बीते दिनों मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) का फर्जी वैज्ञानिक बनकर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी करने वाले अख्तर हुसैन कुतुबुद्दीन अहमद को गिरफ्तार किया था। अब उस आरोपी के पास से पुलिस को संवेदनशील परमाणु डाटा और 14 नक्शे बरामद हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्सोवा स्थित अख्तर हुसैन के घर से 14 मैप, न्यूक्लियर ब्लूप्रिंट और तीन पासपोर्ट मिले हैं, जिनका इस्तेमाल वह इंटरनेशनल ट्रिप करने के लिए करता था। इसके अलावा इनका उपयोग जासूसी से जुड़े मकसद और सीक्रेट जानकारी के लेन-देन के लिए भी किया जाता था। अधिकारियों ने बताया कि 60 साल के अख्तर हुसैन कुतुबुद्दीन अहमद ने खुद को भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) का साइंटिस्ट बताया। वह फर्जी नामों और दस्तावेजों के जरिए कई विदेश यात्राएं भी कर चुका है। उसने संवेदनशील और सीक्रेट डॉक्यूमेंट्स को देश से बाहर बेचने की कोशिश की।
सुरक्षा ढांचे की कमजोरियां हुईं उजागर
जांच में पाया गया है कि उसके पास कई जाली दस्तावेज थे, जिनमें BARC का नकली पहचान पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, नकली पासपोर्ट और जाली ड्राइविंग लाइसेंस शामिल थे। अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने अहमद की गिरफ्तारी के बाद से उसकी हरकतों और इन झूठी पहचान से जुड़ी गतिविधियों का पता लगाने के लिए देशव्यापी जांच शुरू कर दी है। आधार और पैन कार्ड से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस तक के नकली दस्तावेजों की बरामदगी ने भारत के सुरक्षा ढांचे में खतरनाक कमजोरियों को उजागर किया है, जिसने उसे सालों तक बिना पता चले काम करने दिया।
दिल्ली पुलिस ने अख्तर के ‘मृत’ भाई को भी गिरफ्तार किया
अख्तर हुसैन कुतुबुद्दीन अहमद से पूछताछ के बाद दो और गिरफ्तारियां हुई हैं। इनमें से एक झारखंड का साइबर कैफे मालिक मुनाजिर खान है और दूसरा अख्तर का सगा भाई मोहम्मद आदिल हुसैनी, जिसे उसने मृत बता रखा था, लेकिन अब उसे दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उस पर भी पाकिस्तान सहित विदेशों से संबंध रखने और जासूसी गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप में पकड़ा गया है। जांच में पता चला है कि दोनों ने कुतुबुद्दीन अहमद के लिए फर्जी शैक्षणिक सर्टिफिकेट तैयार किए और डिजिटल दस्तावेजों में हेरफेर की। अहमद और मुनाजिर को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
‘एलेक्जेंडर पाल्मर’ नाम से बनाई नई पहचान
अख्तर की पृष्ठभूमि ने खुफिया एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। वह पहले खाड़ी देशों में तेल और मार्केटिंग फर्मों में काम करता था। 2004 में उसे दुबई से बाहर कर दिया गया था। हालांकि, इसके बावजूद उसने कई बार खाड़ी देशों की यात्रा की। जांच में यह पता चला है कि कुतुबुद्दीन अहमद ने करीब दो दशकों तक पूरी तरह से अपनी सूरत बदलकर एक अलग जिंदगी जी थी। उसने ‘एलेक्जेंडर पाल्मर’ नाम से भी एक नई पहचान बनाई थी और उसके सहारे जाली दस्तावेज, नौकरी के दस्तावेज और कम से कम तीन भारतीय पासपोर्ट भी बनवा रखे थे।
अख्तर ने अंतरराष्ट्रीय कॉल भी किए
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अख्तर ने पिछले कुछ महीनों में कई अंतरराष्ट्रीय कॉल किए हैं और अब उसके कॉल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। पुलिस को शक है कि वह विदेशी नेटवर्क के संपर्क में था। पुलिस द्वारा जब्त किए गए दस्तावेजों की जांच से यह पता लगाया जा रहा है कि उनमें कोई संवेदनशील या गोपनीय परमाणु जानकारी तो नहीं है।

















