शादी सदियों से महिलाओं को गुलाम बनाने का हथियार रही, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत का बयान
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शादी सदियों से महिलाओं को गुलाम बनाने का हथियार रही, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत का बयान

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस सूर्यकांत ने दिल्ली में सेमिनार में कहा कि शादी जैसी पवित्र व्यवस्था को महिलाओं पर कंट्रोल के लिए इस्तेमाल किया गया। अब कानूनी बदलावों से जेंडर इक्वालिटी मजबूत हो रही है। भारत-इंग्लैंड फैमिली लॉ ट्रेंड्स पर चर्चा।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Oct 17, 2025, 10:32 am IST
in भारत
Justice Suryakant talk about marriage

जस्टिस सूर्यकांत

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस सूर्यकांत ने हाल ही में एक सेमिनार में कहा कि शादी जैसी पवित्र लगने वाली व्यवस्था को सदियों से महिलाओं को गुलाम बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में, हर संस्कृति और हर दौर में, शादी को महिलाओं पर कंट्रोल रखने का जरिया बनाया गया। लेकिन अच्छी बात ये है कि अब कानूनी और सामाजिक बदलावों से इसमें बराबरी का भाव आ रहा है। लोग एक-दूसरे का सम्मान करने लगे हैं, और संविधान की समानता वाली भावना भी मजबूत हो रही है।

जस्टिस सूर्यकांत का बयान

जस्टिस सूर्यकांत ने ये बातें दिल्ली फैमिली लॉयर्स एसोसिएशन के आयोजित सेमिनार में कहीं। दिल्ली हाईकोर्ट की महिला वकीलों के सहयोग से ये कार्यक्रम हुआ। इसका टॉपिक था – ‘अंतर-सांस्कृतिक नजरिया: इंग्लैंड और भारत में फैमिली लॉ के नए ट्रेंड्स और चुनौतियां’। जस्टिस सूर्यकांत ने यहां पर खुलकर चर्चा की कि भारत और इंग्लैंड दोनों जगह अब जेंडर इक्वालिटी को फैमिली लॉ में तेजी से जगह मिल रही है।

शादी की समझ में बदलाव

जज ने कहा कि आजकल शादी जैसे संस्थान को लेकर बेहतर समझ बन रही है। खासकर भारत में ये बदलाव स्टेप बाय स्टेप हो रहा है। पहले तो शादी और संपत्ति के मामले धार्मिक किताबों और फिलॉसफी पर टिके रहते थे। लेकिन अब हालात अलग हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर समुदाय की अपनी परंपराएं और मान्यताएं होती हैं, जो सम्मान की हकदार हैं।

इसे भी पढ़ें: बांग्लादेशी घुसपैठियों ने चुनाव में हिंसा की रची थी साजिश, झांसी की कोर्ट ने सुनाई चार साल की सजा 

औपनिवेशिक दौर की कमियां

ब्रिटिश राज के समय हिंदू और मुस्लिम पर्सनल लॉ को कोड में ढाला गया, लेकिन वो परफेक्ट बिल्कुल नहीं था। जस्टिस सूर्यकांत कहते हैं कि ये कोडिफिकेशन आदर्श से कोसों दूर था, क्योंकि हर ग्रुप की अलग-अलग रीतियां थीं।

आजादी के बाद कानूनी क्रांति

उनका कहना है कि आजादी मिलने के बाद भारतीय संसद और कोर्ट ने फैमिली लॉ को सीरियसली लिया। उन्होंने एक मजबूत फ्रेमवर्क बनाया, जो आज भी काम का है। शादी का रजिस्ट्रेशन शुरू हुआ, जिससे बाल शादियां और बिना सहमति वाली शादियां पकड़ी जाने लगीं। जहां बहुविवाह की इजाजत नहीं, वहां कानूनी ऐक्शन का रास्ता खुल गया। महिलाओं को गुजारा भत्ता, संपत्ति का हक और घर का अधिकार मिला। ये सब कानूनों की बदौलत ही संभव हुआ।

Topics: फैमिली लॉ भारतजेंडर इक्वालिटीदिल्ली सेमिनारJustice SuryakantJustice Suryakant Marriage Women SlaveFamily Law Indiawomen RightsDelhi Seminarजस्टिस सूर्यकांतGender equalityमहिला अधिकारजस्टिस सूर्यकांत शादी महिला गुलाम
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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