महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए बड़ा कदम उठाया है। सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने घोषणा की है कि राज्य के 500 मंदिरों, 60 राज्य-संरक्षित किलों और 1800 बावड़ियों के संरक्षण के लिए एक विस्तृत योजना तैयार की जा रही है। योजना का उद्देश्य न केवल इन ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण और जीर्णोद्धार करना है, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ाना देना है। बावड़ी एक प्राचीन जलाशय होता है, जिस पर सीढियां बनी होती है। बावडियां जलाशय होने के साथ ही एक प्राचीन धरोहर के रूप में भी जानी जाती है। इसके आसपास सुंदर कलाकृतियां भी करवाई जाती रही हैं।
संस्था के सहयोग से लागू की जाएगी योजना
यह योजना पुरातत्व विभाग द्वारा एक मैत्री संस्था के सहयोग से लागू की जाएगी। धरोहरों के संरक्षण में रखरखाव, जीर्णोद्धार और अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के उपाय शामिल होंगे। तीन जिलों पुणे, छत्रपति संभाजीनगर और नासिक के लिए एक मास्टर प्लान भी तैयार किया जाएगा, ताकि उन्हें पर्यटन के मानचित्र पर और मजबूत स्थान मिल सके।
पुरातत्व, संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञ होंगे शामिल
मंत्रालय में एक समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री शेलार ने सुव्यवस्थित और समयबद्ध योजना के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए इतिहास, वास्तुकला, पुरातत्व और संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। इसके लिए पीआईयू (Project Implementation Unit) के तहत नए अधिकारियों की भर्ती भी की जाएगी। परियोजना की निगरानी के लिए खुले विज्ञापन के माध्यम से चार संविदा अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी।
गैर-संरक्षित किलों को शामिल करने की योजना
आशीष शेलार ने यह भी कहा कि राज्य-संरक्षित स्मारकों के अलावा 350 गैर-संरक्षित किलों को भी योजना में शामिल किया जाएगा। इसके लिए पर्याप्त धनराशि आवंटित की जाएगी और इन योजनाओं के लिए सरकारी-निजी साझेदारी (PPP) मॉडल पर काम किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर वर्ल्ड बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक के माध्यम से भी फंड जुटाया जाएगा। परियोजना का पहला चरण अगले साल मार्च तक शुरू हो जाएगा, जिसमें पांच बावड़ियां, पांच मंदिर और पांच किले सहित 15 चयनित स्थल शामिल होंगे।
पर्यटन प्रेमियों से योजना का समर्थन करने की अपील
राज्य सरकार पुणे, छत्रपति संभाजीनगर और नासिक के लिए ‘डेस्टिनेशन मैनेजमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DMO)’ बनाएगी। ये जिला प्रबंधन संगठन अपने-अपने जिलों में स्थित धरोहरों के संरक्षण, रखरखाव और पर्यटन पर केंद्रित एकीकृत योजनाएं तैयार करेंगे। ये योजनाएं पुरातत्व विभाग द्वारा ‘मैत्री’ के सहयोग और जिला कलेक्टरों के परामर्श से विकसित की जाएंगी। मंत्री शेलार ने सभी नागरिकों, इतिहास और पर्यटन प्रेमियों से इस मिशन में सहयोग करने की अपील की है।
योजना से बढ़ेगा महाराष्ट्र का गौरव
आशीष शेलार ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में यह योजना महाराष्ट्र की पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूत करेगी। जिस प्रकार छत्रपति शिवाजी महाराज के 12 किलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है, उसी प्रकार अब पूरे महाराष्ट्र के ऐतिहासिक स्थलों का एक संपूर्ण सांस्कृतिक रोडमैप तैयार किया जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार का यह कदम धरोहरों को नया जीवन देने के साथ राज्य की सांस्कृतिक पहचान को सहेजने व पर्यटन को गति देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इससे आने वाली पीढ़ियां इतिहास के बारे में बारीकी से जान सकेंगी।

















