चीन और अमेरिका के बीच चल रहे ट्रेड वॉर के बीच चीन ने भारत की कुछ कंपनियों को रेयर अर्थ मैग्नेट्स इंपोर्ट करने की इजाजत दे दी है। ये मैग्नेट्स ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए बेहद जरूरी हैं। ये इलेक्ट्रिक वाहनों और हाई-टेक प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल होते हैं। लेकिन ये मंजूरी पहले लगाई गई पाबंदियों के बाद आई है। इंपोर्ट पर सख्त शर्तें भी हैं – इनका इस्तेमाल डिफेंस में नहीं हो सकता और न ही इन्हें अमेरिका को एक्सपोर्ट किया जा सकता है।
मंजूरी और विदेश मंत्रालय का बयान
सरकार ने बताया कि कुछ भारतीय कंपनियां चीन से रेयर अर्थ मैग्नेट्स इंपोर्ट करने की मंजूरी पा चुकी हैं। ये मैग्नेट्स ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री के लिए हैं। विदेश मंत्रालय के स्पोक्सपर्सन रंधीर जायस्वाल ने कहा कि चीन ने पहले इनकी बिक्री रोक दी थी, लेकिन अब लाइसेंस जारी हो गए हैं। उन्होंने कहा, “अमेरिका और चीन के बीच हाल की बातचीत और रिलैक्सेशन का हमारे यहां क्या असर होगा, ये देखना बाकी है। मैं टेक्निकल डिटेल्स से वाकिफ नहीं हूं, लेकिन हां, भारतीय कंपनियों को चीन से रेयर अर्थ्स इंपोर्ट करने के लाइसेंस मिल चुके हैं।”
इंपोर्ट पर लगी पाबंदियां
चीन ने कुछ शर्त रखी हैं। शर्त ये रखी है कि मैग्नेट्स को अमेरिका एक्सपोर्ट नहीं किया जा सकता। साथ ही, इन्हें डिफेंस से जुड़े कामों में यूज नहीं करने की मनाही है। इन पाबंदियों की वजह से ऑटोमोबाइल प्रोडक्शन प्रभावित हुआ था, खासकर इलेक्ट्रिक कारों और टू-व्हीलर्स में। कंपनियों ने सरकार से चीन के साथ बात करने को कहा था।
रेयर अर्थ मैग्नेट्स क्या हैं?
रेयर अर्थ मैग्नेट्स मार्केट में सबसे ताकतवर परमानेंट मैग्नेट्स हैं। इनकी मैग्नेटिक स्ट्रेंथ ज्यादा होती है और डिमैग्नेटाइजेशन से बचाव भी। ये वजन और स्पेस कम होने वाली जगहों पर फिट बैठते हैं। इन्हें रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे नियोडाइनियम, प्रासियोडाइनियम और डिस्प्रोसियम से बनाया जाता है। ज्यादातर ये नियोडाइनियम-आयरन-बोरॉन (NdFeB) अलॉय से बने होते हैं। ये छोटे-छोटे और एनर्जी-एफिशिएंट डिवाइसेस में पावर देते हैं।
इसे भी पढ़ें: अमेरिकी सीनेट का ट्रंप को झटका: 100+ देशों पर टैरिफ रिजेक्ट, 4 रिपब्लिकन्स ने डेमोक्रेट्स का साथ दिया
जुड़ी कंपनियां और इंडस्ट्री पर असर
इंडस्ट्री सोर्सेज के मुताबिक, लाइसेंस पाने वाली कंपनियां ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रॉनिक्स को कंपोनेंट्स सप्लाई करती हैं। भारत की ऑटो इंडस्ट्री को FY 2025-26 में करीब 870 टन रेयर अर्थ मैग्नेट्स इंपोर्ट करने की जरूरत है। कुल मिलाकर देश को 3,600 टन चाहिए।
पृष्ठभूमि और चीन की दबदबा
इस साल की शुरुआत में चीन ने रेयर अर्थ मैग्नेट्स की बिक्री पर रोक लगा दी थी। चीन ग्लोबल रेयर अर्थ मेटल्स माइनिंग का 70% कंट्रोल करता है। मैग्नेट प्रोडक्शन में तो 90% हिस्सा उसका है। इसका राज सप्लाई चेन पर कंट्रोल है – माइनिंग से लेकर रिफाइनिंग, अलॉय प्रोडक्शन और मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग तक।

















