नई दिल्ली, (हि.स.)। कानून की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए राहत की ख़बर है। अब लॉ पढ़ने वाले छात्रों को कम अटेंडेंस के आधार पर परीक्षा देने से नहीं रोका जाएगा। जस्टिस प्रतिभा सिंह की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये आदेश जारी किया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को अनिवार्य उपस्थिति नियमों में संशोधन करने का निर्देश दिया है।
दरअसल, दिल्ली उच्च न्यायालय 2016 में एमिटी यूनिवर्सिटी के एक लॉ स्टूडेंट सुशांत रोहिल्ला की आत्महत्या के मामले पर सुनवाई कर रही थी। सुशांत रोहिल्ला की उपस्थिति कम होने की वजह से उसे एक सेमेस्टर की परीक्षा में शामिल नहीं होने दिया गया। सुनवाई के दौरान एमिटी यूनिवर्सिटी की ओर से पेश वकील ने कहा था कि सुशांत रोहिल्ला आत्महत्या मामले में उनकी कोई गलती नहीं है। उन्होंने कहा था कि सुशांत के माता-पिता को कम उपस्थिति के बारे में पहले ही अवगत करा दिया गया था।
दरअसल, सुशांत लॉ के थर्ड ईयर का छात्र था और उसे परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया था। उसने 10 अगस्त, 2016 को अपने घर में ही खुदकुशी कर ली थी। सुशांत के दोस्त की चिट्ठी पर उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में संज्ञान लेकर 14 मार्च, 2017 को सुनवाई के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय ट्रांसफर कर दिया था। उसके दोस्त ने एमिटी यूनिवर्सिटी पर आत्महत्या के लिए उकसाने का केस चलाने की मांग की थी।

















