अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में राजस्थान से लेकर देशभर में अपनी पहचान बना चुकी ‘मीरा कॉर्पोरेशन’ आज दृढ़ निश्चय, परिश्रम और ईमानदारी का प्रतीक है। 200 करोड़ रु. सालाना कमाने वाली इस कंपनी की स्थापना वर्ष 2007 में किशोर सिंह कानोड़ द्वारा की गई थी, जिनकी जीवन यात्रा संघर्ष भरी रही है।
राजस्थान के बालोतरा क्षेत्र के एक साधारण कृषक परिवार में जन्मे किशोर सिंह कानोड़ ने सीमित संसाधनों के बीच भी बड़े सपने देखने का साहस किया। बचपन से ही आत्मविश्वासी और कर्मशील स्वभाव वाले किशोर सिंह ने कभी परिस्थितियों को अपनी राह की रुकावट नहीं बनने दिया। आर्थिक रूप से साधारण पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उनके भीतर आत्मनिर्भरता और ईमानदार परिश्रम का जज्बा था। युवा अवस्था में उन्होंने चाय की एक छोटी सी टपरी से अपने आजीविका की शुरुआत की।
यही टपरी आगे चलकर एक ढाबे में बदल गई, और इसी यात्रा के दौरान उन्होंने व्यावहारिक जीवन के वे सूत्र सीखे जो आगे चलकर उनकी सफलता की नींव बने। बिना पूंजी या यूं कहें कि उधार में जुटाई गई अल्प राशि से उन्होंने एक और पहल की, जिसे बाद में समाज ने एक प्रेरक उदाहरण के रूप में देखा। ऊर्जा क्षेत्र में संभावनाएं पहचानते हुए वर्ष 2007 में उन्होंने मीरा कॉर्पोरेशन की स्थापना की। आज यह कंपनी सौर एवं पवन ऊर्जा, उच्च वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइन, स्विचयार्ड, ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस तथा भूमि परामर्श सेवाओं के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित नाम है।
किशोर सिंह कहते हैं, ”कोविड काल मीरा कॉर्पोरेशन के लिए भी कठिन समय लेकर आया था, काम बंद होने की नौबत आ गई थी, लेकिन तब भी हमने यह निर्णय लिया कि किसी भी कर्मचारी की छंटनी नहीं की जाएगी। आज मीरा कॉर्पोरेशन में लगभग 300 स्थाई और 1500 अनुबंधित कर्मचारी कार्यरत हैं। ”
ऊर्जा क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता के साथ-साथ किशोर सिंह कानोड़ ने आतिथ्य उद्योग में भी अपनी छाप छोड़ी है। उनके प्रबंधन में बाड़मेर स्थित “द हवेली” होटल और पचपदरा स्थित “द सारा” होटल आधुनिकता और राजस्थानी परंपरा का सुंदर संगम प्रस्तुत करते हैं। दोनों होटल क्षेत्र के पर्यटन और स्थानीय रोजगार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

















