वर्ष 2022 में 14 अक्टूबर का दिन, स्थान फ्रांस की राजधानी पेरिस। 12 वर्षीय लोला देवित स्कूल से वापस लौट रही थी और वह उस बिल्डिंग में जा रही थी, जहां पर उसके माता-पिता डोर अटेंडेंट के रूप में काम करते थे।
मगर वह उस दिन माता-पिता के पास नहीं पहुंच पाईं। वह दाहबीआ बेनकिरेड नामक एक वहशी महिला का शिकार बन गई। उसने लोला देवित का बलात्कार किया और फिर उसकी हत्या कर दी। बेनकिरेड मूल रूप से अल्जीरिया की थी और बिना दस्तावेजों के फ्रांस मे रह रही थी। बेनकिरेड को देश से निकाले जाने का आदेश भी इस घटना से 2 महीने पहले ही जारी हो चुका था। इसके बावजूद वह फ्रांस में ही थी।
वह भी उसी बिल्डिंग में अपनी बहन के अपार्टमेंट में रहती थी और उसकी मुलाकात लोला से 3 बजे के लगभग हुई। इसके बाद लोला गायब हो गई। माता-पिता अपनी बेटी का इंतजार करते रहे, परंतु उनका इंतजार लंबा होता गया। जब लोला नहीं आई तो उसके अभिभावकों ने अलार्म बजाया। डेढ़ घंटे बाद बेनकिरेड एक बहुत बड़े बक्से के साथ बाहर आती दिखी, जिसमें लोला की रक्तरंजित लाश थी। उसे बाद में हिरासत में ले लिया गया और चिकित्सीय जांचों के बाद यह पाया गया कि उस पर मुकदमा चलाया जा सकता है।
12 वर्ष की लोला को कैंची से गोद कर मारा गया था। पहले बेनकिरेड ने उससे कपड़े उतारने के लिए, नहाने के लिए और एक यौन गतिविधि करने के लिए कहा था और उसके बाद उसने उस पर हमला कर दिया। उसे बॉक्स कटर और कैंची से गोदा गया और फिर चेहरे पर डक्ट टेप लगाकर दम घोंट कर मारा गया था। यह भी कहा जाता है कि कैंची के घाव इतने गहरे थे कि उसका गला भी आधा कट गया था।
कारण क्या था इतनी घृणा और गुस्से का
यह भी प्रश्न उठता है कि आखिर लोला के प्रति इतने गुस्से का कारण क्या था? दरअसल बेनकिरेड को लोला की मां डेल्फिन के प्रति गुस्सा था। वह इस बात से नाराज थी कि डेल्फिन ने बिल्डिंग की चाबी देने से इनकार कर दिया था। बेनकिरेड के पास रहने के लिए घर नहीं था और वह बहन के अपार्टमेंट में रह रही थी। लोला को उसने लालच देकर बुलाया था और फिर उसके साथ यह वहशीपन किया।
मां ने न्यायालय में बताया कि उनकी बेटी के शरीर पर लगभग 40 घाव थे और कैंची से उसकी गर्दन और सिर भी कुछ सीमा तक कट गया था। उसके शरीर को प्लास्टिक के ट्रंक में भरकर पेरिस की सड़कों पर घसीटा गया था।
द सन की रिपोर्ट के अनुसार जब कोर्ट रूम में लोला के घावों के साथ शव की तस्वीर दिखाई गई तो कई लोग कक्ष से बाहर चले गए, मगर डेल्फिन नहीं गईं!
पिता की दुख में डूबकर मौत
लोला की मृत्यु से उसके पिता जॉन को बहुत आघात पहुंचा था। वह अपनी बेटी की इस प्रकार मृत्यु को बर्दाश्त नहीं कर सके और अत्यधिक शराब पीने लगे। डेल्फिन ने इस मुकदमे की सुनवाई के दौरान कहा कि जॉन ने शराब छोड़ दी थी, मगर लोला की इस तरह से मौत के बाद उन्होनें दोबारा पीना शुरू नहीं किया, बल्कि दुख के कारण शराब में खुद को डुबो लिया और दिन से लेकर रात तक शराब ही पीते रहते थे। जॉन ने एक पत्र भी उस अपार्टमेंट के दरवाजे पर लटकाया, जिसमें बेनकिरेड रह रही थी। उन्होंने पत्र में लिखा था कि “माई डार्लिंग, मैं अभी तक यह समझ नहीं पा रहा हूं कि आखिर तुम्हारे साथ इतनी बर्बरता और नृशंसता क्यों हुई? तुम तो इतनी उदार थीं! मैं अब तुम्हें देखे बिना नहीं रह पा रहा हूँ। तुम्हारा पिता, जो तुम्हें बहुत प्यार करता है!” और इसके बाद उनकी मौत हो गई थी।
परिवार में केवल माँ और बेटे ही शेष
एक समय के हंसते खेलते परिवार में अब केवल मां और बेटे ही शेष हैं। द सन की रिपोर्ट के अनुसार जज ने जब डेल्फिन से पूछा कि आपको आखिर क्या जिंदा रखे हुए है? तो उन्होंने उत्तर दिया कि “मेरा बेटा!” डेल्फिन ने कहा, “मैं आपको याद दिलाना चाहती हूं कि मैंने अपनी लोला खोई है, अपना पति, अपनी नौकरी, अपना घर खोया है। मेरी पूरी जिंदगी तहस-नहस हो गई है, और कभी-कभी मुझे हैरानी होती है कि आखिर मैं कैसे जिंदा हूं!”
दोषी महिला को बिना पेरोल के उम्रकैद
इस जघन्य हत्या के लिए दोषी पाए जाने पर अब दाहबीआ बेनकिरेड को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है, जिसमें पेरोल की किसी भी संभावना को नकार दिया गया है और ऐसा फ्रांस के इतिहास में पहली बार हुआ है। जब यह निर्णय सुनाया गया तो लोला की मां और भाई दोनों ही फूट फूट कर रोने लगे थे।
वर्ष 2022 में इस मामले के बाद अवैध शरणार्थियों पर बहस तेज हुई थी और लोगों ने यह प्रश्न किये थे कि आखिर उनके बच्चे कितने सुरक्षित हैं?

















