विश्व राजनीति और कारोबारी झंझट—झमेलों से इतर भारत और अमेरिका के बीच एक अनूठा संबंध हमेशा से रहा है। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के नाते भारत के महत्व से अमेरिका अपरिचित नहीं है। इसलिए सरकार वहां चाहे रिपब्लिकन हो या डेमोक्रेट्स की, सबने वहां पीढ़ियों से बसे भारतीयों को अमेरिका की धरोहर और विकास का संबल बताया है। यही वजह है कि दिवाली का त्योहार वहां धूमधाम से मनया जाता रहा है। इस बार भी अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय ओवल आफिस में दीपों की जगमगाहट हुई। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद इस मौके पर उपस्थित रहे। भारत के अमेरिका में राजदूत ने इस त्योहार के महत्व पर प्रकाश डाला और सभी भारतवासियों की ओर से शुभकामनाएं प्रेषित कीं। नि:संदेह यह कार्यक्रम सांस्कृतिक कूटनीति और प्रवासी भारतीय समुदाय की बढ़ती भूमिका की ओर संकेत करता है।
ओवल ऑफिस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ भारतीय राजदूत विनय क्वात्रा द्वारा दिवाली मनाने के साथ ही, त्योहार के आनंद को दोगुना करते हुए न्यूयॉर्क में एक सड़क का नाम गुरु तेग बहादुर जी के नाम पर रखा गया। ये दोनों ही अवसर प्रतीकात्मक रूप से भारत की उस देश में सांस्कृतिक उपस्थिति और विश्व स्तर पर भारतीय मूल्यों के प्रसार को दर्शाते हैं।

बात शुरू करते हैं ओवल ऑफिस से जहां दिवाली मनाने की परंपरा पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी राजनीति में भारतीय संस्कृति की स्वीकृति और महत्व के प्रतीक के रूप में स्थापित हो चुकी है। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा भारतीय राजदूत के साथ दिवाली मनाना न केवल एक औपचारिक आयोजन था, बल्कि यह अमेरिका में भारतीय समुदाय के बढ़ते प्रभाव का सार्वजनिक प्रदर्शन भी था।
इस आयोजन में भारतीय राजदूत ने राष्ट्रपति को दिवाली का महत्व समझाया—यह कैसे अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इस बातचीत ने अमेरिकी राजनीतिक नेतृत्व को भारतीय दर्शन के उस आयाम से जोड़ा जो शांति, समरसता और मानवता के साझा मूल्यों को बढ़ावा देता है। ऐसे आयोजनों का महत्व केवल प्रतीकात्मक नहीं होता; ये उस भावनात्मक जुड़ाव को गहराई देते हैं जो दो देशों को केवल रणनीतिक साझेदारी से आगे ले जाकर सभ्यतामूलक संवाद का हिस्सा बनाते हैं।

कहते सकते हैं कि भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ के सबसे बड़ा उदाहरण इसकी सांस्कृतिक विरासत और वैश्विक त्योहार हैं। दिवाली इसका केंद्रीय प्रतीक है। जब अमेरिकी राष्ट्रपति स्वयं इस पर्व का हिस्सा बनते हैं, तो इससे यह संदेश जाता है कि भारतीय संस्कृति अब अमेरिका की सामाजिक-सांस्कृतिक मुख्यधारा में जगह बना चुकी है।
यह सॉफ्ट पावर न केवल भारतीय मूल के अमेरिकियों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि भारत के लिए भी यह दिखाने का मंच है कि वह वैश्विक समाज में सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करने वाला देश है। इस स्तर पर आयोजित कोई भी समारोह दो देशों के बीच आपसी विश्वास को बढ़ाता है और परस्पर सम्मान के भाव को गहराई देता है।
दिवाली के ही अवसर पर न्यूयॉर्क की एक सड़क का नाम सिख पंथ के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी के नाम पर रखा जाना एक और ऐतिहासिक घटना है। गुरु तेग बहादुर जी का जीवन धर्म परायणता, सहिष्णुता और मानवता के लिए बलिदान का प्रतीक है। उनके नाम पर सड़क का नाम रखा जाना न केवल अमेरिका में सिख समुदाय के योगदान को सम्मान देता है, बल्कि अमेरिका के बहुसांस्कृतिक समाज में पांथिक विविधता की स्वीकृति को भी मजबूत करता है। इससे यह संदेश भी जाता है कि भारतीय संतों और गुरुओं की शिक्षाएं अब सीमाओं से परे मानवता के सार्वभौमिक मूल्यों के रूप में स्वीकार की जा रही हैं।
इसमें संदेह नहीं है कि अमेरिका में बसे भारतीय समुदाय ने उस देश को आज की स्थिति तक पहुंचाने में एक अहम भूमिका निभाई है। उनकी सक्रिय भागीदारी और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव ने यह सुनिश्चित किया है कि भारतीय परंपराएं और मूल्य विदेशों में भी जीवित रहें। प्रवासी भारतीय अब अमेरिका के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक ताने-बाने का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनकी उपलब्धियों ने भारत की छवि को सुदृढ़ किया है।
इन दोनों कार्यक्रमों के पीछे भारत-अमेरिका संबंधों के गहराने और रणनीतिक साझेदारी का संकेत भी छुपा है। राष्ट्रपति ट्रंप का यह कदम भारतीय मतदाताओं और प्रवासी समुदाय के प्रति सम्मान दिखाने के साथ-साथ भारत के साथ करीबी संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा को दर्शाता है।
दूसरी ओर, भारतीय राजनयिक का यह प्रयास यह सुनिश्चित करता है कि भारत की सांस्कृतिक और वैचारिक पहचान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रखर रूप से उभरे। यह सांस्कृतिक कूटनीति का ऐसा उदाहरण है जिसमें मत—पंथ, परंपरा और राजनीति का संगम शांति और सहयोग के माध्यम से प्रकट होता है।
भारत सरकार में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने न्यूयॉर्क में सड़क का नाम ‘श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी’ के नाम पर रखे जाने पर अपने ट्वीट में इसे सिख संगत के लिए एक ‘गौरवपूर्ण क्षण’ बताया। उन्होंने लिखा कि यह सड़क अब पांथिक स्वतंत्रता के प्रतीक नौवें गुरु, हिंद की चादर श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के नाम से जानी जाएगी।
पुरी ने आगे लिखा कि यह उचित सम्मान न्यूयॉर्क के रिचमंड हिल क्षेत्र में सिख समुदाय के योगदान को पहचान देता है और शहर के सांस्कृतिक ताने-बाने में सिख विरासत के महत्व को प्रदर्शित करता है। उन्होंने यह भी याद किया कि वह 2009 से 2013 तक संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि के रूप में न्यूयॉर्क में कार्यरत थे, इसलिए यह क्षण उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी भावनात्मक और गर्वपूर्ण है। उनके ट्वीट ने गुरु तेग बहादुर जी की विरासत—बलिदान, करुणा और न्याय के मूल्यों—को उजागर करते हुए यह दिखाया कि सड़क का नाम गुरु महाराज के नाम पर रखा जाना सिख समुदाय और भारतीय संस्कृति दोनों के सम्मान का प्रतीक है।

















