“अस्तित्व उसी समाज, संस्कृति और राष्ट्र का रहेगा जिसे आत्म बोध और शत्रुबोध का ज्ञान रहेगा, संघ शताब्दी वर्ष में कई विरोधी इस महायज्ञ में बाधाएं डालने के नेरेटीव चला रहे हैं, ऐसे समय राष्ट्र भक्त समाज अपने संविधान को पढ़ कर, ज्ञान,संगठन शक्ति से भारत माता की सेवा में सलंग्न रहेगा तभी जय का मार्ग विश्व कल्याण का बनेगा।” – पदम जी
विश्व संवाद केंद्र, देहरादून द्वारा प्रकाशित पाक्षिक पत्रिका हिमालय हुंकार के दिवाली विशेषांक “धर्मो रक्षति रक्षित: भारतीय संविधान अनुच्छेद 26: विविधता से अखंडता की ओर” का विमोचन समारोह देहरादून के आईआरटीडी सभागार में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की क्षेत्र प्रचार प्रमुख पदम जी तथा कार्यक्रम अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. जयवीर सिंह नेगी जी थे।
अपने प्रेरक संबोधन में पदम ने कहा कि वर्तमान युग में युद्ध की प्रकृति बदल गई है – अब यह युद्ध के मैदान पर नहीं बल्कि “मानभूमि” पर लड़ा जाने वाला एक ‘वैचारिक युद्ध’ है। इस युद्ध में विचारों, मूल्यों और संस्कृति की रक्षा ही भारत के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी है। “जो धर्म की रक्षा करते हैं, धर्म उनकी रक्षा करता है।” यह केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारतीय जीवन दृष्टि का शाश्वत सिद्धांत है। आज आवश्यकता है कि हम परिवार और समाज की परिकल्पना को पुनः प्रतिष्ठित करें, क्योंकि परिवार ही राष्ट्र की मूल इकाई है और सुदृढ़ परिवार से ही सशक्त समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण होता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है और इस अवसर पर संगठन सेवा, समर्पण और राष्ट्रहित के कार्यों के प्रति वैश्विक विश्वास को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
कार्यक्रम के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) जे. एस. नेगी जी ने संघ के अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और निस्वार्थ समर्पण की भावना की सराहना करते हुए कहा कि “जैसे सैनिक अपने क्षेत्र में अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहता है वैसा ही समाज में 100 वर्षों की यात्रा में संघ ने करके दिखाया है। मैं संघ के इस अभियान की सदा प्रेरक इतिहास को प्रणाम करता हूं।” कार्यक्रम का संचालन विभाग प्रचार प्रमुख गजेंद्र खंडूरी जी द्वारा किया गया। पत्रिका का उद्देश्य- जनमानस में सकारात्मक विचार का संचार !
‘हिमालय हुंकार’ पत्रिका का यह दिवाली विशेषांक भारतीय संविधान के विविध पहलुओं, संशोधनों, संविधान के महत्व व अनेक पठनीय विषयों पर केंद्रित है। इस विशेषांक में अनेक विद्वानों, चिंतकों और समाजसेवियों के लेख संकलित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य पाठकों में देशभक्ति, आत्मविश्वास और सकारात्मकता का भाव उत्पन्न करना है। समारोह में शहर के अनेक बौद्धिक, सामाजिक एवं शैक्षिक क्षेत्र से जुड़े गणमान्यजन उपस्थित रहे। सभी ने ‘हिमालय हुंकार’ के इस अंक की सराहना की और पत्रिका के माध्यम से समाज में सशक्त वैचारिक संवाद के प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में शाक्त ध्यानी जी संपादक हलंत पत्रिका, राजकुमार टों सचिव विश्व संवाद केंद्र, संजय जी प्रांत प्रचार प्रमुख, श्रीमान बृजेश बनकोटी प्रांत सह प्रचार प्रमुख, धनंजय जी विभाग प्रचारक, अरुण शर्मा विभाग सह-कार्यवाह, प्रदीप आनंद, प्रेम चमोला, मनीष बागड़ी आदि स्वयंसेवक बंधु उपस्थित रहे।

















