दीपावली, अंतरतम में उजास और उमंग भरने का पर्व, घुप्प अंधेरे में धरा के प्रकाशित होने का पर्व। भारत के लोक का पर्व, तभी तो भारतीय मनीषा ने कहा है-
असतो मा सद्गमय।
तमसो मा ज्योतिर्गमय।
मृत्योर्मामृतं गमय।
( हे ईश्वर! हमें असत्य से सत्य की ओर ले चलो। अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो। मृत्यु से अमरता के भाव की ओर ले चलो)। इसी प्रकाश से तो श्रीअयोध्याजी भी प्रकाशित हुई थीं, जब मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की स्वदेश वापसी हुई। अयोध्याजी का हर कोना दीयों के उजास से भर गया। तो इस बार एक दीपक स्वदेशी का भाव लिए स्वदेश के लिए जलाएं।
बच्चे को जब किसी वस्तु की आवश्यकता होती है तो मां बिना कहे समझ जाती है। उसी तरह बच्चे के लिए भी मां की गोद से बड़ा सुख नहीं है। यह प्रेम का भाव है। एक और मां है जो सदियों से हर इंसान के सुख-दुख की साक्षी है और उसकी गोद में खेलकर हर बच्चा बड़ा होता है। वह हैं-भारत माता। जिनकी एक पुकार पर पूरा राष्ट्र एकजुट हो जाता है। जिनकी रक्षा के लिए देश की सीमा पर हमारे जांबाज अपनी जान की बाजी लगा देते हैं। भारत मां से बढ़कर कोई नहीं। यह भाव हमें स्वदेशी के प्रति भी जगाना होगा।
बाबू गेनू मुंबई में एक मिल में मजदूर थे। वह महाराष्ट्र के पूणे जिले के महालुंगे पड़वाल गांव के रहने वाले थे। स्वाधीनता आंदोलन में स्वदेशी के लिए उन्होंने अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया। उस समय उनकी आयु महज 22 वर्ष थी। येसुबाई गणेश सावरकर, जिन्होंने स्वाधीनता संग्राम में योगदान दिया और स्वदेशी व्रत रखा। जब उन्होंने यह देखा कि कांच की चूड़ियां विदेश से आ रही हैं तो उन्होंने मोतियों को धागे में पिरोकर पहनना शुरू किया। गांव-गांव स्वदेशी उत्पादों के लिए जागरुकता फैलाई। लोकमान्य तिलक ने भी स्वदेशी का शंखनाद किया।

स्वदेशी एक भाव है और इसे सतत अपने कार्य व्यवहार में उतारना होगा। कोई भी उत्पाद खरीदते समय उसे पलटकर भी देखें। ‘मेड इन इंडिया’ का आग्रह करें। मोल-भाव करते समय यह तो कह ही सकते हैं कि – मेड इन इंडिया वाला उत्पाद चाहिए। आप स्वदेशी के प्रति जितने जागरूक होंगे, उतना ही देश आगे बढ़ेगा। यह उपभोक्ता का अधिकार भी है कि उसे अपने उत्पाद के बारे में पूरी जानकारी मिले। यह पूरी तरह से उपभोक्ता पर निर्भर करता है कि वह सामान लेगा कि नहीं।
हर उत्पाद की खरीद में भारत को जोड़िये। बूंद-बूंद से जैसे सागर बनता है वैसे ही छोटे-छोटे स्वदेशी सामान के चुनाव से देश आत्मनिर्भर बनेगा। फिर टैरिफ की धमकी भी नहीं चलेगी। गांव से बाजार तक, शहर से मॉल तक हर जगह स्वदेशी दिखे। जीएसटी बचत उत्सव में स्वदेशी का जागरण भारत को और मजबूत करेगा। यह रोजगार और राष्ट्र की सुरक्षा से भी जुड़ा मुद्दा है। स्वदेशी की ताकत जब दिखती है दुश्मन भी थर थर कांपता है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के आतंकियों को मिट्टी में मिलाने वाली ब्रह्मोस मिसाइल स्वदेशी ही तो है। श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी के शब्दों में- स्वदेशी केवल भौतिक वस्तुओं तक ही सीमित आर्थिक मामला नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय जीवन के सभी आयामों को अंगीकृत करने वाली व्यापक विचारधारा है।
इस बार दिवाली पर स्वदेशी रूपी दीपक का प्रकाश हर घर में पहुंचना चाहिए। मातृभूमि के प्रति यह भी एक सच्ची सेवा है, आखिर –
देश हमें देता है सबकुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें
स्वदेशी को बढ़ावा देने के लिए आप कुछ कहना चाहते हैं तो अपने विचार हमसे इस ईमेल पर साझा करें – [email protected]
आइये मिलकर करें ये काम
– पैकेट में एक्सपायरी की तारीख देखते थे, अब स्वदेशी भी देखिए
– दुकान पर स्वदेशी पूछने की आदत डालें
– हर पैकेट पर देसी का निशान हो और हर दिल में तिरंगे का मान हो
– टेक्नोलॉजी को अपना साथी बनाकर खरीददारी को देशभक्ति से जोड़िये
– विदेशी ब्रांड की चमक छोड़िए, स्वदेशी की शक्ति को पहचानिये
– हर उत्पाद की खरीद में भारत को जोड़िये
– कारीगर और किसान की मेहनत का करें सम्मान, सीधे अपने घर तक लाएं सामान
-बड़ी दुकानों और मॉल में स्वदेशी का सेक्शन बनाएं
– डिजिटल ऐप बारकोड स्कैन करने पर तुरंत पता चले कि उत्पाद स्वदेशी है या विदेशी
– स्कूल और यूनिवर्सिटी में युवाओं को प्रोजेक्ट और प्रतियोगिताओं से जोड़ें
– ई कॉमर्स फिल्टर ऑनलाइन शॉपिंग में स्वदेशी फिल्टर का विकल्प रखें
-लोकप्रिय कलाकार या खिलाड़ी स्वदेशी का प्रचार करें
– स्वदेशी को बनाएं ब्रांड

















