समाज में बड़े परिवर्तन की शुरुआत छोटे-छोटे प्रयासों से ही होती है। जब हम अपने व्यवहार में सुधार लाते हैं तो समाज में सकारात्मक बदलाव होता है। समय पालन, दूसरों की निस्वार्थ मदद, पर्यावरण का ध्यान रखना, पारिवारिक जुड़ाव बनाए रखना ये सब ऐसी आदतें है जिनके पालन से पूरे समाज में सकारात्मक परिवर्तन होगा। आज का समय केवल चर्चा का नहीं बल्कि कर्म है। पंच परिवर्तन का सिद्धांत हर भारतीय के जीवन में अपनाया जाना चाहिए।
उपरोक्त बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाह आलोक कुमार ने कही। वे संघ शताब्दी वर्ष पर आयोजित कार्यक्रम के अवसर पर मोतिहारी के प्रेक्षागृह में उपस्थित स्वयंसेवकों को संबोधित कर रहे थे। इस विशाल परिसर में संघ के पूर्ण गणवेश में उपस्थित हजारों स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन केवल विचारों तक सीमित नहीं है बल्कि इन्हें हर नागरिक को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। समाज कि यह मांग है कि सब लोग समान दृष्टि से एक दूसरे को देखें।
ऊंच-नीच का भेद विकसित भारत के रास्ते में रुकावट
ऊंच नीच का भेद समाप्त करना एक विकसित भारत के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है। सामाजिक समरसता की स्थापना से ही भारत विकसित राष्ट्र की श्रेणी में खड़ा होगा। उन्होंने संयुक्त परिवार के बारे में संबोधित करते हुए लोगों से कहा कि भारत की परिवार व्यवस्था विश्व के लिए पथ प्रदर्शक का काम करती है, लेकिन आज आधुनिकता के चक्कर में यह व्यवस्था कमजोर पड़ रही है। इसे समझने और फिर से मजबूत करने की आवश्यकता है। यदि परिवार व्यवस्था समाप्त हो गई तो हमारे पूर्वजों ने जो सांस्कृतिक मूल्य स्थापित किये हैं वे धीरे-धीरे समाप्त हो जाएंगे।
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पर्यावरण संरक्षण पर जोर
इसी क्रम में उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि आज आधुनिकता के चक्कर में हम तेजी से घर तो बना रहे हैं, लेकिन उस आड़ में कटते हुए वृक्षों की चिंता हम नहीं कर रहे, इससे आने वाला समय बहुत दुष्कर होगा। हम यदि एक पेड़ काटते हैं तो उसके बदले कम से कम 10 पेड़ लगाया जाना चाहिए, यदि इसकी चिंता कर ली जाए तो प्रकृति सुरक्षित रहेगी। वहीं उन्होंने स्वदेशी अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि भारत को यदि आत्मनिर्भर बनाना है तो स्वदेशी जीवन शैली को अपनाना हीं पड़ेगा। छोटी-छोटी बातों से बड़ा परिवर्तन होगा, वहीं इस क्रम में उन्होंने नागरिक कर्तव्य पर भी प्रकाश डाला और कहा कि कुछ ऐसे कर्तव्य हैं जिनका पालन एक सामान्य नागरिक के रूप में हमको करना चाहिए। इसके लिए कोई कहने नहीं जाएगा, बल्कि ये कर्तव्य स्वस्फूर्त होते हैं। हम सबको इन नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहना होगा।
100 वर्ष से निर्बाध चल रहा संघ
बता दें कि संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर पूरे देश भर में कार्यक्रम हो रहे हैं। इसी क्रम में बिहार के मोतिहारी में यह कार्यक्रम आयोजित था। मुख्य अतिथि की भूमिका में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी के कुलपति प्रोफेसर संजय श्रीवास्तव उपस्थित रहे। उन्होंने देश में संघ के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वयंसेवकों ने कभी किसी प्रशंसा की अपेक्षा नहीं की। समाज के लिए निस्वार्थ काम किया। किसी व्यक्ति के नहीं बल्कि विचारों के पीछे चलने वाले संगठन का नाम है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और यही कारण है कि पिछले 100 वर्षों से यह निर्बाध गति से चला आ रहा है, और आगे ही आगे बढ़ा है। इस कार्यक्रम में बौद्धिक सत्र के पूर्व पूरे नगर में संचलन का आयोजन किया गया, जहां घोष की ताल पर कदम से कदम मिलाकर चलते स्वयंसेवकों को देखकर कई स्थानों पर लोगों ने पुष्प वृष्टि की।

















