पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक सरकारी स्कूल पर कट्टर जिहादी गुट तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकियों ने कब्जा करने के बाद वहां लगे पाकिस्तान बनाने वाले मोहम्मद अली जिन्ना की फोटो के साथ जमकर जूतमपैजार की। जिन्ना का अपमान करने की गरज से उन जिहादियों ने उसकी तस्वीर पर जूते मारकर लानतें भेजीं। जिन्ना के साथ ही जिहादियों ने वहां लगी अल्लामा इकबाल की फोटो को भी नहीं निशाना बनाया। इकबाल की तस्वीर को भी तोड़ा—फोड़ा गया। यानी जिन्ना और इकबाल की जितनी बेइज्जती वे कर सकते थे, उतनी की। इस घटना ने आम पाकिस्तानियों को और नेताओं को हैरत में डाल दिया है।
स्थानीय मीडिया में आई खबरों के अनुसार, यह मामला खैबर पख्तूनख्वा के उत्तरी वजीरिस्तान जिले के एक स्कूल में दो दिन पहले का है। तब कुछ सशस्त्र टीटीपी जिहादियों ने स्कूल में घुसकर पहले शिक्षकों और बच्चों को बाहर निकाला, फिर इमारत की दीवारों पर लगे पोस्टरों व चित्रों को फाड़ा। इनमें मोहम्मद अली जिन्ना और अल्लामा इकबाल की बड़ी सी तस्वीरें खास जगह पर लटकी दिखीं। स्थानीय लोगों ने बताया कि जिहादियों ने जिन्ना की तस्वीर को अपमानित करते हुए उस पर जूते मारे और गालियां दीं। इस कृत्य का उन्होंने खुश होकर वीडियो भी बनाया, जिसे बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा भी किया।
सब जानते हैं कि जिन्ना और इकबाल एक प्रकार से पाकिस्तान के राष्ट्रीय प्रतीक हो चुके हैं। जिन्ना को देश का संस्थापक—”क़ायदे-आजम” कहा जाता है, जबकि अल्लामा इकबाल को पाकिस्तान की सोच को गढ़ने वाला कहा जाता है। इनकी तस्वीरों पर जूतों से हमला करना सिर्फ इन दोनों का ही अपमान नहीं, बल्कि यह एक प्रकार से पाकिस्तानी की बुनियाद पर आघात करने जैसा है। जानकार मानते हैं कि टीटीपी जैसे कट्टरपंथी गुट लंबे समय से पाकिस्तान के राज्य-प्रतीकों और उसकी आधुनिक राष्ट्र की परिकल्पना से वैचारिक दृष्टि से असहमत हैं।
टीटीपी का वैचारिक सिद्धांत है चरम इस्लामी शासन की स्थापना, जो जिन्ना के राजनीतिक विचारों से मेल नहीं खाता। इस हमले को उसी असहजता की एक प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति माना जा रहा है।
इस घटना के बाद सुरक्षा बलों ने स्कूल को वापस अपने नियंत्रण में ले लिया। खैबर पख्तूनख्वा के गृह विभाग ने बयान जारी किया और कहा कि स्थिति अब काबू में है और जिहादियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। अभी तक किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन खुफिया एजेंसियों को क्षेत्र में बढ़ती आतंकी गतिविधियों के खिलाफ सख्त उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं।
उधर पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा आईएसपीआर ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है और कहा है कि टीटीपी द्वारा देश के संस्थापकों का अपमान ‘देश की अखंडता पर हमला’ है, इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर इस घटना के विरोध में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने में आई हैं। कई लोगों ने इसे देश की वैचारिक सोच पर हमला बताया है। कुछ पत्रकारों और शिक्षाविदों ने कहा है कि यह हमला केवल एक स्कूल या तस्वीर पर नहीं, बल्कि उस विचार पर है जिसने पाकिस्तान को पैदा किया है। इधर कुछ मजहबी संगठनों ने टीटीपी की कार्रवाई को इस्लाम के नाम पर धब्बा बताते हुए कहा कि इस तरह की हिंसा से इस्लाम की कायदों की तौहीन होती है।
देखा जाए तो कुछ समय से पाकिस्तान में टीटीपी की गतिविधियां फिर से बढ़ती दिख रही हैं। पिछले कुछ महीनों में खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों पर हमलों में तेजी देखी गई है। यह क्षेत्र लंबे समय से अस्थिर रहा है और अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद जिहादी समूहों को फिर से संगठित होने का मौका मिला है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जिन्ना और इकबाल का इस तरह अपमान करना दिखाता है कि टीटीपी पाकिस्तान राज्य के अधिकृत स्वरूप को स्वीकार करने की बजाय अपनी ही विचारधारा थोपना चाहती है। यह विषय न केवल राजनीतिक बल्कि सांस्कृतिक संघर्ष की भी शक्ल ले चुका है।
उधर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी इस घटना पर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने कहा कि शिक्षा संस्थानों पर इस तरह के हमले अस्वीकार हैं। इससे उग्रवाद को परास्त करने की और अधिक आवश्यकता प्रतीत होती है। वहीं, भारत और अफगानिस्तान की कुछ मीडिया रिपोर्ट में इसे पाकिस्तान की आंतरिक नीतियों के नतीजे के नाते देखा गया है, जहां दशकों से जिहादी गुटों को पाला जाता रहा है।

















