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अर्थव्यवस्था : त्योहार से बढ़ा व्यापार

इस वर्ष केंद्र सरकार ने अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए त्योहारी मौसम से ठीक पहले कई कदम उठाए। इस कारण खरीददारी के सारे कीर्तिमान टूट गए। केवल दीपावली में लगभग 5.4 लाख करोड़ रुपए का कारोबार हुआ। एक दिन में 6,00,000 वाहन बिके

Written byप्रहलाद सबनानीप्रहलाद सबनानी
Nov 6, 2025, 11:49 am IST
inस्वदेशी, भारत, विश्लेषण, बिजनेस
दीपावली से बढ़ी बाजार की रौनक

दीपावली से बढ़ी बाजार की रौनक

भारत में धनतेरस एवं दीपावली के शुभ अवसर पर हिंदुओं द्वारा विभिन्न उत्पादों, विशेष रूप से स्वर्ण एवं चांदी के आभूषणों की खरीद को शुभ माना जाता है। परंतु इस वर्ष तो केंद्र सरकार द्वारा लिए गए कुछ निर्णयों के चलते भारतीय बाजार में सोने एवं चांदी सहित विभिन्न उत्पादों की बिक्री में बेतहाशा वृद्धि दर्ज हुई।

प्रहलाद सबनानी
सेवानिवृत्त उपमहाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक

केंद्र सरकार द्वारा आयकर योग्य राशि की सीमा को बढ़ाकर 12 लाख कर दिया गया है। यदि आज किसी नागरिक की आय 12 लाख रुपए तक प्रतिवर्ष है तो उसकी आय पर आयकर नहीं लगने वाला। साथ ही, वस्तु एवं सेवा कर की दरों को भी तर्कसंगत बनाया गया है जिसे जी.एस.टी.-2.0 का नाम दिया गया है। अब 95 प्रतिशत से अधिक उत्पादों पर केवल 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दर से ही वस्तु एवं सेवा कर लागू है। पूर्व में 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत एवं 28 प्रतिशत की दरें लागू होती थीं। अब 12 प्रतिशत एवं 28 प्रतिशत की दरों को समाप्त कर दिया गया है। इससे उपभोक्ताओं को वस्तु एवं सेवा कर की दरों में लगभग 10 प्रतिशत तक का लाभ मिला है। चारपहिया वाहनों पर तो लगभग 60-70,000 रुपए प्रति वाहन तक की बचत हुई है। इस तरह, इस वर्ष दीपावली के त्योहारी मौसम में भारतीय अर्थव्यवस्था को बढ़े हुए उपभोग का सहारा मिला है।

भारतीय इतिहास में दीपावली के दिनों में इस वर्ष सबसे अधिक कारोबार हुआ है। कनफेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के एक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत के 35 नगरों के वितरण केंद्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस वर्ष लगभग दीपावली के अवसर पर 5.4 लाख करोड़ रुपए का व्यापार हुआ है। 2021 में इसी दाैरान 1.25 लाख करोड़ रुपए, 2022 में 2.50 लाख करोड़ रुपए, 2023 में 3.75 लाख करोड़ रुपए एवं 2024 में 4.25 लाख करोड़ रुपए का व्यापार हुआ था। गोवर्धन पूजा, भाई दूज, छठ एवं तुलसी विवाह आदि पर्वों पर भी अच्छी खरीददारी हुई। अनुमान है कि इन सभी त्योहारों के दौरान लगभग 80,000 करोड़ रुपए का व्यापार हुआ। इस प्रकार इस वर्ष भारत में इस उत्सव काल में कुल व्यापार का आंकड़ा 6 लाख करोड़ रुपए से अधिक होने की प्रबल संभावना है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में हुए व्यापार के आंकड़े की तुलना में 41 प्रतिशत अधिक है।

