सुप्रीम कोर्ट ने वामपंथी वकील प्रशांत भूषण को बड़ा झटका दे दिया है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें भूषण ने चीफ इंफॉर्मेशन कमिश्नर (CIC) और इंफॉर्मेशन कमिश्नर्स के पदों के लिए शॉर्टलिस्टेड उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक करने की मांग की थी। केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया कि सिलेक्शन प्रोसेस तीन हफ्तों में पूरा हो जाएगा। कोर्ट ने अपॉइंटमेंट्स की जांच का भरोसा दिया, लेकिन नामों को बाहर करने से बचने की बात कही, क्योंकि इससे कोर्ट केस बढ़ सकते हैं। साथ ही, राज्यों में खाली पड़े पदों पर भी नजर डाली।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई: याचिकाओं पर क्या हुआ
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत और ज्योमल्या बागची की बेंच ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता सोशल एक्टिविस्ट अंजली भारद्वाज की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश का उल्लंघन कर रही है। उन्होंने कहा कि आवेदन करने वालों के नाम, शॉर्टलिस्ट और प्रक्रिया सब कुछ पब्लिक होना चाहिए। भूषण ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सूचना आयोगों को कमजोर कर रहे हैं – सैंक्शन स्ट्रेंथ कम रखकर और पद खाली छोड़कर RTI आवेदकों को परेशान किया जा रहा है।
इस पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने कोर्ट को बताया कि सिलेक्शन पैनल – जिसमें प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और पीएम द्वारा नामित एक यूनियन कैबिनेट मंत्री शामिल हैं – दो-तीन हफ्तों में नाम फाइनल कर देगा। उन्होंने कहा कि कई योग्य उम्मीदवार नाम पब्लिक होने से डरते हैं, क्योंकि समाज का एक हिस्सा सरकार के हर काम में कमी निकालता है।
कोर्ट का रुख: जांच का वादा
बेंच ने भूषण को भरोसा दिया कि अपॉइंटमेंट्स की सख्त जांच होगी, ताकि सिर्फ योग्य लोग ही चुने जाएं। लेकिन नाम पब्लिक करने से इनकार कर दिया। जस्टिस ने कहा, “शॉर्टलिस्टेड नाम बाहर करने से वो लोग जो लिस्ट में नहीं हैं, कोर्ट जा सकते हैं। इससे प्रोसेस कभी पूरा ही नहीं होगा।” कोर्ट ने मामला तीन हफ्ते बाद के लिए टाल दिया। भूषण ने जोर दिया कि नागरिकों को जानने का हक है कि कौन शॉर्टलिस्ट हुआ है।
राज्य स्तर पर वैकेंसी की समस्या
भूषण ने झारखंड का उदाहरण दिया, जहां राज्य सूचना आयोग (SIC) पूरी तरह बंद पड़ा है – एक भी अपॉइंटमेंट नहीं हुआ। बेंच ने राज्य से पूछा, तो झारखंड ने आश्वासन दिया कि प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और 45 दिनों में पूरी होगी। अगर ऐसा न हुआ, तो चीफ सेक्रेटरी पर कार्रवाई होगी।















