अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी ने सोमवार को भारत से पाकिस्तान को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में अब शांति है और उनका देश किसी से झगड़ा नहीं मोल लेना चाहता। उन्होंने साफ लफ्जों में कहा कि पाकिस्तान को छोड़कर उनके बाकी पांच पड़ोसी देश सब उनसे खुश हैं। मुत्तकी इन दिनों भारत की छह दिन की यात्रा पर हैं। उन्होंने हाल के सीमा झड़पों पर भी अपनी राय रखी।
पाकिस्तान टीटीपी को शरण देने का इल्जाम लगा रहा
पाकिस्तान लंबे वक्त से तालिबान सरकार पर गंभीर आरोप लगाता आ रहा है। उसका कहना है कि अफगानिस्तान तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) जैसे आतंकवादी गुटों को पनाह दे रहा है। पाकिस्तान ने अपने यहां हुए कई धमाकों और हमलों के लिए टीटीपी को जिम्मेदार ठहराया है। लेकिन काबुल की तरफ से ये सारे इल्जाम सिरे से खारिज कर दिए जाते हैं। अफगानिस्तान कहता है कि ये सब बेबुनियाद बातें हैं। मुत्तकी ने भी इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहा।
मुत्तकी का संदेश: शांति चाहते हैं, लेकिन विकल्प भी हैं
मुत्तकी ने बड़े ही साफ लहजे में कहा, “हम किसी के साथ लड़ाई नहीं झगड़ा चाहते। अफगानिस्तान में शांति कायम हो चुकी है। पाकिस्तान हमारा इकलौता पड़ोसी नहीं, हमारे पास पांच और हैं… सब हमसे संतुष्ट हैं।” रविवार को उन्होंने पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि अगर शांति नहीं चाहिए तो काबुल के पास “दूसरे रास्ते” भी हैं। ये बात हाल के सीमा झगड़ों के बीच आई, जहां 58 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। बृहस्पतिवार को काबुल में पाकिस्तानी एयर स्ट्राइक के बाद तनाव फिर भड़क गया। जवाब में अफगान फौज ने शनिवार रात सीमा पर कई पाकिस्तानी चौकियों पर हमला बोला, जिससे बड़ा टकराव टलने को था।
मुत्तकी ने कहा, “कुल मिलाकर हालात काबू में हैं। हम अपनी आजादी का कोई उल्लंघन बर्दाश्त नहीं करेंगे।” उन्होंने जोड़ा कि अफगानिस्तान को पाकिस्तानी लोगों या लीडर्स से शिकायत नहीं, बल्कि वहां कुछ तत्व माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। “हम बातचीत से सब सुलझाना चाहते हैं। दरवाजे खुले हैं। लेकिन अगर कोई नहीं मानता, तो हमारे पास अपनी जमीन और आसमान की हिफाजत करने की ताकत है।” कतर और सऊदी अरब जैसे दोस्त देशों ने भी काबुल से कहा है कि लड़ाई बंद हो। मुत्तकी ने बताया, “हमने अपनी तरफ से गोलीबारी रोकी है। अच्छे रिश्ते चाहिए। हम पूरे इलाके में अमन चाहते हैं।”
अफगानिस्तान की ताकत
मुत्तकी ने अफगानिस्तान के मुश्किल इतिहास का जिक्र किया। बोले, “हमारी पॉलिसी सबके साथ अच्छे ताल्लुक रखने की है। 40 साल से ज्यादा जंग चली यहां। सोवियत यूनियन आया, हारा। फिर अमेरिका और नाटो के 50 से ज्यादा देशों की फौजें 20 साल लड़ीं, लेकिन अब अफगानिस्तान आजाद है और अपने पैरों पर खड़ा है।” उन्होंने कहा कि पिछले चार सालों से कोई बड़ी वारदात नहीं हुई। पूर्व से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण तक लोग एकजुट हैं। “हमारी खासियत ये है कि अंदरूनी मतभेद हों, लेकिन बाहर का दखल हो तो सब अफगान, सरकार हो या मौलवी, एक हो जाते हैं। देश की रक्षा के लिए सीना तान लेते हैं। भविष्य में भी ऐसा ही होगा।” मुत्तकी ने जोर देकर कहा कि अफगान लोग और फौजें देश हिफाजत में मुत्तहिद हैं।

















