जिन्ना के देश के एक पूर्व फौजी अफसर ने बड़ा खुलासा करते हुए यह माना है कि पहलगाम हमला ISI की साजिश थी और कुछ नहीं। इतना ही नहीं, इस पूर्व फौजी अफसर ने उस आईएसआई अफसर का नाम भी सार्वजनिक कर दिया है जो उसके अनुसार, इस पूरे नरसंहार की साजिश को रचने का जिम्मेदार था। पाकिस्तान के इस पूर्व फौजी अफसर का का नाम है रिटायर्ड मेजर आदिल राजा और उसने यह खुलासा एक अफगानी पत्रकार से बातचीत में किया है। बेशक, आदिल की यह बात एक प्रकार से गंभीर खुलासा है और यह पाकिस्तान और भारत के भी कुछ सेकुलर नेताओं के मुंह पर करारा तमाचा है जो पहलगाम हमले के पीछे जिन्ना के देश का हाथ होने के सबूत मांगते फिर रहे हैं।
दरअसल आदिल राजा ने यह खुलासा अफगानिस्तान के पत्रकार के साथ पाकिस्तान—अफगानिस्तान संघर्ष विराम के संदर्भ में बातचीत के दौरान किया है। उसने कहा कि जिस आईएसआई अफसर ने पहलगाम रचाया था उसी के पास तालिबान से बात करने की जिम्मेदारी थी, लेकिन उसके चूंकि तालिबान से रिश्ते अच्छे नहीं हैं इसलिए बात सिरे नहीं चढ़ पाई।

आदिल का उक्त दावा सीधे सीधे पोल खोल देता है कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की ही भूमिका थी। और भारत ने शुरू से ही यह बात कही है कि पहलगाम नरसंहार के पीछे पाकिस्तान का हाथ है। आदिल राजा के अनुसार, इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तानी फौज के मुखिया जनरल असीम मुनीर ने खुद आईएसआई के एक सीनियर अफसर जनरल शहाब असलम को सौंपी थी।
सच में, आदिल राजा का यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकवाद और सीमा पार घुसपैठ को लेकर तनाव बना हुआ है। उसने अपने यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर विस्तार से बताया कि किस तरह आईएसआई के अंदर ‘कश्मीर सेल’ के जरिए इस हमले की योजना बनाई गई थी, और कैसे इसे अंजाम देने के लिए स्थानीय आतंकी गुटों का इस्तेमाल किया गया था।
पूर्व फौजी अफसर, जो अब रक्षा विशेषज्ञ के नाते अपने इंटरव्यू देता है, उस आदिल राजा का कहना है कि जनरल असीम मुनीर ने अपने सबसे भरोसे के आईएसआई अफसर शहाब असलम को यह जिम्मेदारी दी थी कि भारत में किसी बड़े हमले की योजना बनाओ ताकि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर को एक बार उभारा जाए। वह कहता है कि मुनीर का मकसद कुछ ऐसा करने का था कि भारत की सुरक्षित देश वाली छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके और पाकिस्तानी जनता का ध्यान घरेलू आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता से हटाया जा सके।
आईएसआई का यह ‘ऑपरेशन पहलगाम’ कथित तौर पर 2024 के अंत में शुरू किया गया था, जब तालिबान और पाकिस्तान के बीच संबंधों की नए सिरे से बहाली पर वार्ता चल रही थी। इसी दौरान, शहाब असलम ने अफगानिस्तान के कुनार और नूरिस्तान क्षेत्र में बैठे आतंकी स्लीपर सेल से संपर्क साधा था। माना जा रहा है कि उन्हीं माध्यमों के जरिये उस साजिश को कश्मीर घाटी तक पहुंचाया गया था।
