भुवनेश्वर। वामपंथी आतंकवाद पर लगाम लगाने के उद्देश्य से ओडिशा पुलिस ने एक बड़ा कदम उठाते हुए नई प्रोत्साहन योजना की घोषणा की है। जिसके तहत सक्रिय माओवादियों की गिरफ्तारी या उनके ठिकाने से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी देने वालों को भारी नकद इनाम दिया जाएगा। यह योजना राज्य में माओवाद-विरोधी अभियान को तेज करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। पुलिस ने माओवादियों की रैंक और खतरे के स्तर के अनुसार 20 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक की इनामी राशि निर्धारित की है।
यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब पड़ोसी राज्यों छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र ने माओवादियों के खिलाफ अपने अभियान तेज कर दिए हैं, जिससे लगातार मुठभेड़ें और आत्मसमर्पण की घटनाएं बढ़ी हैं। इसी रणनीति को अपनाते हुए ओडिशा पुलिस ने राज्य के माओवादी प्रभावित जिलों में दस शीर्ष वांछित माओवादी नेताओं के नाम और तस्वीरों वाले पोस्टर जारी किए हैं, ताकि जनता को अभियान में शामिल कर उग्रवादी नेटवर्क को कमजोर किया जा सके। इस सूची में सबसे ऊपर है पाका हनुमंथु उर्फ गणेश उइके, जो तेलंगाना से सीपीआई (माओवादी) संगठन की केंद्रीय समिति का सदस्य है और जिस पर 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया गया है। इसके अलावा, सुदर्शन, निखिल, अंकिता, सुकरु और नीतू जैसे शीर्ष उग्रवादियों पर 50 लाख रुपये का इनाम रखा गया है। वहीं, शीला उर्फ नागमणि, अन्वेष उर्फ रेनू, ममता और नकुल पर 20 रुपये लाख का इनाम घोषित किया गया है।
राज्य के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि पोस्टरों में न केवल वांछित माओवादियों की सूची है, बल्कि राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के लाभों का भी उल्लेख किया गया है। हम माओवादियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील करते हैं और आम जनता से अनुरोध करते हैं कि वे हमारी हेल्पलाइन 9437643839 पर विश्वसनीय जानकारी साझा करें। सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। यह अभियान स्थानीय स्तर पर “माओवादी पकड़ो, इनाम पाओ” शीर्षक के तहत शुरू किया गया है। इसे कलाहांडी. बलांगीर, मालकानगिरि, कोरापुट, नवरंगपुर, नूआपडा, रायगडा व बौद्ध जैसे नौ माओवादी प्रभावित जिलों में लागू किया गया है। इनमें खास फोकस बौद्ध., कंधमाल, कलाहांडी और रायगड़ा पर है, जबकि नबरंगपुर और नुआपड़ा जिलों में विशेष निगरानी रखी जा रही है, जो छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे हैं और जहां माओवादी गतिविधियां अधिक देखी जाती हैं।

बौध जिले में विभिन्न स्थानों जैसे सिगड़ी, तिलपंगा, उदामुंडा, मटागडु, खंडिखनपा, लुहारपड़ा, नालिकुंपा और पाला के साथ-साथ बौध, कंतमाल, बाउंशुनी और मनमुण्डा थाना क्षेत्रों के जंगलों में ये पोस्टर लगाए गए हैं। जिला पुलिस के अनुसार, दस पहचाने गए माओवादियों की गिरफ्तारी या निष्प्रभावीकरण की सूचना देने वालों के लिए कुल 4.3 करोड़ रुपये की राशि इनाम के रूप में रखी गई है।
इनामी संरचना इस प्रकार है —
• शीर्ष माओवादियों की गिरफ्तारी पर ₹1 करोड़
• कुख्यात (हार्डकोर) माओवादियों पर ₹50 लाख
• निचले स्तर के उग्रवादियों की जानकारी पर ₹20 लाख
पोस्टरों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मारे गए या आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के संबंध में विश्वसनीय सूचना देने वाले व्यक्ति भी इनाम के पात्र होंगे। राज्य सरकार ने ओडिशा पुलिस को केंद्रीय बलों के साथ समन्वय कर अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं। यह कदम केंद्र सरकार के मार्च 2026 तक माओवादी-मुक्त भारत के लक्ष्य के अनुरूप है। हाल ही में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य सचिव मनोज आहूजा ने राज्य और केंद्रीय सुरक्षा बलों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया था ताकि प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इनाम-आधारित यह नीति न केवल खुफिया सूचना जुटाने में सहायक होगी, बल्कि स्थानीय समुदायों और सुरक्षा बलों के बीच विश्वास का पुल भी बनेगी। जंगल किनारे और जनजातीय क्षेत्रों में रह रहे लोगों को इस अभियान में शामिल कर, माओवादियों के आत्मसमर्पण को प्रोत्साहित किया जाएगा। बौध जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल दमन नहीं बल्कि पुनर्वास भी है। हम चाहते हैं कि जो माओवादी हथियार छोड़कर समाज में लौटना चाहते हैं, उन्हें एक नया जीवन मिले, साथ ही आम नागरिक भी सुरक्षित और आत्मविश्वास से भरपूर महसूस करें।
उधर पुलिस ने गश्त और खुफिया-आधारित अभियानों को तेज कर दिया है। जनता के सहयोग और जागरूकता के साथ यह नई इनामी योजना ओडिशा के लंबे समय से माओवादी प्रभावित इलाकों में शांति बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।

















