास फिर से शुरू हुआ, जिसमें बांग्लादेश 15 साल बाद शामिल हुआ था। पाकिस्तान के नेवी चीफ (एडमिरल नवीद अशरफ) और जॉइंट चीफ (जनरल मिर्जा) जैसे अधिकारियों के ढाका दौरे पर आ चुके हैं। पिछले 11 महीनों में पाकिस्तान की सेना या सरकार का सातवां बड़ा दौरा हो चुका है।
इधर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने पाकिस्तान की कथित शह पर भारत विरोधी फैसलों की झड़ी लगाई हुई है। इन हालात में भारत की सैन्य खुफिया टीमों का हाल में सीमा क्षेत्रों का दौरा करना स्वाभाविक ही था। भारतीय खुफिया एजेंसियों ने खुलासा किया है कि ढाका में हुई पाकिस्तानी और बांग्लादेश वायु सेना (पीएएफ-बीएएफ) की गुप्त बैठकों में ड्रोन युद्ध, साइबर हमले, अंतरिक्ष अभियान और बांग्लादेश में सत्ता बदलने जैसी गहन रणनीतिक साजिशें शामिल थीं, जो कुछ विशेषज्ञों को भारत को घेरने की योजना का हिस्सा नज़र आती हैं।
बांग्लादेश ने पाकिस्तान से छोटे हथियार, गोला-बारूद, युद्ध सामग्री और संभावित जेएफ-17 थंडर फाइटर जेट लेने का भी प्रस्ताव रखा है, जिससे चीन-पाकिस्तान के संयुक्त प्रयासों की भूमिका और बढ़ जाती है। दोनों इस्लामी देशों के बीच बढ़ती यह सैन्य साझेदारी संकेत देती है कि पाकिस्तान, चीन और अब बांग्लादेश दक्षिण एशिया में अस्तित्व में आने वाले शक्ति संतुलन को भारत के खिलाफ मोड़ने में लगे हैं।
अंदेशा है कि सैन्य प्रशिक्षण के जरिए बांग्लादेश, भारतीय सैन्य रणनीति और गुप्त सूचना पाकिस्तान तक पहुंचा सकता है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। संयुक्त नौसैनिक अभ्यास, खुफिया गतिविधियां और सैन्य तकनीकी साझेदारी भारत की पूर्वी सीमाओं और बंगाल की खाड़ी में दबाव बढ़ाएंगी।

इन हालात के आलोक में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अमेरिका पर उनकी सरकार गिराने की साजिश का आरोप लगाया है। गत दिनों संपन्न यूएसएड अधिकारियों के ढाका व इस्लामाबाद दौरे को इसी नजरिये से देखा जा रहा है, जिससे क्षेत्रीय संबंधों का समीकरण और जटिल होता दिख रहा है। बांग्लादेश की वर्तमान राजनीति में अस्थिरता और सैन्य प्रभाव की बढ़ती भूमिका न केवल अमेरिका, बल्कि पाकिस्तान के लिए भी भारत विरोधी कृत्यों को अंजाम देने का एक मौका जैसा बन रही है।
हालांकि बांग्लादेश और पाकिस्तान ने खुले तौर पर तो भारत के खिलाफ किसी साजिश की बात नहीं बोली है, लेकिन खुफिया रिपोर्ट, सैन्य सूचनाओं के आदान-प्रदान, हथियारों की खरीदारी, और साथ में भारत विरोधी नीति से यह संभावना और प्रगाढ़ हो जाती है कि दोनों देश रणनीतिक रूप से भारत को घेरने के लिए एकजुट हो सकते हैं। पाकिस्तान की बदनाम खुफिया एजेंसी आईएसआई की हरकतें और बांग्लादेश में उसकी बड़ रही भूमिका इस ओर इशारा करती है कि आने वाले समय में भारत को पूर्वी मोर्चे पर नई चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा।
पाकिस्तान-बांग्लादेश संबंधों में हाल में आई बढ़ोतरी और सैन्य सहयोग भारत के लिए स्पष्ट तौर पर एक चिंता का विषय है ही, खासकर तब जब बांग्लादेश में सत्तापलट और सेना की भूमिका प्रमुख हो गई है। दोनों देशों के बीच, रणनीतिक साझेदारी, हथियारों के सौदे, संयुक्त सैन्य अभ्यास और गुप्तचरी की सूचनाओं के आदान—प्रदान का रुझान भारत के खिलाफ नए मोर्चे खुलने की संभावनाएं दिखा रहा है। भारत को पूर्वी दिशा में अपनी रणनीति की फिर से समीक्षा करने और निगरानी बढ़ाने की जरूरत है ताकि किसी भी संभावित खतरे को पनपने से पहले ही नष्ट किया जा सके।

