सब जानते हैं कि पहलगाम आतंकी हमला उस वक्त हुआ था जब जम्मू कश्मीर में पर्यटन का दौर पूरे जोर पर था और इलाके में बड़ी संख्या में पर्यटकों के अलावा बड़ी संख्या में श्रद्धालु भ्ीा आए हुए थे। उस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी। सुरक्षाबलों ने तुरंत हरकत में आकर स्थिति संभाली थी। भारतीय राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और सेना ने संयुक्त अभियान चलाते हुए शुरुआती सबूत इकट्ठे किए थे, जिनसे संकेत मिले थे कि हमलावरों को सीमा पार से लॉजिस्टिक सहयोग मिला था।
अब आदिल राजा का यह खुलास सामने आने के बाद वे संदेह और पुख्ता ही हुए हैं। भारत की खुफिया एजेंसियों के सूत्रों ने कहा है कि वे पहले से ही ऐसे संकेतों पर काम कर रहे थे कि हमले के ‘कंट्रोल रूम’ पाकिस्तानी कब्जे वाले इलाकों से संचालित हो रहे थे। अत: मान जा रहा है कि आदिल यह खुलासा भारत के लंबे समय से चले आ रहे उस दावे की पुष्टि करता है कि पाकिस्तान राज्य प्रायोजित आतंकवाद को बढ़ावा देता है।

लेकिन सीमा के उस पार अफरातफरी मच गई है। आदिल राजा के इस बयान ने पाकिस्तान की राजनीति में भी भूचाल पैदा कर दिया है। विपक्षी नेताओं ने सेना से जवाब मांगा है कि अगर ये दावे सच हैं तो यह न केवल नैतिक बल्कि कानूनी रूप से भी गंभीर अपराध है। पाकिस्तानी मीडिया में इस मुद्दे को या तो नजरअंदाज किया जा रहा है या ‘फर्जी’ ठहराया जा रहा है। लेकिन पाकिस्तान में कुछ पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर जरूर सवाल उठाए हैं कि सेना के अंदर असंतोष बढ़ता जा रहा है और कई रिटायर्ड अफसर अब खुलकर अंदर ककी बातें सार्वजनिक कर रहे हैं।
जनरल असीम मुनीर और उनके दफ्तर ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। आईएसआई से जुड़े सूत्रों ने सिर्फ इतना ही कहा है कि ‘ये सब आरोप बेबुनियाद’ हैं और इनका उद्देश्य पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने के अलावा कुछ नहीं है
लेकिन इस बात में कोई दोराय नहीं है कि भारत पहले ही संयुक्त राष्ट्र और जी20 मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख की पैरवी करता रहा है। अब अगर इस प्रकार के आरोपों की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग उठती है, तो पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक स्थिति जटिल हो सकती है। लेकिन इस जांच से पाकिस्तान के पास चेहरा छुपाने की जगह नहीं बचेगी। वह आतंकवाद को पोसता आ रहा है, इस नैरेटिव के साथ प्रमाण भी जुड़ जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि आदिल राजा का यह दावा कश्मीर में सीमा पार से आतंकवादी गतिविधियों के चलाए जाने की भारत की चेतावनी पर एक बार फिर ध्यान केंद्रित करता है। दक्षिण एशिया मामलों के विश्लेषक कहते हैं कि अगर आदिल राजा के पास इस दावे से जुड़े ठोस सबूत हैं, जैसे संपर्क रिकॉर्ड, दस्तावेज़ या संचार लॉग, तो यह पाकिस्तान के सैन्य अधिष्ठान के लिए एक करारा झटका हो सकता है।
पूर्व फौजी अधिकारी आदिल राजा का यह खुलासा सिर्फ एक बयान नहीं है, बल्कि उस जटिल नेटवर्क की परतें भी उघाड़ने की संभावनाएं रखता है, जिसमें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी, सीमापार आतंकी संगठन और उसका राज्य प्रायोजित आतंक एक साथ जुड़ते हैं। समय ही बताएगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है? और कि, क्या पाकिस्तान इस पर कोई पारदर्शी जांच करवाने को तैयार होगा?

