स्वदेशी की चाह

इस वर्ष भारत के नागरिकों में स्वदेशी उत्पाद खरीदने की होड़ सी रही है। इसी प्रकार एक अनुमान के अनुसार, इस वर्ष धनतेरस के दौरान सोने-चांदी के गहनों, सिक्कों एवं अन्य वस्तुओं के कारोबार का स्तर भी 60,000 करोड़ रुपए के आसपास रहा। बाजार में हालांकि इस वर्ष सोने एवं चांदी के भाव आसमान छू रहे हैं। 2024 की दीपावली पर सोने का भाव लगभग 80,000 रुपए प्रति 10 ग्राम था, जो इस वर्ष बढ़कर 1,30,000 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। अर्थात् लगभग 62 प्रतिशत अधिक। चांदी का भाव भी 2024 में 98,000 रुपए प्रति किलोग्राम था, जो इस वर्ष बढ़कर 1,80,000 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया है। अर्थात् लगभग 83 प्रतिशत अधिक। एक अन्य अनुमान के अनुसार, दीपावली के इस त्योहारी मौसम में भारत में स्वर्ण एवं चांदी के आभूषणों की कुल मिलाकर 1.35 लाख करोड़ रुपए की बिक्री हुई है। भारतीय बाजारों में लगभग 46 टन सोने की बिक्री हुई है। दीपावली के पावन पर्व पर 6,00,000 वाहन एक दिन में बिके हैं। यह भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शा रहा है। इससे यह भी सिद्ध हो रहा है कि है कि भारतीय अर्थव्यवस्था बहुत ही तेज गति से आगे बढ़ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कह रहे हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था ‘डेड’ है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था में लगातार तेज हो रही विकास दर अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों को झुठला रही है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 की प्रथम तिमाही, अप्रैल-जून 2025 में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.3 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर हासिल की है। जबकि, द्वितीय तिमाही जुलाई-सितंबर 2025 में एवं तृतीय तिमाही अक्तूबर-दिसंबर 2025 में भी भारतीय अर्थव्यवस्था के रिकार्ड स्तर पर आर्थिक विकास दर हासिल करने की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं। भारत में द्वितीय तिमाही में प्रारंभ हुए त्योहारी मौसम (दुर्गा पूजा, दशहरा, धनतेरस एवं दीपावली आदि) में विभिन्न उत्पादों की रिकार्ड वृद्धि दर्ज होती हुई दिखाई दी है। यह प्रवाह तीसरी तिमाही में भी जारी रहते हुए 25 दिसंबर (क्रिसमस) एवं 31 दिसंबर (नव वर्ष) तक बने रहने की संभावना है। साथ ही, शादियों का मौसम भी आने वाला है। इस मौसम में भारत में लाखों की संख्या में शादियां संपन्न होती हैं। शादियों के इस मौसम में विभिन्न उत्पादों (स्वर्ण, चांदी, कार, टीवी, रेफ्रीजरेटर, एसी आदि) की मांग में बेतहाशा वृद्धि दर्ज होती है। इस बीच भारत में धार्मिक पर्यटन भी अपने उच्चत्तम स्तर पर पहुंच गया है। अयोध्या, वाराणसी, चारधाम, वैष्णो देवी, महाकाल मंदिर, तिरुपति बालाजी, मीनाक्षी मंदिर आदि में लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। भारत में लगातार बढ़ रहे धार्मिक पर्यटन से भी उत्पादों का उपभोग बढ़ रहा है, जो अर्थव्यवस्था को गति देने में सहायक हो रहा है एवं रोजगार के लाखों नए अवसर निर्मित कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने की सराहना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अक्तूबर को ‘मन की बात’ की 127वीं कड़ी में देशवासियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने त्योहारी मौसम, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, भारतीय संस्कृति और देश के युवा नेतृत्व पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि इस समय देश में दीपावली और छठ पूजा को लेकर उत्साह का माहौल है। भारत के लोगों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और जी.एस.टी. बचत उत्सव को लेकर उत्साह दिखाया है। उन्होंने घरेलू उत्पादों की खरीद और खाद्य तेल की खपत में कमी के लिए लोगों की सकारात्मक प्रतिक्रिया की सराहना की।

भारत बना निवेश-केन्द्र

भारत में अब देश में ही निर्मित उत्पादों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इस कार्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वदेशी अपनाने की अपील पर भारतीय नागरिक अपना भरपूर सहयोग कर रहे हैं। भारत में ही निर्मित उत्पादों के उपभोग का स्तर सकल घरेलू उत्पाद के 60-70 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसी कारण से भारत को घरेलू उपभोग आधारित अर्थव्यवस्था कहा जा रहा है। भारत में आंतरिक उपभोग के लगातार मजबूत होने के चलते भारत अब दुनिया के कई देशों के निवेशकों के लिए निवेश के केंद्र के रूप में उभर रहा है, क्योंकि भारत की 140 करोड़ आबादी इन निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। भारत में ही निर्मित किए जाने वाले उत्पादों के लिए भारत में ही बहुत बड़ा बाजार उन्हें उपलब्ध है। आगे आने वाले समय में भारत के वित्तीय एवं बैंकिंग क्षेत्र में 50,000 करोड़ रुपए से अधिक का विदेशी निवेश भारत में आने जा रहा है। अमेरिकी कंपनी ऐपल अपनी उत्पादन इकाई भारत ला रही है।

भारत के विशाल बाजार को देखते हुए आज विश्व के कई देश भारत के साथ द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौता करने के लिए लालायित दिखाई दे रहे हैं। भारत का अभी हाल ही में ओमान, कतर, यूनाइटेड किंगडम और यूरोप के चार अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौता संपन्न हुआ है। यूरोपीय संघ के साथ भी द्विपक्षीय व्यापार समझौते की वार्ता आगे बढ़ रही है। भारत और अमेरिका के बीच भी द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौता होने की प्रबल संभावना दिखने लगी है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन भी शीघ्र भारत आ रहे हैं। भारत अभी रूस से भारी मात्रा में कच्चे तेल का आयात कर रहा है एवं रूस को भारत से निर्यात होने वाले उत्पादों की मात्रा अभी बहुत कम है। इस तरह भारत का रूस के साथ व्यापार घाटा बहुत अधिक हो गया है। चीन के साथ भी भारत का व्यापार घाटा बहुत अधिक है, जिसे कम करने के लिए चीन के साथ भी भारत की बात चल रही है।

कुल मिलाकर आगे आने वाले समय में भारत की आर्थिक विकास दर के बढ़ने की प्रबल संभावना है, जो 10 प्रतिशत प्रतिवर्ष तक के आंकड़े को भी छू सकती है।

Topics: धार्मिक पर्यटनपाञ्चजन्य विशेषftaअर्थव्यवस्थातिरुपति बालाजीeconomyजी.एस.टी.चारधामभारत का व्यापार घाटाप्रहलाद सबनानीमहाकाल मंदिरवाहन बिक्रीदीपावलीSwadeshi/Indigenousव्यापारस्वर्ण एवं चांदीस्वदेशीआर्थिक विकास दर
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